भारत को लेकर अमेरिका में फिर से तीखी टिप्पणी हुई है. व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारों ने भारत में अमेरिकी कंपनियों द्वारा दी जाने वाली आर्टिफिशियल इंटेजीजेंस (AI) सर्विस पर सवाल उठाए हैं. साथ ही इसे अमेरिका के लिए नुकसान बताया है.
पीटर नवारों ने कहा कि ये समझ से परे हैं कि भारत में आर्टिफिशियल इंटेजीजेंस सर्विस का फायदा मिल रहा है और उसके लिए पेमेंट अमेरीका के लोगों द्वारा किया जा रहा है. हालांकि सच इसके ठीक विपरीत है.
भारत सभी AI कंपनियों के लिए एक जरूरी मार्केट है. यहां सभी AI कंपनियां और स्टार्टअप अपनी सर्विस देकर अपना फ्यूचर और रेवेन्यू मजबूत कर रही हैं. आइए जानते हैं कैसे?
भारत ChatGPT और Gemini के लिए इसलिए जरूरी है
भारत में एक बड़ा और वर्सेटाइल यूजरबेस है. इस विशाल यूजरबेस की चाहत AI कंपनियों को भारत में खींचकर लाई है. यहां OpenAI का ChatGPT, Google का Gemini, Perplexity समेत ढेरों AI प्लेटफॉर्म हैं. एक रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां 1 हजार से ज्यादा AI कंपनियां और स्टार्टअप काम कर रहे हैं.
AI ट्रेनिंग के लिए जरूरी
भारत का यूजरबेस है, जिसकी मदद से AI कंपनियां अपने मॉडल को ट्रेन करती हैं. यहां अलग-अलग एज ग्रुप के लोग AI का यूज करते हैं. भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं हैं और 1 हजार से अधिक बोलियां हैं. Gemini और ChatGPT दोनों को यूजरबेस बेहतर करने के लिए भारतीय भाषाओं का सपोर्ट भी बेहतर करना होगा.
भारतीय डेली यूज में कर रहे AI का इस्तेमाल
भारत में लोग AI को डेली काम में यूज करते हैं. स्टूडेंट पढ़ाई में AI का यूज कर रहे, कंपनियों में इसका इस्तेमाल प्रजेंटेशन आदि बनाने में यूज हो रहा है. ऐसे में AI कंपनियां अपने मॉडल को डेली काम के लिए बेहतर बनाने की ट्रेन करती है.
भविष्य के लिए बड़ा यूजरबेस और रेवेन्यू
भारत में AI का यूजरबेस धीरे-धीरे बढ़ रहा है. इसके लिए कंपनियां जैसे OpenAI, Google और Perplexity जैसी कंपनियां पेड वर्जन को मुफ्त में दे रही हैं. इसके लिए कंपनियों ने टेलीकॉम कंपनियों से पार्टनरशिप की है और वे रिचार्ज बंडल के साथ ये सर्विस दे रही हैं. Google Gemini Pro का 18 महीने का सब्सक्रिप्शन मुफ्त में मिल रहा है, जिसकी कीमत 35100 रुपये है.
पीटर नवारों ने उठाए थे ये सवाल
पीटर नवारों ने कहा कि ChatGPT, Gemini समेत ढेरों AI कंपनियां अमेरिकी जमीन पर चलती हैं. साथ ही वह अमेरिकी बिजली, पानी और रिसोर्स का यूज करके हैं. इनका फायदा भारत और दूसरे देश उठा रहे हैं. इन सबको नवारों ने अमेरिकी आर्थिक नीति के खिलाफ बताया है.
आने वाले दिनों में सभी कंपनियां भारत में खुद का डेटा सेंटर तैयार कर रही हैं. इससे भारतीय यूजर्स का डेटा देश से बाहर ट्रांसफर नहीं होगा. इससे भारतीय यूजर्स के डेटा इंडिया में सेफ रहेगा. अभी सभी कंपनियों के डेटा सेंटर छोटे स्तर पर है और आने वाले दिनों में देश के अंदर विशाल डेटा सेंटर होंगे, जिसको लेकर कंपनियां ऐलान कर चुकी हैं.
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