Google ने Huawei स्मार्टफोन्स से Android किया बैन, मुश्किल में करोड़ों यूजर्स

Google ने अपने मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम Android का सपोर्ट हुआवे से कैंसिल कर दिया है. इसकी वजह अमेरिका और हुआवे के बीच चल रही कलह है.

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मुन्ज़िर अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 20 मई 2019,
  • अपडेटेड 5:57 PM IST

चीनी टेक कंपनी हुआवे के सितारे इस वक्त गर्दिश में नजर आ रहे हैं. खास कर कंपनी को अमेरिका में काफी सेटबैक मिल रहा है. अमेरिकी सरकार को लगता है कि चीनी कंपनी हुआवे अमेरिका की जासूसी के लिए चीनी सरकार के एजेंट के तौर पर काम कर रही है और इस वजह से अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप ने हुआवे के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं.

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अमेरिका में हुआवे को पहले से ही बैन किया गया है, लेकिन अब Google ने हुआवे से एंड्रॉयड का लाइसेंस कैंसिल कर दिया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने इसे रिपोर्ट किया और बाद में इसे कन्फर्म भी किया गया है. हुआवे के नए स्मार्टफोन्स गूगल ऐप्स और सर्विस का भी ऐक्सेस नहीं मिलेगा. 

मुमकिन है हुआवे के स्मार्टफोन्स में गूगल मैप्स, यूट्यूब, गूगल प्ले स्टोर और दूसरे जरूरी गूगल के ऐप्स का भी ऐक्सेस बंद कर दिया जाएगा. इससे हुआवे सहित कंपनी के कस्टमर्स को बड़ा प्रभाव पड़ सकता है. 

हालांकि गूगल ने हुआवे के लिए एंड्रॉयड का लाइसेंस खुद से कैंसिल नहीं किया है, बल्कि गूगल अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट के आदेश का पालन कर रही है. गूगल के एक प्रवक्ता ने एक स्टेटमेंट में कहा है, ‘हम आदेशा का पालन कर रहे हैं और इसे रिव्यू कर रहे हैं. गूगल प्ले प्रोटेक्ट और सिक्योरिटी प्रोटेक्शन हुआवे के मौजूदा स्मार्टफोन्स में दिए जाते रहेंगे’

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मौजूदा हुआवे के स्मार्टफोन्स में गूगल के इस फैसले का कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन स्थिति ऐसी ही बनी रही तो निश्चित तौर पर हुआवे स्मार्टफोन्स यूजर्स की मुश्किल बढ़ेंगी. गूगल के इस फैसले के बाद अब हुआवे Android Open Source Project  यूज नहीं कर पाएगी. इसका मतलब ये है कि गूगल के ऐप्स और सर्विस हुआवे के फोन में आने वाले समय में नहीं दिए जाएंगे.

गौरतलब है कि अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप सरकार की तरफ से लगातार हुआवे पर दबाव बनाया गया है. इसकी वजह ये है कि अमेरिका को इस बात का डर है कि चीनी सरकार अमेरिकी नेटवर्क की जासूसी करने के लिए हुआवे की मदद ले रही है.

अमेरिका और हुआवे की लड़ाई नई नहीं है. पिछले साल अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों ने हुआवे और ZTE के डिवाइस यूज करने को लेकर अगाह किया था और अमेरिकी पॉलिटिशियंस ने हुआवे को एक चीनी सरकार का एक अंग करार दिया है.

हुआवे का कहना ये है कि यह चीनी सरकार के लिए संभव ही नहीं है कि वो उनके डिवाइस में जासूसी के लिए कुछ लगा सकें. कंपनी ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में बिजनेस ठी हो जाएगा.

कुल मिला कर अभी के लिए इतना ही है कि करोड़ों हुआवे स्मार्टफोन यूजर्स के लिए अभी मुश्किल बनी हुई. क्योंकि अभी भी यह साफ नहीं हुआ है कि यूजर्स पर इसका असर क्या पड़ेगा. इतना ही नहीं आने वाले समय में हुआवे जो स्मार्टफोन्स बेचेगी उसमें कंपनी अपना सॉफ्टवेयर देगी या फिर एंड्रॉयड के साथ लाइसेंस ठीक होने तक कंपनी फोन लॉन्च नहीं करेगी.

आपको बता दें कि हुआवे अपने ऑपरेटिंग सिस्टम पर भी काम कर रही है. लेकिन एंड्रॉयड की जो लोकप्रियता है उसे देखते हुए ये कह पाना मुश्किल है कि बिना एंड्रॉयड के हुआवे स्मार्टफोन्स का फ्यूचर क्या होगा.  

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