साइबर हैकर्स के एक न्यू टूल का पता चला है, जो स्मार्टफोन यूजर्स के लिए खतरनाक है. इसका नाम डार्कसोर्ड है. स्मार्टफोन यूजर्स जैसे ही एक वेबपेज पर विजिट करता, उसके बाद ये हैकिंग तकनीक अपना काम शुरू कर देती. ये जानकारी एनगैजेट की रिपोर्ट से मिली है.
रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल और साइबर सिक्योरिटी कंपनी लुकआउट और आईवेरिफाई ने एक न्यू हैकिंग तकनीक के बारे में बताया है. यह तकनीक आइफोन यूजर्स के लिए खतरनाक साबित हो रही है. यह खतरा सिर्फ एक वेबपेज पर विजिट करने के बाद शुरू होगा.
हैकिंग तकनीक डार्कसोर्ड के तहत iPhone के चुनिंदा वर्जन को शिकार बनाया जा रहा है. यह अभी iOS 18 को शिकार बना रहा है. iOS 18 पर करीब 22 करोड़ से लेकर 27 करोड़ iPhone काम कर रहे हैं.
ऐपल स्पोक्सपर्सन ने बताया है कि कंपनी ने बीते साल iOS 15 से लेकर iOS 26 तक के वर्जन में मौजूद सभी खामियों को डिटेक्ट किया और उनको फिक्स किया. साथ ही कंपनी ने उन पुराने वर्जन के लिए भी अपडेट किया है, जो iOS 15 और iOS 16 पर iPhone चला रहे हैं और नए iOS वर्जन के साथ अपग्रेड नहीं कर सकते हैं.
कंपनी ने सलाह दी है कि iOS 13 या iOS 14 यूजर्स को अपने ऑपरेटिंग सिस्टम को iOS 15 के साथ अपडेट जरूर करना चाहिए. ये ऑपरेटिंग सिस्टम साल 2019 और 2020 में जारी किए जा चुके हैं.
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सेफ्टी के लिए अपडेट कर लें फोन
ऐपल स्पोक्सपर्सन ने बताया है कि भले ही यूजर्स iOS 26 के साथ अपडेट नहीं कर पा रहे हैं, उसके बावजूद भी पुराने वर्जन के लिए सिक्योरिटी अपडेट मौजूद हैं, जिसके साथ यूजर्स को अपडेट कर लेना चाहिए.
ऐपल ने ये भी बताया है कि गूगल के सिक्योरिटी ब्लॉग में जिन खतरनाक यूआरएल का पता चला है और उनको पब्लिश किया है, उनको सफारी के सेफ ब्राउजिंग फीचर के द्वारा ब्लॉक किया जा चुका है.
डार्कसोर्स क्या है?
डार्कसोर्ड, असल में एक फाइललेस हैक है, जो कई तरीके से तकनीकों का यूज करके सेंसटिव डेटा तक पहुंच बना लेते हैं. इसके बाद जब कोई iPhone किसी इनफेक्टेड वेबसाइट पर विजिट करता है, तो अन्य स्पाईवेयर की तरह ये मोबाइल यूजर्स के फोन में इंस्टॉल हो जाते हैं. डार्कसोर्ड आपका डेटा चोरी करने के बाद iPhone से अपने सभी सबूत को रिमूव कर देता है.
एंड्रॉयड की तुलना में iOS ऑपरेटिंग सिस्टम को ज्यादा सेफ और हैकिंग प्रूफ माना जाता है. दुनियाभर के सेलिब्रिटी और बिजनेसमैन समेत करोंड़ों लोग iPhone का यूज करते हैं, जिनमें iOS मिलता है. अब कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित रखने के लिए इस दिशा में भी काम कर रही है.
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