रत्ना शाह पाठक बॉलीवुड की बेहतरीन अदाकारा दीना पाठक की बेटी हैं. ऐसे में उन्हें बचपन से ही स्टारकिड होने की वजह से अलग पहचान मिली, लेकिन बेहतरीन काम के दम पर रत्ना ने अलग पहचान बनाई है. स्टारकिड होने का अनुभव शेयर करते हुए रत्ना ने कहा ये बहुत दर्द भरा है.
रत्ना पाठक बुधवार को इंडिया टुडे वुमन समिट एंड अवॉर्ड्स के अहम सत्र कमिंग ऑफ ऐज- वेन ग्रे इज गुड के अहम सत्र में शामिल हुईं. उन्होंने बताया कि स्टारकिड होना बस वहां तक सही है जहां आपना परिचय किसी को देना हो. लेकिन ये बहुत दर्दभरा भी होता है, ये मैं जानती हूं.
अपनी इस बात को समझाते हुए रत्ना ने बचपन का एक किस्सा सुनाया, एक बार वो आठवीं क्लास में गणित के पेपर में नकल कर रही थीं. तभी क्लास में आए टीचर ने कहा, मैं कल उन सारे बच्चों को सजा दूंगा जो नकल कर रहे थे. ये सुनकर हम सब तैयार हो गए कि ठीक है जो होगा देख लेंगे. दूसरे दिन सुबह टीचर क्लास में आया, उसने सबको सजा दी. लेकिन जब मेरा नंबर आया तो बोले तुम्हें कैसे मार सकता हूं, तुम तो दीना पाठक की बेटी हो. रत्ना कहती हैं कि ये सुनकर मेरा सिर झुक गया, क्योंकि आपके साथ फेयर नहीं हुआ. मैं सहेलियों से बात नहीं कर सकती थी.
नए कलाकारों को एक्टिंग से ज्यादा इमेज की चिंता
रत्ना ने बॉलीवुड में नए कलाकारों के बारे में कहा, वो सीन ऐसा शूट करते हैं, जिसमें वो हीरो लगे. उनका अपमान नहीं होना चाहिए. रत्ना ने एक फिल्म का वाकया सुनाया जो कपूर एंड संस से जुड़ा था. उन्होंने बताया मुझे सीन में रजत पर सामान फेंकना था. इस सीन की रजत और मैंने कईबार रिहर्सल की. लेकिन आज कल के कई स्टार तो ऐसे सीन करने में शरमाते हैं. वो सोचते हैं पर्दे पर हुई उनकी बेइज्जती होगी तो रियल लाइफ में भी होगी. ये बहुत फनी है.
नेपोटिज्म पर बोलीं रत्ना
इंडिया फुल नेपोटिज्म है, फिर हिंदी सिनेमा को लेबल देना गलत है. ये बात सबको पता है, सब इसमें हिस्सेदार हैं. इसलिए किसी एक ग्रुप को ये लेबल देना गलत है.
ऋचा मिश्रा