फ्लाइट में टेकऑफ के वक्त एयर होस्टेस हाथों को जांघों के नीचे दबाकर क्यों बैठती हैं? वजह जानकर रह जाएंगे दंग!

क्या आप जानते हैं कि फ्लाइट टेकऑफ और लैंडिंग के समय एयर होस्टेस अपने हाथों को जांघों के नीचे दबाकर क्यों बैठती हैं? अगर नहीं तो ये खबर आपके लिए. ये न तो उनका आराम करने का तरीका है और न ही कोई मजबूरी. इस खास तरीके के पीछे छिपा सुरक्षा का कारण है.

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हाथों को नीचे दबाकर फ्लाइट एटेंडेंट अपने आपको चोट लगने से बचाते हैं. (Photo: ITG) हाथों को नीचे दबाकर फ्लाइट एटेंडेंट अपने आपको चोट लगने से बचाते हैं. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:32 PM IST

आजकल हवाई सफर करना एक बहुत ही आम बात बन गया है. ज्यादातर लोग फ्लाइट से कभी न कभी ट्रैवल कर ही चुके होंगे. फ्लाइट में बैठना और सफर करना अपने आप में बहुत रोमांचक होता है. थोड़ी सी घबराहट और दिल में रोमांच लिए जब लोग जमीन से हजारों फीट ऊपर हवा में सफर कर रहे होते हैं तब उनके साथ फ्लाइट अटेंडेंट होते हैं. वो लोगों को फ्लाइट में बैठने के लिए इंस्ट्रक्शंस देते हैं और उनका ख्याल रखते हैं. लेकिन फ्लाइट टेकऑफ और लैंडिंग के समय यही फ्लाइट अटेंडेंट कुछ ऐसा करते हैं, जो लोगों को बहुत अजीब लगता है.

दरअसल, फ्लाइट अटेंडेंट/एयर होस्टेस अपनी सीट पर सीधे बैठकर अपने हाथों को जांघों के नीचे दबा लेते हैं. पहली नजर में ये थोड़ा अजीब लगता है. कई लोगों को लगता है कि ये उनका आराम करने का तरीका है, लेकिन ऐसा नहीं होता है. अगर आपके मन में भी हर बार फ्लाइट में सफर करते हुए यही सवाल आता है कि आखिर वो अपने हाथों को जांघ के नीचे क्यों दबा लेती हैं, तो ये खबर आपके लिए है. चलिए जानते हैं कि वो ऐसा क्यों करते हैं.

क्या है हाथों को जांघों के नीचे दबाने वाला पोज?
जब भी फ्लाइट टेकऑफ या लैंडिंग करती है, तो ये सफर का सबसे सेंसिटिव समय माना जाता है. ऐसे वक्त पर कई बार फ्लाइट अटेंडेंट एक खास तरह की पोजिशन में बैठते हैं, जिसे ब्रेस पोजिशन कहा जाता है. इस पोज में वो अपनी पीठ सीधी रखते हैं, दोनों पैर जमीन पर मजबूती से टिके होते हैं और अपने हाथों को जांघों के नीचे दबाकर रखते हैं. जानकर हैरानी होगी कि ये न तो कोई आदत है और न ही कोई आराम करने का तरीका, बल्कि ये उनकी प्रोफेशनल ट्रेनिंग में सिखाया गया एक बहुत जरूरी हिस्सा होता है.

ब्रेस पोजिशन में क्यों बैठते हैं?
इस पोज में बैठने का सबसे बड़ा कारण सुरक्षा होती है. टेकऑफ और लैंडिंग के समय अगर कोई इमरजेंसी होती है, तो ये उनके शरीर को लगने वाली चोट को कम कर देती है. इस पोज में बैठने से गंभीर चोट लगने का खतरा काफी हद तक टल जाता है. 

जब हाथों को जांघों के नीचे दबाया जाता है, तो शरीर ज्यादा स्टेबल रहता है और अचानक झटके के दौरान हाथ-पैर इधर-उधर नहीं जाते हैं. इससे सिर, कंधे और हाथों में चोट लगने का खतरा काफी कम हो जाता है.  

यात्रियों से अलग क्यों होता है इनका पोज?
अगर फ्लाइट में अचानक कोई झटका या हादसा हो जाए, तो यात्रियों को आगे झुककर सिर नीचे करने को कहा जाता है, लेकिन फ्लाइट अटेंडेंट ऐसा क्यों नहीं करते? उनकी पोजीशन अलग क्यों होती है? दरअसल, उनके ऊपर फ्लाइट में बैठे यात्रियों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी होती है और इसके पीछे उनकी अलग सीटिंग पोजीशन भी होती है. उनकी सीट अलग दिशा में होती है और उन्हें हर समय पूरे केबिन पर नजर रखनी होती है. उन्हें किसी भी इमरजेंसी में उन्हें तुरंत उठकर एक्टिव होना पड़ता है. इसलिए वो सीधे बैठकर खुद को हमेशा किसी भी स्थिति के लिए तैयार में रखते हैं.

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फ्लाइट अटेंडेंट का काम सिर्फ यात्रियों को खाना सर्व करना या उन्हें इंस्ट्रक्शंस देना नहीं होता है, बल्कि इमरजेंसी के समय में उनकी जान बचाना भी होता है. इसी वजह से उन्हें इस खास पोज में बैठने की ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे वो बिना देरी किए तुरंत खड़े हो सकें. अगर वो इस पोज में बैठते हैं तो वो जल्दी से फ्लाइट के दरवाजे खोल सकते हैं, यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल सकते हैं.  

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