मुफ्त में करें ताजमहल का दीदार, अगले 3 दिनों तक नहीं लगेगा कोई टिकट

अगर आप ताजमहल देखने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो जनवरी का यह मौका खास बन सकता है. शाहजहां के 371वें उर्स के अवसर पर 15 से 17 जनवरी तक ताजमहल में लगातार तीन दिन तक बिना टिकट प्रवेश की सुविधा दी जा रही है. खास बात यह है कि इस दौरान सिर्फ परिसर ही नहीं, बल्कि मुख्य मकबरे में भी पर्यटक जा सकेंगे.

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बिना टिकट देख सकेंगे ताज का मुख्य मकबरा (Photo: PTI) बिना टिकट देख सकेंगे ताज का मुख्य मकबरा (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:32 AM IST

अगर आप दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल का दीदार करने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए एक शानदार खबर है. आगरा की मोहब्बत की इस निशानी में अगले तीन दिनों तक पर्यटकों को प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं लेना होगा. 

जानें कब और किस समय मिलेगी फ्री एंट्री

ताजमहल की सुपरिटेंडेंट स्मिता एस. कुमार के अनुसार, उर्स के दौरान पर्यटकों की भारी भीड़ को देखते हुए समय निर्धारित किया गया है. 15 और 16 जनवरी को दोपहर 2:00 बजे से सूर्यास्त तक ताजमहल में प्रवेश निःशुल्क रहेगा. वहीं, उर्स के आखिरी दिन यानी 17 जनवरी को सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक पूरे दिन के लिए एंट्री फ्री रखी गई है. यहां एक विशेष बात का ध्यान रखना जरूरी है कि 16 जनवरी को शुक्रवार होने के कारण ताजमहल की साप्ताहिक बंदी रहती है.

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इस वजह से शुक्रवार को सुबह के समय स्मारक केवल नमाजियों के लिए खुलेगा. आम पर्यटकों के लिए दोपहर 2:00 बजे के बाद ही गेट खोले जाएंगे, जिसके बाद वे शाम तक बिना किसी शुल्क के ताज का दीदार कर पाएंगे. यह तीन दिन देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक उत्सव जैसा माहौल लेकर आते हैं.

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1720 मीटर लंबी सतरंगी चादर होगी मुख्य आकर्षण

शाहजहां का उर्स इस्लामिक कैलेंडर के रजब महीने में मनाया जाता है. मान्यता है कि बादशाह शाहजहां अल्लाह के नेक बंदों में से एक थे, इसलिए उनकी याद में हर साल यह आयोजन होता है. इस उर्स का सबसे खास हिस्सा है 17 जनवरी को चढ़ाई जाने वाली 'सतरंगी हिंदुस्तानी चादर'. इस बार यह चादर 1720 मीटर लंबी होगी, जो पिछले साल के मुकाबले 82 मीटर अधिक है. खुद्दाम-ए-रोजा कमेटी के अध्यक्ष 82 वर्षीय हाजी ताहिरुद्दीन ताहिर पिछले 40 सालों से इस परंपरा को निभा रहे हैं.

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यह सतरंगी चादर केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और सर्वधर्म सद्भाव का प्रतीक है. इसे तैयार करने में सभी धर्मों के लोगों की आस्था शामिल होती है. उर्स के आखिरी दिन दक्षिणी गेट स्थित हनुमान मंदिर से धर्मगुरुओं की मौजूदगी में यह विशाल चादर निकाली जाएगी. जुलूस के रूप में इसे मुख्य मकबरे के तहखाने में स्थित शाहजहां और मुमताज की कब्र पर पेश किया जाएगा. उर्स के दौरान कुरानख्वानी, फातिहा और पंखा चढ़ाने जैसी रस्में भी पूरी की जाएंगी, जो इस ऐतिहासिक इमारत में भक्ति और परंपरा का अनोखा संगम पेश करेंगी.
 

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