हाड़ कंपाने वाली ठंड और मौत को मात देते रास्ते, ये है दुनिया का सबसे ऊंचा गांव

अगर आप भी ऐसी जगहों की तलाश में हैं, जहां पहुंचना ही अपने आप में एक रोमांच हो, तो हिमाचल की स्पीति घाटी में बसा कोमिक गांव आपको हैरान कर देगा. बादलों के पार बसी यह बस्ती दुनिया की सबसे ऊंची जगहों में गिनी जाती है, जहां पहुंचना किसी उपलब्धि से कम नहीं लगता.

Advertisement
दुनिया के सबसे ऊंचे मोटर योग्य गांव का सफर (Photo: Pexels) दुनिया के सबसे ऊंचे मोटर योग्य गांव का सफर (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:45 AM IST

कल्पना कीजिए कि आप अपनी कार में सवार हैं और खिड़की के बाहर सिर्फ रुई जैसे सफेद बादल और बर्फीली चोटियां नजर आ रही हैं. आसमान इतना करीब कि लगे आप हाथ बढ़ाकर उसे छू लेंगे. यह कोई सपना नहीं, बल्कि भारत के हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में बसे एक गांव की हकीकत है.

समुद्र तल से करीब 15,027 फीट की ऊंचाई पर बसा यह इलाका दुनिया की वो सबसे ऊंची जगह है. इसे दुनिया का सबसे ऊंचा गांव कहा जाता है, जहां पहुंचना हर घुमक्कड़ के लिए किसी मेडल को जीतने जैसा रोमांचक एहसास होता है. तो चलिए जानते हैं इस जादुई दुनिया के बारे में, जहां की हवाओं में सुकून और रोमांच दोनों घुले हुए हैं.

Advertisement

जहां खत्म हो जाती हैं दुनिया की तमाम सड़कें

इस अनोखी बस्ती की सबसे बड़ी पहचान इसकी भौगोलिक स्थिति है. करीब 4,587 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह गांव तकनीकी रूप से दुनिया का वो आखिरी सिरा है, जहां तक आप अपनी गाड़ी के पहियों पर सवार होकर पहुंच सकते हैं. ऊबड़-खाबड़ रास्तों, गहरी खाइयों और बर्फीली वादियों के बीच से गुजरते हुए जब आप यहां कदम रखते हैं, तो ऐसा महसूस होता है जैसे दुनिया का शोर पीछे छूट गया है.

यहां का नीला आसमान इतना साफ होता है कि रात के समय पूरी आकाशगंगा अपनी आंखों से देखी जा सकती है. आधुनिक दुनिया की चकाचौंध से कोसों दूर बसा यह गांव आज भी अपनी प्राकृतिक सादगी और प्राचीन बौद्ध मठ की आध्यात्मिक शांति के लिए जाना जाता है, जो सदियों से इस ऊंचाई पर मजबूती से खड़ा है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: पेट पूजा के लिए बेस्ट हैं ये 5 रेलवे स्टेशन, ट्रेन रुकते ही प्लेटफॉर्म पर दौड़ लगा देते हैं यात्री

हाड़ कंपाने वाली ठंड और कुदरत की अग्निपरीक्षा

यहां की खूबसूरती जितनी मनमोहक है, यहां का जीवन उतना ही संघर्षपूर्ण है. इस ऊंचाई पर साल के बारह महीने हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ती है और ऑक्सीजन का स्तर इतना कम हो जाता है कि सामान्य इंसानों के लिए सांस लेना भी एक चुनौती बन जाता है. गर्मियों के चंद महीनों को छोड़ दिया जाए, तो यहां का तापमान अक्सर शून्य से कई डिग्री नीचे बना रहता है.

इस कठिन माहौल के बावजूद यहां के स्थानीय लोगों का जज्बा और उनकी मुस्कान पर्यटकों का दिल जीत लेती है. इतना ही नहीं यहां की काली और पथरीली मिट्टी पर जब सूरज की किरणें पड़ती हैं, तो पूरा परिदृश्य किसी हॉलीवुड फिल्म के जादुई सेट जैसा लगने लगता है, जहां कुदरत हर पल अपनी ताकत का अहसास कराती है.

यह भी पढ़ें: भारत की वो 5 जगहें, जहां मोबाइल नहीं, दिल की धड़कनें सुनाई देती हैं

इस गांव की जीवनशैली मौसम के मिजाज से तय होती है. जैसे ही सर्दियों की आहट शुरू होती है और बर्फ की मोटी चादर पूरे पहाड़ को अपनी आगोश में ले लेती है, यहां की जिंदगी का पहिया पूरी तरह ठहर जाता है. भारी बर्फबारी के कारण यह गांव दुनिया के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट जाता है, जिससे यहां टिक पाना नामुमकिन हो जाता है. यही वजह है कि यहां के निवासी सर्दियों के दौरान अपने पशुओं और जरूरी सामान के साथ नीचे के मैदानी इलाकों में चले जाते हैं. केवल जून से सितंबर के बीच ही इस दुनिया की छत पर रौनक लौटती है. इन चार महीनों के दौरान ही सैलानी यहां की बर्फीली हवाओं और आसमान को छूती चोटियों का आनंद लेने पहुंच सकते हैं, क्योंकि बाकी समय तो यहां सिर्फ बर्फ का राज होता है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement