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लैब के अंदर बंदरों से बर्बरता, दर्दनाक तस्वीरें आईं सामने...

aajtak.in
  • 20 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 10:53 AM IST
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प्रयोग करने के लिए किसी को प्रताड़ित करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है. इस कानून की धज्जियां उड़ाने वाले एक प्रयोगशाला को बंद करने का आदेश हुआ है. जर्मनी के मीनेनबुटेल स्थित इस प्रयोगशाला में जानवरों पर प्रयोग किए जाते थे. बंदर, बिल्ली, कुत्ते आदि जानवरों पर बर्बरतापूर्वक टेस्ट होते थे. बंदरों को धातु के हार्नेस में बांध कर घंटों खड़ा रखा जाता था. उनके हाथ-पैर बांध दिए जाते थे. लेकिन अब जीव-जंतुओं को इससे छुटकारा मिल जाएगा. आइए जानते हैं इस प्रयोगशाला की बर्बरता की कहानी...(फोटोः Cruelty Free International)

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जर्मनी के हैमबर्ग शहर के नजदीक मीनेनबुटेल कस्बे में द लेबोरेटरी ऑफ फॉर्मेकोलॉजी एंड टॉक्सिकोलॉजी. इस प्रयोगशाला पर अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था क्रुएलिटी फ्री इंटरनेशनल ने स्टिंग ऑपरेशन किया. इसके बाद दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आई थीं. इन तस्वीरों के सामने आने के बाद जर्मनी प्रशासन को झुकना पड़ा और अब इस प्रयोगशाला को बंद करने का आदेश दिया जा चुका है. (फोटोः Cruelty Free International)

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इस प्रयोगशाला में सबसे ज्यादा ज्यादती बंदरों पर होती थी. कारण यह है कि किसी भी प्रकार की बीमारी या दवाओं का परीक्षण इन्हीं पर सबसे ज्यादा होता था. बंदर प्रयोग के दौरान भागे नहीं इसलिए उन्हें धातुओं के हार्नेस में जकड़ दिया जाता था. उनकी गर्दन, हाथ और पैर बांध दिए जाते थे. इसके बाद घंटों उनपर परीक्षण किया जाता था. बंदरों के सीने पर प्रयोग से संबंधित कोड नंबर लिखे जाते थे. (फोटोः Cruelty Free International)

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क्रुएलिटी फ्री इंटरनेशनल के स्टिंग ऑपरेशन के बाद जर्मनी की सरकार ने इस प्रयोगशाला की लाइसेंस रद्द कर दिया है. अब इस प्रयोगशाला के संचालकों पर पशु क्रूरता कानून के तहत केस चलने वाला है. क्योंकि यहां जानवरों के गले में पाइप डालकर जबरदस्ती दवाएं दी जाती थीं. इतनी ज्यादा हिंसा होती थी इन जानवरों को ये किसी भी नए आदमी को देखकर डरने लगते थे. (फोटोः Cruelty Free International)

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बिल्लियों के दिनभर में 13 से ज्यादा इंजेक्शन दिए जाते थे. कुत्तों को इंसानी पहुंच से दूर रखा जाता था. ये जानवर मानसिक रूप से विक्षिप्त होने लगे थे. कई तो अपने पिंजड़े में गोल-गोल चक्कर लगाते रहते थे. इस प्रयोगशाला में इतनी बर्बरता इसलिए हुई क्योंकि जर्मनी में पशु क्रूरता को लेकर कानून बेहद कमजोर और ढीले हैं. (फोटोः Cruelty Free International)

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