चेन्नई के छात्र ने बताया पृथ्वी-चांद को जोड़ने का तरीका, NASA से मिला इनाम

चेन्नई के 18 साल के साई किरण ने नासा की प्रतियोगिता में बताया कि इंसानों को एलिवेटर के जरिए चांद पर भेजा जा सकता है. इसके लिए साई को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है.

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साकेत सिंह बघेल

  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 9:09 AM IST

सोचिए आप स्कूली छात्र हैं और आपने नासा को चांद पर घर बसाने का अनूठा तरीका बताया हो और नासा आपको इसके लिए सम्मानित भी करे, तो शायद आप खुशी से झूम उठेंगे. ठीक ऐसा ही कर दिखाया है चेन्नई के 18 साल के साई किरण ने.

दरअसल, नासा एम्स रिसर्च सेंटर, सैन जोस स्टेट यूनिवर्सिटी, और नेशनल स्पेस सोसाइटी (एनएसएस) ने एक वार्षिक प्रतियोगिता 2017 का आयोजन किया था. जिसमें दुनिया भर से केवल 12 वीं कक्षा तक के छात्रों ने हिस्सा लिया था, वहीं साई किरण भी प्रतिभागी बने थे. इस प्रतियोगिता में साई किरण ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है.

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साई किरण के अनुसार, पृथ्वी और चंद्रमा के बीच लिफ्ट का निर्माण संभव है, पृथ्वी और चंद्रमा के जरिए जोड़ा जा सकता है. इसी कल्पना के लिए नासा ने उन्हें मून प्राइज से नवाजा है. साई चेन्नई में ब्रिटिश इंटरनेशनल स्कूल के छात्र हैं.

 

इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को इंसानों के चांद पर बसने के लिए प्रपोजल बना कर देना था. जैसे ही साई को इस आयोजन के बारे मालूम हुआ साई प्रपोजल बनाने में जुट गए. उन्होने 2013 से ही इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया था. साथ ही साई ने इस विषय पर एक थिसिस भी लिखा है.

साई ने अपने प्रोजेक्ट का टाइटल 'कनेक्टिंग मून, अर्थ एंड स्पेस' और 'हुमेइयू स्पेस हैबिटेट्स' रखा था. इसमें साई ने बताया है कि चांद पर भेजा जा सकता है, जिससे उनका वहां बसना भी मुमकिन हो सकेगा.

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एशियन एज में दिए अपने बयान में साई ने बताया कि, 'इस प्रोजक्ट का पहला सेगमेंट एलिवेटर्स को बनाने के बारे में है जो इंसान और कार्गो को चंद्रमा में ले जा सकता हैं, ताकि मानव वहां अपना बसना मुमकिन कर सके. सबसे महत्वपूर्ण पहलू गुरुत्वाकर्षण है, जिसके बिना चांद पर बसना नामुकिन है.'

साई ने आगे चंद्रमा पर मनोरंजन, मनोरंजन, प्रशासन और कृषि की स्थापना के बारे में भी बताया है. उन्होंने एलेवेटर की ऊंचाई का भी उल्लेख किया, जो 40,000 किलोमीटर होगा.

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