राम मंदिर पर संतों ने कहा- अब धैर्य नहीं, योगी दौड़ पड़े दिल्ली की ओर

बीजेपी राम मंदिर के मुद्दे पर बुरी तरह फंस गई है. योगी आदित्यनाथ कल अयोध्या गए थे कि वो राम मंदिर के मुद्दे को फिर से राजनीति के केंद्र में स्थापित कर देंगे. लेकिन संतों के सवालों ने उन्हें ऐसे घेरा कि संघ को स्थिति से आगाह करने के लिए दिल्ली दौड़ना पड़ा.

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संतों के बीच योगी संतों के बीच योगी

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 26 जून 2018,
  • अपडेटेड 4:55 PM IST

बीजेपी राम मंदिर के मुद्दे पर बुरी तरह फंस गई है. योगी आदित्यनाथ कल अयोध्या गए थे कि वो राम मंदिर के मुद्दे को फिर से राजनीति के केंद्र में स्थापित कर देंगे. लेकिन संतों के सवालों ने उन्हें ऐसे घेरा कि संघ को स्थिति से आगाह करने के लिए उन्हें दिल्ली की ओर दौड़ना पड़ा. राम मंदिर के लिए योगी आदित्यनाथ ने सब्र रखने की सलाह दी और संतों ने दो टूक कह दिया अब और इंतजार नहीं हो सकता.

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गोरखपुर वाले महंत जी को महसूस होने लगा है कि मंदिर पर अयोध्या वाले महंतों का धैर्य चूक रहा है. वैसे भी 32 बरस से धैर्य ही तो रखे हुए हैं. आडवाणी के रथ से लेकर मोदी के राज तक राम मंदिर के नारे में धैर्य के अलावा है क्या.

1998 से 2018 तक श्रीराम के अयोध्या आरोहण के इंतजार में मड़ई में रहने वाले भाजपाई महलों में रहने लगे. रथ से चलने वाले बोईंग में उड़ने लगे, और हनुमानगढ़ी में आरती करने वाले हाथ जोड़े खड़े रहे कि जब लखनऊ से दिल्ली तक कमल खिले जाएगा तो प्रभु राम का वनवास भी खत्म हो जाएगा. लेकिन इस इंतजार को न विराम लगना था और न लगा. अब बीजेपी पर फिदा सत्ता के व्यग्र वनवासी कहते हैं कि हमें नहीं मालूम कोर्ट-कचहरी अब तो अयोध्या में राम मंदिर चाहिए ही चाहिए.

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यानी कि 2019 से पहले राममंदिर के मुद्दे को बीजेपी ने रस्सी से फिर उतार लिया है. जब चाहा धोया, जब चाहा सुखोया और जब चाहा हो गया. आधे लोग कहते हैं कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे और आधे कहते हैं कि कोर्ट कचहरी कुछ नहीं राम मंदिर पर इधर-उधर की बात और नहीं.

दरअसल बीजेपी को लग रहा है कि 2019 की कृपा राम मंदिर में ही अटकी हुई है, इसलिए महंत नृत्यगोपालदास के जन्मदिन के बहाने जब हनुमानगढ़ी में मजमा लगा तो महंत मुख्यमंत्री को भी माथा नवाना पड़ा.

सब्र की इस अपील पर साधुओं की मंडली आपा खो बैठी है और बीजेपी फंस गई है. योगी आदित्यनाथ अयोध्या में संतों से मिले तो उनकी समझ में आ गया कि अब वो और बहलने को राजी नहीं हैं. इसलिए वो फौरन दिल्ली के झंडेवालान भागे. आरएसएस को हिसाब-किताब देने, प्रवीण तोगड़िया के अयोध्या कूच के ऐलान ने अलग मुश्किल खड़ी कर दी है.

अयोध्या को अपनी राजनीति की दूसरी राजधानी बना डालने वाले योगी आदित्यनाथ की समझ में नहीं आ रहा है कि संतों को संभाला कैसे जाए. पूरी अयोध्या में एक भी संत उनके साथ सहानुभूति जताने वाला नहीं मिला. ऐसे में वक्फ बोर्ड के इकबाल अंसारी ने उनके लिए जो बोल कहे हैं उससे उन्हें ठंडक मिली होगी. इकबाल अंसारी ने कहा कि कुछ लोग धर्म के नाम पर सीएम को टॉर्चर कर रहे हैं.

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