जानलेवा ठंड या 'सफेद जन्नत', सर्दियों में लद्दाख का ये रूप आपको दीवाना बना देगा

सर्दियों में लद्दाख का नजारा किसी दूसरी दुनिया जैसा होता है, जहां हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच भी लोग इसकी खूबसूरती देख मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. जानिए क्यों यह जगह हर साहसी मुसाफिर के लिए एक यादगार अनुभव बन जाती है.

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बर्फ की परतों में लिपटा लद्दाख का जादुई रूप (Photo: PTI) बर्फ की परतों में लिपटा लद्दाख का जादुई रूप (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:17 PM IST

अगर आप सोचते हैं कि छुट्टियां सिर्फ सुहावने मौसम और हरियाली के बीच ही मनाई जाती हैं, तो आपको एक बार सर्दियों में लद्दाख का रुख करना चाहिए. जब देश के बाकी हिस्सों में लोग हल्की गुलाबी ठंड का आनंद ले रहे होते हैं, तब लद्दाख एक ऐसी 'बर्फीली दुनिया' में तब्दील हो जाता है जिसकी खूबसूरती किसी सपने से कम नहीं है. यहां तापमान गिरकर -11°C से -30°C तक पहुंच जाता है, जहां हवाएं भी चेहरे पर सुई की तरह चुभती हैं. लेकिन इसी हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच लद्दाख अपना वो रूप दिखाता है, जिसे दुनिया 'सफेद जन्नत' कहती है. यहां की नीली झीलें सफेद मैदान बन जाती हैं और नदियां कांच जैसी पारदर्शी बर्फ की चादर ओढ़ लेती हैं. यह लद्दाख का वो चेहरा है जो जितना चुनौतीपूर्ण है, उससे कहीं ज्यादा लुभावना है.

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बर्फ से ढका लेह शहर और शांत फिजाएं

सर्दियों में लेह शहर की हलचल एकदम थम सी जाती है. गर्मियों में पर्यटकों से पटे रहने वाले लेह पैलेस और शांति स्तूप के पास अब सिर्फ सफेद बर्फ और गहरी शांति का पहरा होता है. स्थानीय बाजार की दुकानें भले ही जल्दी बंद हो जाती हों, लेकिन साफ नीला आसमान और बर्फ से लदे ऊंचे पहाड़ पूरे शहर को एक अलग ही दुनिया जैसा बना देते हैं. यही वो समय है जब आपको लद्दाख का असली और शांत रूप देखने को मिलता है. सर्दियों में यहां आने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको भीड़भाड़ नहीं मिलती और आप प्रकृति के बेहद करीब महसूस करते हैं. इतना ही नहीं, इस शांति के बीच आपको कड़कड़ाती ठंड का सामना तो करना पड़ता है, लेकिन चारों ओर बिखरी सफेद चांदी जैसी बर्फ आपका मन मोह लेती है.

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जब मैदान बन जाती है विशाल पैंगोंग झील

लेह शहर से आगे बढ़ते ही असली रोमांच का आगाज होता है और सामना होता है विशाल पैंगोंग त्सो झील से. गर्मियों में जो झील अपनी नीली लहरों के लिए जानी जाती है, वह सर्दियों में लगभग 4,350 मीटर की ऊंचाई पर बर्फ की एक ऐसी सफेद और सख्त परत में बदल जाती है, जिसे देख आंखों पर यकीन करना मुश्किल होता है. इस जमी हुई झील के ऊपर कदम रखना एक ऐसा अवास्तविक एहसास है जिसे शब्दों में नहीं बांधा जा सकता, जहां तक नजर जाती है, वहां तक सिर्फ दूधिया सफेद रंग का समंदर दिखाई देता है.

