AI को लेकर अब तक जो बातें सुनी जाती थीं, वो अब हकीकत बनती दिख रही हैं. अमेरिका में एक शख्स ने AI की मदद से ऐसी कंपनी खड़ी कर दी है जिसकी वैल्यू बिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है. खास बात ये है कि ये कंपनी किसी बड़ी टीम या भारी इन्वेस्टमेंट से नहीं बनी, बल्कि एक छोटे सेटअप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स के दम पर खड़ी हुई.
इस स्टार्टअप का नाम Medvi है और इसे लॉस एंजेलिस के मैथ्यू गैलाघर ने शुरू किया. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने सितंबर 2024 में सिर्फ करीब 20 हजार डॉलर से इस कंपनी की शुरुआत की थी.
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शुरुआत में वो अकेले ही काम कर रहे थे और बाद में सिर्फ अपने भाई को टीम में जोड़ा. इसके बावजूद कंपनी ने बेहद तेजी से ग्रोथ दिखाई.
साल 2025 में कंपनी ने करीब 401 मिलियन डॉलर का रेवेन्यू किया और 2026 तक इसका रेवेन्यू 1.8 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. यानी एक साल के अंदर ही ये स्टार्टअप यूनिकॉर्न क्लब के आसपास पहुंच गया.
वेबसाइट से लेकर क्रिएटिव तक.. सबकुछ AI ने बनाया
इस कहानी की सबसे दिलचस्प बात ये है कि AI यहां सिर्फ एक छोटा टूल नहीं था, बल्कि पूरी कंपनी चलाने में इसका बड़ा रोल था. वेबसाइट बनाने से लेकर मार्केटिंग तक, सब कुछ AI से किया गया.
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गैलाघर ने ChatGPT, Claude और Grok जैसे टूल्स का इस्तेमाल करके कोडिंग की. एड क्रिएटिव्स के लिए Midjourney और Runway जैसे टूल्स इस्तेमाल किए गए. कस्टमर से बात करने के लिए ElevenLabs और AI चैटबॉट्स का सहारा लिया गया.
बना लिया अपना ही अवतार
इतना ही नहीं, रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्होंने अपना AI अवतार और आवाज भी तैयार कर ली थी, ताकि वो एक साथ कई कस्टमर्स से बात कर सकें. यानी जहां पहले 50 लोगों की टीम लगती, वहां अब AI अकेले ही कई रोल निभा रहा है.
कंपनी का बिजनेस मॉडल हेल्थ सेक्टर पर आधारित है. ये एक टेलीहेल्थ प्लेटफॉर्म है जहां लोग ऑनलाइन डॉक्टर से कंसल्ट करते हैं और फिर उन्हें दवाएं दी जाती हैं. खासकर वेट लॉस और डायबिटीज से जुड़ी GLP-1 दवाओं की डिमांड ने इस कंपनी की ग्रोथ को तेज किया.
हेल्थ स्टार्टअप में AI का रोल
GLP-1 दवाएं जैसे Ozempic और Wegovy आजकल दुनियाभर में काफी चर्चा में हैं. ये दवाएं वजन कम करने में मदद करती हैं और इनकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है.
आम तौर पर अमेरिका में ये दवाएं काफी महंगी होती हैं, लेकिन Medvi इन्हें कम कीमत पर उपलब्ध कराता है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग इस प्लेटफॉर्म की तरफ आए.
दरअसल, टेलीहेल्थ का ये मॉडल नया नहीं है. पहले भी कई कंपनियां ऑनलाइन डॉक्टर कंसल्टेशन और दवाएं बेचने का काम कर रही हैं.
लेकिन AI के साथ इसका कॉम्बिनेशन इसे अलग बना रहा है. यहां AI ने लागत कम कर दी और काम की स्पीड बढ़ा दी. इसी वजह से कंपनी तेजी से स्केल कर पाई.
एक्सपर्ट्स ने उठाए हैं सवाल
हालांकि इस मॉडल को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह की कंपनियां नियमों के किनारे चलती हैं. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कंपनी के विज्ञापनों में AI से बने डॉक्टर और टेस्टिमोनियल्स का इस्तेमाल किया गया, जिस पर सवाल उठे हैं.
इसके अलावा, टेलीहेल्थ सेक्टर में पहले भी GLP-1 दवाओं को लेकर विवाद रहा है. कई कंपनियों पर सस्ते और कंपाउंडेड वर्जन बेचने के आरोप लगे हैं. यही वजह है कि रेगुलेटर्स इस सेक्टर पर नजर बनाए हुए हैं.
फिर भी इस पूरे डेवेलेपमेंट को देखें तो ये क्लिर है कि AI अब सिर्फ मदद करने वाला टूल नहीं रहा, बल्कि ये बिजनेस बनाने और चलाने का बड़ा हथियार बन चुका है. जिस चीज को पहले बड़ी टीम और करोड़ों की फंडिंग चाहिए होती थी, अब वही काम एक छोटा सेटअप भी कर सकता है.
टेक वर्ल्ड में OpenAI के CEO Sam Altman ने पहले कहा था कि AI के दौर में एक इंसान भी बिलियन डॉलर कंपनी बना सकता है. Medvi की कहानी उसी बात का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है.
आने वाले समय में ऐसे और स्टार्टअप देखने को मिल सकते हैं. जहां AI सिर्फ सपोर्ट सिस्टम नहीं होगा, बल्कि पूरी कंपनी की रीढ़ बन जाएगा. यही नया डिजिटल बिजनेस मॉडल है, जो दुनिया को तेजी से बदल रहा है.
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