ये नानी गुड़ियों की कहानी नहीं सुनातीं, बल्क‍ि इनको बनाकर देती हैं...

सुगुना रंगास्वामी की बनाई गुड़ियों की बात ही कुछ निराली है. ये डॉल्स ना सिर्फ बच्चों के बल्कि बड़ों के चेहरे पर भी मुस्कान ला देती हैं.

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सुगुना रंगास्वामी सुगुना रंगास्वामी

स्वाति पांडे

  • चेन्नई,
  • 20 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 1:35 PM IST

आज के समय में अगर आप किसी को बार्बी गिफ्ट नहीं करना चाहते तो सुगुना रंगास्वामी की बनाई डॉल्स आपका मन बदल सकती हैं. ये कोई नॉर्मल गुड़ि‍या नहीं हैं. सुगुना की बनाई डॉल्स कुछ खास होती हैं.

सुगुना की छोटी बेटी यूएस में पढ़ाती हैं. उनकी बेटी ने जब चेन्नई में अपनी मां को अपने स्कूल के बच्चों के लिए सुपरहीरो डॉल्स बनाने को कहा तो सुगुना ने कुछ अलग करने का सोचा. सुगना ने सुपरहीरो कपड़ों को मिक्स मैच किया. अपनी क्रिएटिविटी के बारे में बात करते हुए वो कहती हैं कि वो ऐसी डॉल्स बनाना चाहती थीं जिनसे बच्चे खुद को जोड़ सकें. वो उन्हें अपने अनुसार नाम दे सकें. सुगुना ने सिंड्रेला को लेकर ऐसे बहुत से एक्सपेरिमेंट किए हैं. किसी एक डॉल को उन्होंने बेहद साधारण से कपड़े पहनाकर तैयार किया है तो किसी को प्रिंसेस लुक दिया है.

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सुगुना अब गोल्डीलॉक्स बनाना चाहती हैं लेकिन इसे बनाना थोड़ा कठिन है. वो कहती हैं, 'तीन भालुओं को सिलना कठिन है लेकिन मैं एक नहीं बनाना चाहती. यह अच्छा नहीं लगता.' सुगुना को डॉल्स बनाने के ऑर्डर चेन्नई, बंगलुरू और मुंबई से मिलते हैं. वो कहती हैं, 'डॉल्स बनाना मेरे लिए मेडिटेशन जैसा है.' 77 साल की सुगुना 40 साल से गुड़िया बना रही हैं. लेकिन एक बात ये भी है कि उम्र के साथ उनकी रफ्तार थोड़ी कम हो गई है.

सुगुना जब कोलकाता में रहती थीं तब उनके घर 'वुमेन्स वीकली' मैगजीन आती थी. उन्होंने डॉल बनाना उसी मैगजीन से सीखा. सुगुना की दूसरी बेटी जयाप्रिया ने बताया कि  उनकी मां 1970 से डॉल्स बना रही हैं. 1980 में जब वे लोग चेन्नई शिफ्ट हो गए तो उनकी मां ने बर्थडे पार्टी में गिफ्ट देने के लिए डॉल बनाना शुरू कर दिया. जयाप्रिया कहती हैं, 'जितनी भी डॉल्स या टेडी बियर मैंने देखे हैं वो बहुत क्यूट होते हैं लेकिन उनकी आंखे थोड़ी बड़ी और खतरनाक होती है. तो उनके चेहरे पर बहुत सुकून देखने को मिलता है.'

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सुगुना कई एग्जीबिजशन्स भी लगा चुकी हैं. लेकिन परिवार की जिम्मेदारी के चलते उन्होंने इसे कभी भी बिजनेस नहीं बनाया. सुगुना कहती हैं, 'मैं सबसे पहले हाउसवाइफ हूं. परिवार मेरे लिए पहले आता है. मुझे इसका कोई दुख नहीं है. अब मेरे बच्चे सैटल हो गए हैं तो मैं अब अपना काम अच्छे से कर सकती हूं.'

तीन महीने पहले तक सुगुना चेन्नई और बंगलुरू के दो दुकानों के लिए डॉल्स बना रही थीं. लेकिन अब दोनों ही दुकानें बंद हो गई हैं. अब वो प्राइवेट ऑर्डर्स लेती हैं और एक्जीबिशन लगाती हैं.

सुगुना कहती हैं, 'जब मैं अपने बच्चों के पास नहीं जाती हूं तब मैं यहां अपने दोस्तों से मिलती हूं. धार्मिक जगहों पर जाती हूं और अपने घर में पूजा रखती हूं. मैं बहुत बिजी रहती हूं. मेरे पास बिल्कुल भी समय नहीं है.'

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