क्या आपने कभी ऐसी जगह के बारे में सुना है जहां मंदिर की आरती इंसान नहीं, बल्कि हाथी करते हैं? सुनने में किसी चमत्कार जैसा लगता है, लेकिन गुजरात के पोइचा में हर शाम यह हकीकत में बदलता है. जब नर्मदा नदी के तट पर शंख बजते हैं और ढोल-नगाड़ों की थाप गूंजती है, तो सजे-धजे हाथी अपनी सूंड से मंदिर की घंटियां बजाकर भगवान की वंदना करते हैं.
यह अद्भुत नजारा है नीलकंठ धाम का, जो आज के समय में आस्था और भव्यता की सबसे सुंदर मिसाल बन चुका है. अगर आप भी भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं, जहां सुकून और रोमांच एक साथ मिले, तो पोइचा का यह स्वामीनारायण मंदिर आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए. तो चलिए जानते हैं कि आखिर क्या है इस मंदिर की खासियत और क्यों यहां आने वाला हर शख्स दंग रह जाता है.
नर्मदा किनारे बसा आध्यात्मिक ब्रह्मांड
नीलकंठ धाम सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि 24 एकड़ में फैला आस्था का एक विशाल केंद्र है. साल 2013 में बने इस धाम की चमक आज पूरे गुजरात में फैली हुई है. नर्मदा नदी के ठंडे किनारे पर बसे इस मंदिर में कदम रखते ही आपको एक अलग ही दुनिया का एहसास होता है. यहां की सबसे बड़ी खासियत है 1,008 शिवलिंग, जिन्हें देखकर मन श्रद्धा से भर जाता है. इसके अलावा, परिसर में शेषनाग पर विराजमान भगवान विष्णु, हनुमान जी और गणेश जी की भव्य मूर्तियां भी भक्तों का दिल जीत लेती हैं.
यहां की शाम की आरती का अनुभव इतना खास है कि इसे देखने के लिए लोग घंटों इंतजार करते हैं. जैसे ही सूरज ढलता है, पूरा मंदिर रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा उठता है. हाथियों द्वारा घंटी बजाने का वो दृश्य इतना अलौकिक होता है कि श्रद्धालु अपनी सुध-बुध भूल जाते हैं. इसके बाद होने वाला लाइट एंड साउंड शो इस दिव्य अनुभव में चार चांद लगा देता है.
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भक्ति के साथ मस्ती भी
मंदिर के अंदर ही एक और दुनिया बसी है, जिसे 'सहजानंद यूनिवर्स' कहा जाता है. यहां भगवान स्वामीनारायण की 151 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा है, जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे. यह जगह बच्चों और बड़ों दोनों के लिए किसी टूरिस्ट स्पॉट से कम नहीं है. यहां साइंस सिटी, वाटर पार्क, भूल-भुलैया और 3D लाइट शो जैसी सुविधाएं हैं. यानी आप यहां भगवान के दर्शन तो करेंगे ही, साथ ही परिवार के साथ फुल मनोरंजन भी कर सकते हैं.
नीलकंठ धाम अपने प्रसाद के लिए भी बहुत मशहूर है. यहां का शुद्ध शाकाहारी भोजन और खासकर यहां मिलने वाली खीर का स्वाद आपकी जुबान पर चढ़ जाएगा. अगर आप यहां रुकना चाहते हैं, तो मंदिर प्रशासन ने बहुत ही कम रेट पर ठहरने की भी बढ़िया व्यवस्था कर रखी है.
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कैसे पहुंचें पोइचा?
अगर आप भी इस दिव्य नजारे और हाथियों वाली आरती का गवाह बनना चाहते हैं, तो नीलकंठ धाम पहुंचना बहुत आसान है. अगर आप हवाई जहाज से आने का प्लान बना रहे हैं, तो सबसे नजदीकी एयरपोर्ट वडोदरा है जो मंदिर से लगभग 66 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. वहीं रेल यात्रियों के लिए भी वडोदरा रेलवे स्टेशन ही सबसे बेहतर विकल्प है, जहां से करीब 62 किलोमीटर का सफर तय करके आप पोइचा पहुंच सकते हैं. स्टेशन या एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही आपको मंदिर तक जाने के लिए प्राइवेट टैक्सी और बसें आसानी से मिल जाएंगी.
इसके अलावा अगर आप सड़क मार्ग से अपनी गाड़ी में आ रहे हैं, तो वडोदरा से आपको सिर्फ 60 किलोमीटर और भरूच से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी. सबसे अच्छी बात यह है कि दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' यहां से महज 40 किलोमीटर दूर है, इसलिए आप एक ही ट्रिप में इन दोनों शानदार जगहों का आनंद ले सकते हैं.
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