भारत में एंटरटेनमेंट देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है. जहां पहले टीवी हर घर का सेंटर हुआ करता था, अब प्रोजेक्टर धीरे-धीरे उस जगह को फिल कर रहे हैं. यहां तक की कुछ एक्सपर्ट्स ये भी मान रहे हैं कि आने वाले कुछ सालों में स्मार्ट टीवी को प्रोजेक्टर रिप्लेस कर सकते हैं. प्रोजेक्टर खरीदने से पहले आपको प्रोजेक्टर की बारीकियों के बारे में जानना जरूरी है.
हमने ताइवान की टेक कंपनी BenQ से इस बारे में बातचीत की है. ये कंपनी भारत में मॉनिटर से लेकर प्रोजेक्टर जैसे हाई क्वॉलिटी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट बेचती है. हमने इस इंटरव्यू में ये जानने की कोशिश की है कि कैसे भारत में प्रोजेक्टर मार्केट बदल रहा है और ट्रेंड्स क्या कहते हैं.
BenQ के इंडिया और साउथ एशिया मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव सिंघ से इस खास बातचीत में हमने प्रोजेक्टर की टेक्नोलॉजी, ट्रेंड्स और फ्यूचर के बारे में बात की है. प्रोजेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी काफी यूज किया जा रहा है.
कोविड से पहले प्रोजेक्टर का लिमिटेड यूज था
राजीव सिंघ बताते हैं कि कोविड से पहले प्रोजेक्टर एक बेहद लिमिटेड कैटेगरी था. इसका यूज ज्यादातर ऑफिस, स्कूल या कॉन्फ्रेंस रूम तक सीमित था. घरों में भी इसका यूज होता था, लेकिन सिर्फ उन लोगों के लिए जो एक अलग डार्क रूम बनाकर हाई-एंड होम थिएटर तैयार करते थे. आम यूजर के लिए यह विकल्प ना तो आसान था और ना ही जरूरी.
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लेकिन कोविड के दौरान पूरा खेल बदल गया. हाई-स्पीड इंटरनेट की पहुंच बढ़ी, OTT प्लेटफॉर्म्स का तेजी से विस्तार हुआ और 4K कंटेंट आम यूजर तक पहुंचने लगा.
यही वह मोड़ था जहां से प्रोजेक्टर की असली कहानी शुरू हुई. जब लोग 4K कंटेंट को बड़े स्क्रीन पर देखने लगे, तो उन्हें एहसास हुआ कि 100 या 120 इंच का एक्सपीरिएंस टीवी से बिल्कुल अलग और कहीं ज्यादा इमर्सिव है.
पोर्टेबल प्रोजेक्टर ने बदली तस्वीर
राजीव के मुताबिक, इस बदलाव के साथ ही टेक्नोलॉजी भी तेजी से डेवेलप हुई. पहले प्रोजेक्टर एक फिक्स्ड डिवाइस होता था, जिसे लगाने के लिए अलग से सेटअप चाहिए होता था.
लेकिन अब पोर्टेबल और स्मार्ट प्रोजेक्टर आ चुके हैं, जिन्हें कहीं भी रखकर इस्तेमाल किया जा सकता है. दीवार पर सीधे प्रोजेक्शन हो जाता है, अलग स्क्रीन की जरूरत नहीं पड़ती और इनमें Netflix, Prime Video जैसे ऐप्स पहले से मौजूद होते हैं. यानी अब प्रोजेक्टर एक पूरी तरह से स्वतंत्र एंटरटेनमेंट डिवाइस बन चुका है.
शॉर्ट थ्रो और लेजर प्रोजेक्टर क्या होते हैं?
इसी दौरान एक और बड़ा बदलाव आया Ultra Short Throw और Laser प्रोजेक्टर के रूप में. यह ऐसे प्रोजेक्टर हैं जिन्हें दीवार के बिल्कुल पास रखकर भी बड़े स्क्रीन का एक्सपीरिएंस लिया जा सकता है. नॉर्मल प्रोजेक्टर को दीवार से एक खास दूरी पर रखना होता है.
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खास बात यह है कि लेजर प्रोजेक्टर्स दिन के उजाले में भी अच्छी ब्राइटनेस देते हैं, जिससे लाइट बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती. राजीव बताते हैं कि इस टेक्नोलॉजी ने प्रोजेक्टर को लिविंग रूम तक पहुंचा दिया है, जहां पहले टीवी का दबदबा था.
