EMI पर RBI का फैसला अस्पष्ट और अधूरा, चिदंबरम ने उठाए ये सवाल

भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में ऐ​तिहासिक कटौती की है. इसके साथ ही बैंकों को, मासिक ईएमआई दे रहे ग्राहकों को भी मोहलत की सलाह दी है.

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आरबीआई ने बैंकों को मोहलत की सलाह दी है आरबीआई ने बैंकों को मोहलत की सलाह दी है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 3:30 PM IST

  • रेपो रेट में अब तक की सबसे बड़ी कटौती
  • मासिक EMI को लेकर बैंकों के पाले में गेंद

कोरोना संकट के मद्देनजर आरबीआई रेपो रेट में कटौती के फैसले का कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने स्वागत किया है. इसके साथ ही मासिक ईएमआई लेकर आरबीआई की सलाह पर सवाल खड़े किए हैं.

पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा, ‘‘मैं रेपो रेट में कटौती के आरबीआई के फैसले और नकदी के लिए उठाए कदमों का स्वागत करता हूं. लेकिन ईएमआई की तिथि आगे बढ़ाने पर आरबीआई का निर्देश अस्पष्ट है. ऐसा लगता है कि यह अधूरे मन से किया गया है. सभी ईएमआई के भुगतान की तिथियां स्वत: आगे बढ़नी चाहिए.’’ चिदंबरम के मुताबिक मैंने सुझाव दिया था कि सभी तिथियों को 30 जून तक बढ़ाया जाए. अब कर्ज लेने वालों को बैंकों पर निर्भर बना दिया गया है और वे निराश होंगे.

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निर्मला सीतारमण ने बैंकों से की ये अपील

इस बीच, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेपो रेट में की गई कटौती का लाभ जल्द से जल्द ग्राहकों तक पहुंचाने पर जोर दिया. निर्मला सीतारमण ने कहा कि ब्याज दरों में कमी का लाभ ग्राहकों तक जल्द से जल्द पहुंचाया जाना चाहिए. दरअसल, ये शिकायत रही है कि रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में पिछले कुछ माह के दौरान भारी कटौती किए जाने के बावजूद बैंकों ने कर्ज की दर में उतनी कटौती नहीं की है.

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अब जबकि रिजर्व बैंक ने रेपो दर में ऐतिहासिक कटौती की है तो कर्ज पर भी ब्याज दर में इसी के अनुरूप कटौती किए जाने की उम्मीद है. बता दें कि रिजर्व बैंक ने कोरोना वायरस के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर को कम करने के लिए शुक्रवार को रेपो रेट को 0.75 प्रतिशत घटाकर 4.4 प्रतिशत करने की अप्रत्याशित घोषणा की.

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पीएम मोदी ने क्या कहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिजर्व बैंक की सराहना करते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक ने कोरोना वायरस के संक्रमण से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिये बड़े कदम उठाए हैं. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘इन घोषणाओं से बाजार में तरलता की स्थिति बेहतर होगी, कर्ज की ब्याज दरें कम होंगी और मध्यम वर्ग के अलावा कारोबारियों को मदद मिलेगी.’’

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