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भारत का सबसे बड़ा रेल-रोड ब्रिज: फाइटर जेट भी कर सकता है लैंड

aajtak.in
  • 26 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 1:45 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को असम के बोगीबील में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने देश के सबसे लंबे रेल-सह-सड़क पुल का उद्घाटन किया. यह पुल भारत के लिए कई मायनों में बेहद खास है. कई रिपोर्ट में इसे इंजीनियरिंग का खास नमूना बताया गया है. यह पुल भारत के सबसे भारी टैंक का भार भी सह सकता है  और आपात स्थिति में पुल पर फाइटर जेट की भी लैंडिंग हो सकती है. (फोटोज- Twitter)

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वहीं, 4.94 किलोमीटर लंबे पुल के उद्घाटन के मौके पर मोदी ने कहा- एक निश्चित समय सीमा के तहत परियोजनाओं को पूरा किया जाना अब कागजों तक सीमित नहीं है बल्कि हकीकत बन गया है. आपको बता दें कि इस पुल की आधारशिला 1997 में रखी गई थी. निर्माण 2002 में शुरू किया गया था.

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इस पुल से अरुणाचल प्रदेश में चीन बॉर्डर के पास मौजूद सैनिकों की आवाजाही और उन तक सामग्रियों का भेजा जाना भी आसान हो जाएगा. इस पुल से असम से अरूणाचल प्रदेश की यात्रा में लगने वाला वक्त काफी घट जाएगा.

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इस रेल रूट पर तिनसुकिया-नाहरलगुन इंटरसिटी एक्सप्रेस सप्ताह में पांच दिन चलेगी. असम के तिनसुकिया से अरूणाचल प्रदेश के नाहरलगुन कस्बे तक की रेलयात्रा में लगने वाले समय में 10 घंटे से अधिक की कमी आएगी.

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पूर्वोत्तर फ्रंटियर रेलवे के प्रवक्ता नितिन भट्टाचार्य ने कहा था- ‘मौजूदा समय में इस दूरी को पार करने में 15 से 20 घंटे के समय की तुलना में अब इसमें साढ़े पांच घंटे का समय लगेगा. इससे पहले यात्रियों को कई बार रेल बदलनी पड़ती थी.’

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कुल 14 कोचों वाली तिनसुकिया-नाहरलगुन इंटरसिटी एक्सप्रेस में चेयर कार होंगे. रेलगाड़ी तिनसुकिया से दोपहर में रवाना होगी और नाहरलगुन से सुबह वापसी करेगी.

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पुल का निर्माण 5,900 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है. इससे दिल्ली और डिब्रूगढ़ के बीच ट्रेन यात्रा में लगने वाला समय करीब तीन घंटा कम होकर 34 घंटा रह जाएगा जो फिलहाल 37 घंटा है.

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भाषा के मुताबिक, परियोजना की आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा ने 22 जनवरी 1997 को रखी थी जबकि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में 21 अप्रैल,2002 को इसका काम शुरू हुआ था. कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने 2007 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था.

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