एंट्री लेवल प्रोजेक्टर लंबे समय तक नहीं चलते
हालांकि बाजार में सस्ते प्रोजेक्टर भी तेजी से आए हैं, जिनकी कीमत 10 हजार रुपये से भी कम है. लेकिन राजीव साफ कहते हैं कि ये एंट्री-लेवल एक्सपीरियंस देते हैं और इनकी लाइफ बहुत कम होती है.
कई मामलों में 800 से 1000 घंटे के बाद उनकी क्वालिटी गिरने लगती है. इसके उलट ब्रांडेड प्रोजेक्टर लंबे समय तक चलते हैं और बेहतर क्वालिटी देते हैं.
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BenQ के प्रोजेक्टर की बात करें तो कंपनी का दावा है कि उनका फोकस क्वालिटी और लॉन्ग लाइफ पर है. अब नए प्रोजेक्टर में LED और Laser लाइट सोर्स का इस्तेमाल हो रहा है, जिनकी लाइफ 20,000 घंटे तक होती है. इसका मतलब है कि एक बार खरीदने के बाद कई साल तक बिना किसी बड़ी मेंटेनेंस के इस्तेमाल किया जा सकता है.
प्रोजेक्टर में AI का यूज
राजीव यह भी बताते हैं कि अब प्रोजेक्टर में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. नए मॉडल्स में ऑटो कैलिब्रेशन सिस्टम होता है, जो कमरे की लाइट और स्क्रीन के हिसाब से खुद ही पिक्चर एडजस्ट करता है. पहले यही काम एक्सपर्ट से करवाने पर 10 से 20 हजार रुपये तक खर्च होते थे, लेकिन अब यह फीचर रियल टाइम में ऑटोमैटिक काम करता है.
एक और दिलचस्प बदलाव यूजर बिहेवियर में देखने को मिला है. पहले लोग प्रोजेक्टर खरीदते थे लेकिन उन्हें समझ नहीं आता था कि इसे कैसे सेटअप करें या कहां इस्तेमाल करें. अब नए प्रोजेक्टर AI की मदद से खुद ही दीवार पहचान लेते हैं, एंगल एडजस्ट कर लेते हैं और बिना किसी झंझट के इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाते हैं.
कोविड के बाद 1 से 18% तक पहुंच गया ग्रोथ
भारत में प्रोजेक्टर की ग्रोथ को लेकर BenQ इंडिया हेड राजीव एक अहम आंकड़ा भी शेयर करते हैं. उनके मुताबिक, प्री-कोविड दौर में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर टीवी की हिस्सेदारी 99% थी और प्रोजेक्टर सिर्फ 1% पर था. लेकिन अब यह आंकड़ा बदलकर करीब 18% तक पहुंच गया है, जो इस कैटेगरी की तेज ग्रोथ को दिखाता है.
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आफ्टर सेल्स सर्विस को लेकर भी कंपनी ने काफी काम किया है. BenQ अपने प्रोजेक्टर पर तीन साल की वारंटी देता है और ऑन-साइट सर्विस की सुविधा भी उपलब्ध कराता है, यानी यूजर को सर्विस सेंटर जाने की जरूरत नहीं होती.
तीन साल में टीवी इंडस्ट्री के बराबर हो जाएगी प्रोजेक्टर की इंडस्ट्री
अगर फ्यूचर की बात करें तो राजीव मानते हैं कि अगले तीन साल में प्रोजेक्टर और टीवी का बाजार काफी हद तक बराबरी पर आ सकता है. हालांकि वह यह भी मानते हैं कि अभी कीमत और अवेयरनेस सबसे बड़े फैक्टर हैं. जैसे-जैसे कीमतें कम होंगी और लोगों को इसके फायदे समझ आएंगे, वैसे-वैसे इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा.
कुल मिलाकर, प्रोजेक्टर अब सिर्फ ऑफिस या थिएटर का डिवाइस नहीं रह गया है. यह तेजी से हर घर का हिस्सा बनता जा रहा है और आने वाले समय में यह टीवी को सीधी टक्कर देता हुआ नजर आ सकता है.
मुन्ज़िर अहमद