हम अक्सर छुट्टियों का प्लान तभी बनाते हैं जब घूमने का पीक सीजन होता है और इसके लिए ज्यादा पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब दुनिया वापस काम पर लौट रही होती है, तब घूमना आपके लिए कितना फायदेमंद साबित हो सकता है.
असल में इसे ही ऑफ-सीजन ट्रैवल का स्मार्ट तरीका कहते हैं. अगर आप भी टूरिस्टों की लंबी लाइनों, महंगे होटलों और हर तरफ होने वाले शोर-शराबे से थक चुके हैं, तो ऑफ-सीजन में निकलना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. ऑफ-सीजन में घूमने के ऐसे कई बड़े फायदे हैं, जो आपके वेकेशन को न केवल किफायती बल्कि यादगार भी बना सकते हैं.
1. पैसों की भारी बचत
ऑफ-सीजन में घूमने का सबसे बड़ा और पहला फायदा है आपकी जेब को मिलने वाली राहत. इस दौरान फ्लाइट टिकट से लेकर होटल की बुकिंग तक सब कुछ 30% से 40% तक सस्ता हो जाता है. उदाहरण के लिए, अगर आप गर्मियों के पीक सीजन के बजाय मानसून के ठीक बाद या सर्दियों की शुरुआत में मसूरी जाते हैं, तो वहां के लग्जरी रिसॉर्ट्स आपको आधे दामों पर मिल सकते हैं. इसी तरह, दुबई जैसे महंगे शहरों में ऑफ-सीजन के दौरान होटल और शॉपिंग पर भारी डिस्काउंट मिलता है
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2. लंबी लाइनों और भीड़ से आजादी
ऑफ-सीजन में सबसे लोकप्रिय टूरिस्ट स्पॉट्स पर भी भीड़ बहुत कम होती है. आपको न तो एंट्री टिकट के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है और न ही फोटो खिंचवाने के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है. आप शांति से हर नजारे को जी भर कर देख सकते हैं और बिना किसी हड़बड़ाहट के साइटसीइंग का आनंद ले सकते हैं.
3. स्थानीय संस्कृति का असली अनुभव
जब पर्यटकों की भीड़ कम होती है, तो उस जगह का असली रंग निखर कर सामने आता है. आप स्थानीय लोगों से बात कर सकते हैं, उनके खान-पान और रहन-सहन को करीब से समझ सकते हैं. भीड़भाड़ न होने के कारण आपको वहां की संस्कृति के साथ एक गहरा जुड़ाव महसूस होता है, जो पीक सीजन के शोर में कहीं खो जाता है.
4. वीआईपी सर्विस और बेहतर देखभाल
होटल और रेस्तरां में भीड़ कम होने का एक फायदा यह भी है कि वहां का स्टाफ आपको बेहतर सेवा दे पाता है. उनके पास अपने मेहमानों पर ध्यान देने के लिए काफी समय होता है. इसके लिए आपको खाने की टेबल के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता और सर्विस भी काफी तेज और अच्छी मिलती है. कुल मिलाकर, आपको एक वीआईपी वाला एहसास होता है.
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5. बुकिंग में लचीलापन
ऑफ-सीजन में आपको अपनी पसंद का कमरा या मनपसंद एक्टिविटी बुक करने के लिए महीनों पहले से माथापच्ची नहीं करनी पड़ती. बुकिंग कम होने की वजह से आपको आसानी से जगह मिल जाती है. आप अपनी मर्जी से आखिरी समय पर भी प्लान में बदलाव कर सकते हैं, क्योंकि हर जगह हाउसफुल का बोर्ड नहीं लटका होता.
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