चोरों की ऐसी कहानी- कोई बना जज तो किसी पर बनी फिल्म

37 साल के धनीराम मित्तल उर्फ इंडियन चार्ल्स शोभराज, इनकी पहचान चार दशकों से चोरी और ठगी की है. जालसाजी करते हुए जज बने.

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लव रघुवंशी / सुप्रतिम बनर्जी

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2016,
  • अपडेटेड 1:05 AM IST

दुनिया में कई चोर ऐसे हैं जिनके किस्से देखे और सुने गए हैं. मगर कुछ चोरों की एक ऐसी तिलस्मी दुनिया है, जिसे सुनकर यकीन कर कर पाना मुश्किल होता है कि चोर ऐसे भी होते हैं. जरा सोचें चोरी करते-करते कोई चोर सीधे जज की ही कुर्सी पर जा बैठे और अपने जैसे दूसरे चोरों का इंसाफ भी करने लगे? क्या आप यकीन करेंगे कि कोई चोर बस, फ्लाइट से सफर करे और शोफर ड्रिवेन कार से ही चोरी के लिए निकले?

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रियलिटी शो में भी आया चोर
37 साल के धनीराम मित्तल उर्फ इंडियन चार्ल्स शोभराज, इनकी पहचान चार दशकों से चोरी और ठगी की है. जालसाजी करते हुए जज बने. 45 साल के नदीम कुरैशी उर्फ उस्ताद, इनकी पहचान 21 सालों में पांच सौ से ज्यादा चोरियां करने की है. ये मौजूदा दौर का सबसे बड़ा चोर है. 26 साल का देवेंद्र उर्फ बंटी उर्फ सुपरचोर, इसकी पहचान पांच सौ से ज्यादा चोरियां करने की है. इसके नाम पर फिल्म भी बनी है और रियलिटी शो में भी इसे जगह मिली है. गुनाहों की दुनिया में इस शख्स ने अपनी करतूतों के बूते जो नाम पैदा किया, वैसा कम ही दिखता है. लेकिन जुर्म की इस दुनिया में ऐसे चेहरों की भी कोई कमी नहीं, जो अपने काम से बंटी की बादशाहत को भी चुनौती देते हैं.

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कोई बीए तो कोई एमबीए
चोरों की इस बारात में कोई बीए-एलएलबी है, कोई एमबीए, तो कोई बिल्कुल ही अंगूठाटेक. लेकिन सब के सब एक से बढ़ कर एक चोर, फ्रॉडस्टर, धंधेबाज और चीटर. बस, यूं समझ लीजिए कि ये काम तो चोरी का करते हैं, लेकिन टशन ऐसी रखते हैं कि करीब से देखें तो बॉलीवुड के हीरो भी शर्मा जाएं. महंगी और आलीशान गाड़ियों में घूमना, चोरी के लिए भी अपने साथ ड्राइवर लेकर चलना और एक शहर से दूसरे शहर की दूरी फ्लाइट से तय करना इन चोरों का शगल बन चुका है.

77 साल की उम्र में भी चोरी करना जारी
चोरों के सबसे बड़े सरदार धनीराम मित्तल उर्फ इंडियन चार्ल्स शोभराज की उम्र 77 साल की है. जरा भी तेज चलते हैं तो हांफने लगते हैं. लेकिन साठ के दशक से इन्होंने चोरी और जालसाजी के जिस सिलसिले की शुरुआत की है, उससे अब भी तौबा करने को तैयार नहीं हैं. जनाब की हैसियत का अंदाजा बस इसी से लगा लीजिए कि चोरी के इल्जाम में ये पहली बार 1964 में गिरफ्तार हुए थे. यानी कुछ इतने साल पहले कि हम से बहुत से लोग तो तभी पैदा भी नहीं हुए. लेकिन इसके बाद इन्होंने इतनी चोरी और जालसाजियां की कि गितनी अब इन्हें खुद भी याद नहीं.

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...जब चोर बन गया जज
52 सालों से जुर्म की दुनिया में अंगद की तरह पांव जमाए दिल्ली के धनीराम ने चोरी और जालसाजी करते हुए ही बीए-एलएलबी, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट और ग्राफोलॉजी की पढ़ाई की और पास भी कर गए. लेकिन इसके बाद इन्होंने वो कारनामा कर दिखाया, जैसा इनके अलावा शायद दूसरा कोई कर ही नहीं सकता. जनाब ने हरियाणा के झज्जर कोर्ट के एडिशनल सेशन जज को फर्जी तरीके से कंपलसरी लीव यानी छुट्टी पर भेज दिया और उनके पीछे मुड़ते ही फर्जी कागजातों के जरिए सीधे जज की कुर्सी पर विराजमान हो गए. इसके बाद तो इन्होंने पूरे दो महीने तक कितनों को सजा दी और कितनों को बरी किया किसी को नहीं पता. हालांकि रिकॉर्ड कहता है कि इन दो महीनों में चोर से जज बने धनीराम ने 2 हजार 7 सौ चालीस (2740 अपराधियों को जमानत) अपराधियों को जमानत पर रिहा कर दिया.

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