स्वयं को 'कल्कि भगवान' कहने वाले विजय कुमार नायडू के यहां इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की रेड गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रही. 'कल्कि भगवान' और उसके लड़के कृष्णा के चार राज्यों के आश्रम इस रेड की जद में हैं. इनके आश्रम का जाल तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में फैला था जहां रेड चल रही है.
'कल्कि भगवान' के 40 ठिकानों पर रेड चल रही है. जिनमें उनके नाम पर बनी एक यूनिवर्सिटी और एक आध्यात्मिक स्कूल शामिल है. इनका मुख्य आश्रम आंध्र प्रदेश में चित्तूर जिल के वैरादेहपलेम में है. मुख्य आश्रम के कैंपस को चारों तरफ से कवर कर लिया गया और यहां से न तो कोई निकल सकता है और न कोई अंदर आ सकता है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सूत्रों के अनुसार, आश्रम के ऊपर जमीनों को हड़पने और कर चोरी के आरोप हैं. इसके अलावा कल्कि ट्रस्ट के फंड को लेकर भी यहा का मैनेजमेंट निशाने पर है. प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आईटी डिपार्टमेंट कल्कि आश्रम ट्रस्ट के मैनेजर लोकेश देसाजी से वित्तीय लेन-देन को लेकर पूछताछ कर रहे हैं.
जानकारी के अनुसार, एलआईसी में क्लर्क के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले विजय कुमार नायडू उर्फ 'कल्कि भगवान' ने बाद में नौकरी छोड़कर एक एजुकेशन संस्थान की स्थापना की परंतु संस्थान का दिवालिया निकल गया तो वह भूमिगत हो गया अपने आप को विष्णु के दसवें अवतार कल्कि भगवान बताते हुए विजय कुमार 1989 में फिर से चित्तूर में प्रकट हुआ.
उसके बाद उन्होंने अपने आश्रम की गतिविधियों का विस्तार आंध्र प्रदेश सहित तमिलनाडु में किया. 'कल्कि भगवान' अपने और पत्नी पद्मावती को दैव स्वरूप बताते थे. इन आश्रमों में देश के धनी लोगों के अलावा विदेशी और एनआरआई की कतारें लगती थी. कल्कि भगवान के साधारण दर्शन के लिए 5 हजार और विशेष दर्शन के लिए 25 हजार रुपए देने पड़ते थे.
'कल्कि भगवान' के साथ उनके बेटे कृष्णा के खिलाफ सैकड़ों एकड़ जमीनों पर कब्जा कर रियल एस्टेट कारोबार करने की शिकायत के बाद 2010 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने मामले की जांच के आदेश दिए थे. 2008 में चित्तूर जिले के कल्कि आश्रम में मची भगदड़ में पांच लोगों की मौत होने के अलावा कई लोग घायल हुए थे. इससे कुछ दिनों तक आश्रम बंद पड़ा रहा था.