ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 40 दिनों तक चले भीषण युद्ध के बाद इस संघर्ष को थामने और किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने के लिए आज पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक महत्वपूर्ण शांति वार्ता आयोजित की जा रही है. इस निर्णायक बैठक ने एक नई उम्मीद जगाई है कि ईरान के आसमान से युद्ध के काले बादल जल्द ही छंट जाएंगे. हालांकि एक महीने से भी ज्यादा समय तक चली इस जंग में ईरान ने न केवल अपने कई नागरिकों को खोया बल्कि इस संघर्ष में कई ऐसी ऐतिहासिक इमारतें और यूनेस्को (UNESCO) वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स को नुकसान पहुंचा जो न केवल ईरान का गौरव थीं बल्कि पूरी दुनिया की अनमोल धरोहर मानी जाती थीं.
ईरान के सांस्कृतिक विरासत मंत्री ने कुछ दिन पहले 'अल जजीरा' को बताया कि हमले में कई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को भारी नुकसान हुआ जो ईरान की पहचान पर एक जानबूझकर किया गया हमला है. ईरान के काजार-युग के गोलेस्तान महल के टूटे-फूटे हॉल के अंदर कांच और पत्थरों की बारीक कारीगरी, जो इस परिसर को एक फूलों का बगीचा बनाती थी, अब नुकीले कांच के टुकड़ों की एक चादर में बदल चुकी है.
कौन सी यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हुईं तबाह
युद्ध में ईरान की 29 यूनेस्को साइट्स में से कई प्रमुख स्थलों को भारी नुकसान पहुंचा है जिनमें कुछ को देखने के लिए पूरी दुनिया के पर्यटक इरान आते हैं जिनमें गोलेस्तान पैलेस से लेकर जामे मस्जिद और चेहेल सोतून पैलेस शामिल हैं.
जर्मनी की वेबसाइट 'DW.com' ने अपनी रिपोर्ट में ईरान की कुछ प्रमुख और मशहूर इमारतों की जानकारी दी है जिन्हें इस हमले में नुकसान पहुंचा है.
गोलेस्तान पैलेस
ईरान की राजधानी के सबसे पुराने ऐतिहासिक स्मारकों में से एक और तेहरान का एकमात्र UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट गोलेस्तान पैलेस आठ आलीशान इमारतों का एक समूह है जिसे सबसे पहले 1500 के दशक में बनाया गया था.
यह पैलेस काजार राजवंश की वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है. इसे पेरिस के वर्साय महल जैसा माना जाता है. 2 मार्च 2026 को हुए हवाई हमले के बाद इसके शीशमहल की 40 प्रतिशत कांच की नक्काशी नष्ट हो गई है. खिड़कियां और दरवाजे भी बुरी तरह टूट चुके हैं.
गोलेस्तान पैलेस पर हमले से पहले और बाद की तस्वीरें
इस्फहान का चेहेल सोतून पैलेस
बारीकी से बनाए गए भित्तिचित्रों के लिए मशहूर चेहेल सोतून महल इस्फहान शहर के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों में से एक है. यह शहर तेहरान से लगभग 450 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. 17वीं शताब्दी में बनाया गया यह महल अपने 20 स्तंभों और सुंदर बगीचे के लिए जाना जाता है. हमलों के कारण इस ऐतिहासिक महल की संरचनात्मक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है.
इस्फहान की जामे मस्जिद
इरान, अमेरिका और इजरायल के युद्ध में इस्फहान की जामे मस्जिद (Jameh Mosque of Isfahan) जो ईरान की सबसे पुरानी जुमे की मस्जिद है और इस्फहान में UNESCO की एक और विश्व धरोहर स्थल है, उसे भी गहरा नुकसान पहुंचा. इसकी बनावट, टाइल्स और सजावट भी क्षतिग्रस्त हुई है.
इस्फहान का अली कापू पैलेस
अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण अली कापू के शाही महल को भी 1979 में UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था. इस्फहान पर हुए हमलों से अली कापू पैलेस भी प्रभावित हुआ है. यहां की खिड़कियों और दरवाजों को नुकसान पहुंचा है. मस्जिदों, महलों और बाजारों का यह विशाल परिसर सफवीद वास्तुकला की एक उत्कृष्ट कृति के रूप में जाना जाता है.
फलक-अल-अफलाक किला
इरान के खोरमाबाद में मौजूद यह विशाल किला तीसरी सदी की शुरुआत में ससानियन काल के दौरान बनाया गया था. ससानियन काल का यह किला एक और सांस्कृतिक स्थल था जिस पर हमला हुआ.
खबरों के मुताबिक किले की सीमा के अंदर अलग-अलग दफ्तरों और इमारतों पर हमला हुआ जिनमें किले के पुरातत्व और मानवशास्त्र संग्रहालय भी शामिल हैं.
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