बैंक खाताधारक बेखबर, करोड़ों का स्कैम, कानपुर पुलिस ने किया भंडाफोड़

म्यूल अकाउंट, असल में आज के समय में डिजिटल फ्रॉड ईकोसिस्टम का अहम हिस्सा है. कई लोग होते हैं, जिनको पता ही नहीं होता है कि उनके नाम से कोई बैंक खाता है और उसमें साइबर ठगों का पैसा ट्रांसफर हो रहा है. आइए म्यूल अकाउंट का मायाजल जानते हैं.

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म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल साइबर स्कैम में किया जाता है. (Photo: ITG) म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल साइबर स्कैम में किया जाता है. (Photo: ITG)

रोहित कुमार

  • नई दिल्ली ,
  • 02 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:05 AM IST

उत्तर भारत का मैनचेस्टर कहे जाने वाले शहर कानपुर में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है और एक हाईटेक साइबर गैंग का भंडाफोड़ किया. पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें पांच बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं, जिनपर आरोप है कि वह म्यूल अकाउंट की सुविधा देते थे. 

पुलिस ने बताया है कि ये गैंग म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल हवाला ट्रांजैक्शन में करता था, जिसकी कीमत करीब करोड़ों में है. अब सवाल आता है कि म्यूल अकाउंट क्या होते हैं और यह आम लोगों के लिए कैसे खतरनाक है.

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म्यूल अकाउंट क्या होता है? 

म्यूल अकाउंट, असल में वे बैंक खाते होते हैं, जिनका मालिक कोई और होता है और उसका ऑपरेशन किसी दूसरे शख्स के पास होता है. आसान भाषा में समझें तो दूसरे शख्स के डॉक्यूमेंट पर बैंक खाता ओपन कर दिया जाता है, जिसकी खबर असली मालिक को होती ही नहीं है.  

म्यूल अकाउंट, असल में आज के समय में डिजिटल फ्रॉड ईकोसिस्टम का अहम हिस्सा है. ये वे बैंक खाते हैं, जिनका इस्तेमाल बैंक खाते में आने वाले रुपयों को निकालने या फिर दूसरे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है.

म्यूल अकाउंट से साइबर ठगों को फायदा

साइबर ठग, असल में अपने ओरिजनल बैंक खाते में रुपये ट्रांसफर नहीं कराते हैं, इसके लिए वे म्यूल अकाउंट का यूज करते हैं. ऐसे में वह पुलिस की पहुंच से दूर रहते हैं. 

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कई म्यूल अकाउंट में फंड होता है ट्रांसफर 

साइबर स्कैम के जरिए ठगे जाने वाले पैसों को पहले म्यूल अकाउंट में भेजा जाता है. इसके बाद ये अमाउंट फिर दूसरे म्यूल अकाउंट में फिर तीसरे म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर होता है. ये प्रोसेस कई बार होता है और फिर आखिर में जाकर रकम को कैस के रूप में निकाला जाता है या फिर क्रिप्टो में बदल दिया जाता है. 

साइबर ठग म्यूल अकाउंट कैसे बनवाते हैं

म्यूल अकाउंट बनवाने के लिए साइबर ठगों का गिरोह कई  भोले-भाले लोगों को शिकार बनाते हैं. वे अनजान लोगों को इसमें फंसाते हैं. जैसे घर बैठे पैसे कमाओ, KYC कराने पर बैंक ऑफर, नौकरी के बहाने बैंक खाते खुलवाते हैं. 

म्यूल अकाउंट को कैस ट्रैक किया जाता है? 

भारत सरकार की एजेंसी जैसे इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) और बैंक मिलकर इनको ट्रैक करते हैं. ट्रांजैक्शन फ्लो को चेक करते हैं और संदिग्ध पाए जाने पर उसकी जांच की जाती है. 

म्यूल अकाउंट होने के खतरें 

अगर आपके नाम पर कोई म्यूल अकाउंट है और उसका इस्तेमाल साइबर ठगी में हो रहा है. यह आपके लिए बड़ा ही खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे केस में पुलिस आपको गिरफ्तार तक कर सकती है. आपके दूसरे बैंक खाते फ्रीज तक हो सकते हैं.

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