चीन में Xiaomi ने पूरी तरह ऑटोमैटिक फैक्ट्री शुरू कर दी है, जहां मशीनें खुद काम करती हैं, खुद सीखती हैं और खुद सुधार करती हैं. दावा है कि यहां 1 सेकंड में 1 स्मार्टफोन बन रहा है. वीडियो वायरल हो रहा है, लेकिन क्या ये सच है? आइए जानते हैं.
अगर किसी ने कुछ साल पहले कहा होता कि एक फैक्ट्री ऐसी भी होगी जहां लाइट बंद रहती है, इंसान काम पर नहीं आते, फिर भी हर सेकंड एक स्मार्टफोन बनता है, तो शायद ये साइंस फिक्शन लगता. लेकिन अब लोगों को इस तरह के वायरल वीडियो पर यकीन होने लगा है. ठीक ऐसे ही इस वीडियो के साथ हो रहा है.
दरअसल अभी जो वीडियो वायरल हो रहा है वो Xiaomi का ही है, लेकिन ये 2020 का है. तब कंपनी ने महज एक कॉन्सेप्ट के तौर पर इसे शेयर किया था और तब इसका हकीकत से वास्ता नहीं था.
इस तरह के कॉन्सेप्ट फैक्ट्री को टेक दुनिया में डार्क फैक्ट्री कहा जा रहा है. डार्क इसलिए क्योंकि यहां इंसानों की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए तेज रोशनी, ब्रेक टाइम या शिफ्ट सिस्टम जैसी चीजें भी नहीं हैं. हालांकि कई काम के लिए यहां भी लोगों की जरूरत पड़ती है.
इस कॉन्सेप्ट वीडियो के मुताबिक फैक्ट्री में मशीनें 24 घंटे, सातों दिन लगातार काम करती हैं. रोबोट्स पार्ट्स उठाते हैं, जोड़ते हैं, टेस्ट करते हैं और तैयार फोन पैक तक पहुंच जाता है, बिना किसी इंसानी हाथ के.
क्या है ये कॉन्सेप्ट?
पूरी तरह ह्यूमन लेस फैक्ट्री अगर फ्यूचर में बनती है तो कैसी होगी? आसान भाषा में समझें तो फैक्ट्री के हर रोबोट, हर सेंसर और हर मशीन से डेटा लगातार एक डिजिटल दिमाग तक जाएगा. अगर कहीं पार्ट सही फिट नहीं हुआ, तापमान बढ़ा, स्पीड कम हुई या क्वालिटी में फर्क आया, सिस्टम खुद पहचान लेगा और अपने आप सेटिंग बदल देगा. यानी मशीन सिर्फ काम नहीं करेगी, बल्कि सोचेगी की काम बेहतर कैसे हो.
इस तरह के कॉन्सेप्ट फैक्ट्री में असेंबली लाइन जैसी चीज नहीं होगी. दावा किया जाता है कि अगर इस तरह की फैक्ट्री तैयार हो जाती है तो 1 सेकंड में 1 स्मार्टफोन बन जाएगा.
मतलब एक साल में करोड़ों फोन सिर्फ इसी एक कैंपस से निकल सकते हैं. इतनी तेज प्रोडक्शन स्पीड पहले तभी मुमकिन थी जब हजारों मजदूर लाइन में खड़े होकर काम करें. अब वही काम रोबोट कर रहे हैं, बिना थके, बिना ब्रेक, बिना गलती के. हालांकि इस तरह के कॉन्सेप्ट वीडियो ज्यादातर टाइम फ्लॉप ही रहते हैं और इनका रिएलिटी से कोई लेना देना नहीं होता.
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