आज के दौर में घूमना-फिरना सिर्फ अच्छी तस्वीरें खींचने और उन्हें सोशल मीडिया पर डालने तक ही सीमित नहीं रह गया है. अब लोग ऐसी जगहें ढूंढते हैं जहां पहुंचकर इतिहास को महसूस किया जा सके, उसे करीब से देखा और समझा जा सके. भारत में हेरिटेज वॉक का मतलब इसी अनुभव से है. यह सिर्फ पुरानी इमारतें देखने की कोई साधारण सैर नहीं है, बल्कि उन तंग गलियों, पुराने बाजारों और वहां के लजीज खाने के जरिए बीते हुए दौर में झांकने का एक शानदार मौका है.
जब आप किसी जानकार गाइड के साथ इन सदियों पुरानी गलियों में कदम रखते हैं, तो इतिहास किताबों से बाहर निकलकर आपके सामने जीता-जागता खड़ा नजर आता है. अगर आप भी भारत को सिर्फ स्मारकों और म्यूजियम से आगे बढ़कर असलियत में समझना चाहते हैं, तो ये हेरिटेज वॉक आपके लिए ही बनी हैं.
यह भी पढ़ें: नेपाल के वो अनछुए ठिकाने जो आपको नैनीताल-मनाली की भीड़ भुला देंगे
पुरानी दिल्ली की ऐतिहासिक गलियां
पुरानी दिल्ली यानी शाहजहानाबाद की गलियों में कदम रखना मतलब सीधा 17वीं सदी में पहुंच जाना है. जब आप चांदनी चौक की तंग गलियों से गुजरते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे वक्त कहीं ठहर गया हो. यहां की हवेलियां, पुरानी मस्जिदें और वो मसालों की खुशबू आपको मदहोश कर देगी. इस वॉक की शुरुआत अक्सर लाल किले के पास से होती है, जहां आप इत्र की पुरानी दुकानों, सदियों पुराने जैन मंदिरों और जामा मस्जिद की भव्यता को करीब से देख पाते हैं. पुरानी दिल्ली की वॉक तब तक अधूरी है जब तक आप वहां के मशहूर चटपटे खान-पान का स्वाद न चख लें. यहां का स्ट्रीट फूड इस ऐतिहासिक सफर में चार चांद लगा देता है.
हम्पी का खोया हुआ साम्राज्य
अगर आपको लगता है कि खंडहर सिर्फ टूटी-फूटी इमारतें होते हैं, तो आपको हम्पी जरूर जाना चाहिए. कर्नाटक का यह इलाका कभी विजयनगर साम्राज्य की शान हुआ करता था. यहां पैदल घूमते हुए आपको बड़े-बड़े पत्थर के मंदिर और वो पुराने बाजार दिखेंगे, जहां कभी रेशम और कीमती रत्नों का व्यापार होता था. सुबह-सुबह या सूरज ढलते वक्त हम्पी की सैर करना एक अलग ही जादुई अहसास देता है. जब गाइड आपको राजाओं और व्यापारियों की कहानियां सुनाता है, तो आपकी आंखों के सामने पूरा साम्राज्य जिंदा हो उठता है. बस ध्यान रहे, यहां पैदल चलने के लिए आरामदायक जूते और पानी की बोतल साथ रखना न भूलें.
यह भी पढ़ें: ओडिशा का गायब होने वाला बीच, कभी लहरों का शोर, कभी सूखा मैदान
फोर्ट कोच्चि का औपनिवेशिक दौर
दिल्ली और हम्पी के मुकाबले केरल का फोर्ट कोच्चि बिल्कुल अलग है. यहां की हेरिटेज वॉक आपको एक शांत और सुकून भरे माहौल में ले जाती है. यहां आपको पुर्तगाली, डच और ब्रिटिश दौर की झलक साफ देखने को मिलेगी. समंदर के किनारे लगे चीन के मछली पकड़ने वाले जाल, पुराने बंगले और मसालों के गोदाम इस शहर की पहचान हैं. फोर्ट कोच्चि की खासियत यह है कि यहां इतिहास के साथ-साथ आपको मॉडर्न आर्ट कैफे और गैलरीज का भी मेल मिलता है. अगर आप आराम से टहलते हुए, समंदर की लहरों के साथ बीती हुई सदियों की कहानियां सुनना चाहते हैं, तो फोर्ट कोच्चि से बेहतर कोई जगह नहीं है.
aajtak.in