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असम: हिंदुओं से ज्यादा बढ़ी मुस्लिमों की आबादी, चौंका देंगे आंकड़े

आदित्य बिड़वई
  • 31 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 3:49 PM IST
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नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) के अंतिम ड्राफ्ट में असम में रह रहे 40 लाख लोग अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए. ड्राफ्ट में 2.89 करोड़ नाम हैं, जबकि आवेदन 3.29 करोड़ लोगों ने किया था. अब एनआरसी में नाम नहीं होने के बाद 40 लाख बांग्लाभाषी मुस्लिमों को डिपोर्ट होने का खौफ सता रहा है.

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यदि हम 1951 से असम के जनगणना के आंकड़ों पर नजर डाले तो 1951-61 के दौरान हिंदू 33.71 प्रतिशत और मुस्लिम  38.35 प्रतिशत बढ़े. जबकि 1961 से 71 के बीच हिंदू 37.17 प्रतिशत और मुस्लिम 30.99 प्रतिशत बढ़े.

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इसी तरह 1971 से 91 के बीच हिंदू 41.89 प्रतिशत और मुस्लिम 77.41 प्रतिशत बढ़े. ज्ञात हो कि 1981 में असम में जनगणना नहीं हुई थी.

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सबसे चौंकाने वाले आंकड़े तो 1991 से 2001 के हैं. इस दौरान हिन्दुओं की जनसंख्या में असम में वृद्धि नहीं हुई. वहीं, मुस्लिम 29.30 प्रतिशत बढ़े. इसके अलावा 2001 से 2011 के दौरान हिंदू 10.9 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी 29.59 बढ़ी.

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एनआरसी की रिपोर्ट में हैरान करने वाली बात तो यह भी है कि कई हिंदू भी अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए हैं. इनमें एक तो सत्तारूढ़ भाजपा के मोरीगांव से विधायक रमाकांत देवरी हैं. जबकि दूसरे दक्षिण अभयपुरी से एआईयूडीएफ विधायक अनंत कुमार मल्लाह हैं.

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गौरतलब है कि एनआरसी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बना है. इसके लिए केंद्र ने 1,220 करोड़ रुपए का बजट जारी किया था.
पिछले साढ़े तीन साल के दौरान इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में 40 से ज्यादा सुनवाई हुई हैं.

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