रोमांच के शौकीन लोग इस पर बड़ी सावधानी के साथ पैदल भी चलते हैं और उस पल ऐसा महसूस होता है मानो आप किसी दूसरे ग्रह पर पहुंच गए हों जहां समय एकदम ठहर गया है. इसके अलावा, इसी बर्फीले सन्नाटे के बीच शुरू होती है हेमिस नेशनल पार्क की साहसी यात्रा, जिसे 'पहाड़ों के भूत' यानी हिम तेंदुए का घर कहा जाता है. इस मायावी जीव की एक झलक पाने की चाहत में दुनिया भर से लोग हाड़ कंपा देने वाली ठंड की परवाह किए बिना यहाँ हफ्तों तक डेरा डाले रहते हैं.

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जांस्कर की जमी हुई छाती पर साहस का सबसे बड़ा इम्तिहान

लद्दाख के विंटर एडवेंचर की सबसे बड़ी चुनौती और आकर्षण है चादर ट्रेक. यह सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि जमी हुई जांस्कर नदी के ऊपर करीब 100 किलोमीटर का वो सफर है जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकता है. यहां रोमांच और डर साथ-साथ चलते हैं. खास बात यह है कि जब आप बर्फ की इस सतह पर कदम बढ़ाते हैं, तो कभी-कभी पैरों के नीचे बर्फ के चटकने की आवाज दिल की धड़कनें बढ़ा देती है. तापमान यहां -35°C तक चला जाता है, जहां आपकी पानी की बोतल भी रात भर में पत्थर जैसी सख्त बर्फ बन जाती है. इतना ही नहीं, मुसाफिरों को यहां बड़ी-बड़ी चट्टानों के बीच बनी प्राकृतिक गुफाओं में रात गुजारनी पड़ती है. यह ट्रेक भले ही शरीर को थका देने वाला हो, लेकिन बर्फीली दीवारों के बीच जमी हुई नदी पर चलने का जो अनुभव मिलता है, वह अतुलनीय है.

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सर्दियों में लद्दाख कैसे पहुंचें?

इतनी ठंड और बर्फबारी के बीच लद्दाख पहुंचना भी अपने आप में एक अलग रोमांच है. सर्दियों में लद्दाख जाने का सबसे सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका हवाई जहाज ही है. लेह का कुशोक बकुला रिम्पोची हवाई अड्डा दिल्ली, मुंबई और चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों से सीधी उड़ानों के जरिए जुड़ा हुआ है. यह हवाई अड्डा मुख्य शहर से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर है. अगर सड़क मार्ग की बात करें, तो मनाली से लेह जाने वाला रास्ता अक्टूबर से ही बंद कर दिया जाता है, जो फिर सीधे गर्मियों में ही खुलता है. श्रीनगर वाला रास्ता कभी-कभी खुला रहता है, लेकिन भारी बर्फबारी के कारण यह बहुत अनिश्चित होता है और सड़कें अक्सर हफ्तों तक बंद रहती हैं. इसलिए सर्दियों में हवाई सफर ही सबसे बेहतर विकल्प है.

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सर्दियों की यात्रा के लिए कुछ जरूरी सावधानियां

लद्दाख की सर्दियों का लुत्फ उठाना जितना मजेदार है, उतनी ही तैयारी भी जरूरी है. यहां की हवा बहुत पतली होती है और ऑक्सीजन की कमी महसूस हो सकती है, यही कारण है कि पहुंचने के बाद कम से कम दो दिन आराम करना बहुत जरूरी है ताकि आपका शरीर वहां के माहौल में ढल सके. कपड़ों के मामले में आपको 'लेयरिंग' यानी परतों का ध्यान रखना चाहिए, इसके लिए सबसे पहले शरीर से चिपका हुआ थर्मल पहनें, फिर उसके ऊपर ऊनी कपड़े और आखिर में हाड़ कंपाने वाली हवाओं से बचने के लिए वाटरप्रूफ जैकेट का इस्तेमाल करें. इसके अलावा, अपने पास चॉकलेट या ड्राई फ्रूट्स जैसे ऊर्जायुक्त स्नैक्स जरूर रखें, क्योंकि ठंड में शरीर को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है. 

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