13 हजार में बना ये सिंपल ऐप 13 करोड़ का हो गया है, वायरल ऐप Are You Dead की सच्चाई!

Are You Dead ऐप पिछले दिनों से वायरल हो रहा है. ये ऐप कुछ युवकों ने बनाया था और इसकी लागत 13 हजार से भी कम बताई जा रही है. लेकिन अब इसकी वैल्यू 13 करोड़ रुपये से ज्यादा की हो गई है.

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Are you dead app/Demumu Are you dead app/Demumu

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:23 PM IST

कल तक चीन का Are You Dead? ऐप सिर्फ एक वायरल नाम और अजीब कॉन्सेप्ट की वजह से चर्चा में था. आज यह कहानी एक कदम आगे निकल गई है. अब बात सिर्फ चेक इन बटन की नहीं है, अब इस ऐप के इर्द-गिर्द पैसा, स्केल, रिब्रांडिंग और स्टार्टअप वैल्यू वाली बहस चल रही है.

सबसे बड़ी नई अपडेट यही है कि यह ऐप अब वायरल ट्रेंड से निकलकर बिजनेस बनने की तरफ बढ़ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक तीन युवा डेवलपर्स ने इसे लगभग 1000 युआन के आसपास के छोटे खर्च में बनाया था, यानी भारतीय रुपये में मोटे तौर पर करीब 13 हजार.

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अब इसकी चर्चा 1 करोड़ युआन (करीब 13 करोड़ रुपये) की वैल्यूएशन तक पहुंच गई है. मतलब एक छोटा सा सेफ्टी-आइडिया अब स्टार्टअप जैसी भाषा में बात करने लगा है.

नाम बदलने की तैयारी, क्योंकि ग्लोबल स्टेज पर Are You Dead? थोड़ा ज्यादा डार्क है

ऐप का ओरिजिनल नाम चीन में सीलेमे टाइप साउंड करता है, जिसका मतलब ही मरे हो क्या जैसा है. यही नाम इसकी वायरलिटी भी बना, और यही नाम इसकी परेशानी भी. क्योंकि नाम सुनते ही एक हिस्सा हंसता है, दूसरा हिस्सा असहज हो जाता है.

अब नया डेवलपमेंट यह है कि टीम इंटरनेशनल ऑडियंस के लिए इसे डेमुमु नाम से रिब्रांड कर रही है. वजह सीधी है, ग्लोबल ऐप स्टोर्स और मेनस्ट्रीम यूजर्स के लिए इतना मोर्बिड नाम लंबे समय तक चलना मुश्किल हो सकता है. यानी ऐप की पहचान अब शॉक वैल्यू से हटकर यूटिलिटी की तरफ शिफ्ट हो रही है.

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फ्री से पेड… और अब कीमत बढ़ी: यही असली मोड़ है

शुरुआत में यह ऐप फ्री या कह सकते हैं सस्ता था. इस वजह से मेंटेनेंट में कोई कॉस्ट नहीं लगते थे. लेकिन जैसे ही यह टॉप डाउनलोड में गया, वैसे ही इसके ऑपरेशन कॉस्ट बढ़े,सर्वर, नोटिफिकेशन, ईमेल डिलीवरी और सपोर्ट. इसी वजह से अब इसे पेड मॉडल में शिफ्ट किया गया है और कई रिपोर्ट्स में इसकी कीमत 8 युआन के आसपास बताई गई है, यानी लगभग 100 रुपये.

यह छोटी रकम जानबूझकर रखी गई लगती है. ताकि इम्पल्स डाउनलोड बना रहे. यानी यूजर सोचे 100 रुपये में सेफ्टी बटन मिल रहा है, ले लेते हैं. यही माइक्रो-पेमेंट स्ट्रैटेजी चीन जैसे मार्केट में तेजी से स्केल कर सकती है.

कुछ रिपोर्ट्स यह भी इशारा करती हैं कि टीम ने बढ़ती लागत को संभालने के लिए नॉमिनल सब्सक्रिप्शन/फीस जैसा मॉडल भी जोड़ा है. मतलब यह ऐप अब वायरल टॉय नहीं, रन होने वाला प्रोडक्ट बनने की लाइन पकड़ चुका है.

ऐप चलता कैसे है, और क्यों लोग इसे सच में यूज कर रहे हैं?

इस ऐप का मेन फीचर वही है जो उसे वायरल बनाता है. एक बड़ा बटन. यूजर को हर 24–48 घंटे के अंदर बस इतना करना है कि वह 'I Am Ok या I Am Alive' जैसा चेक-इन कर दे. अगर लगातार दो दिन तक चेक-इन नहीं होता, तो ऐप आपके चुने हुए इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को ईमेल अलर्ट भेज देता है.

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यानी यह ऐप लोकेशन ट्रैकिंग नहीं कर रहा, यह  चेक-इन सिग्नल से काम करता है. और यही इसकी यूएसपी है. ना ज्यादा परमिशन, ना भारी फीचर, बस एक सीधा मेकैनिज्म.

यह वायरल क्यों हुआ, इसका असली कारण टेक नहीं, समाज है

इस कहानी का असली ड्राइवर टेक नहीं, चीन का बदलता लाइफस्टाइल है. रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन में 200 मिलियन से ज्यादा लोग अकेले रहते हैं. बड़े शहरों में अकेले रहने वाले युवा, और वहीं उम्रदराज लोग जिनके बच्चे दूर रहते हैं. ऐसे माहौल में अगर कुछ हो गया तो किसे पता चलेगा वाली चिंता रियल है.

यही वजह है कि यह ऐप चीन के ऐप स्टोर में पेड चार्ट्स में टॉप के आसपास पहुंच गया. और अब यह सिर्फ चीन तक सीमित नहीं है. कई रिपोर्ट्स कहती हैं कि यह ऐप दूसरे देशों के स्टोर्स में भी दिखने लगा है, खासकर उन जगहों पर जहां चीनी यूजर्स या अकेले रहने का ट्रेंड ज्यादा है.

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