गरीब की लाश के लिए एंबुलेंस नहीं और मंत्री के लिए दौड़ा अस्पताल का पूरा अमला

शिवपुरी जिले के अस्पताल में एक गरीब आदिवासी की लाश घंटों तक पड़ी रही और अस्पताल प्रशासन उसे घर तक ले जाने के लिए एंबुलेंस देने से इनकार करता रहा. मृतक के घरवालों से यही कहा जाता रहा कि प्राइवेट एंबुलेस लाकर लाश को जल्दी ले जाओ.

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यशोधरा राजे सिंधिया को थकान की वजह से आया था चक्कर यशोधरा राजे सिंधिया को थकान की वजह से आया था चक्कर

मोनिका शर्मा / खुशदीप सहगल

  • शिवपुरी,
  • 15 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 12:31 AM IST

वीवीआईपी और आम नागरिक के बीच देश में कितनी चौड़ी खाई है, इसकी एक बानगी गुरुवार को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में देखने को मिली. शिवपुरी जिले के अस्पताल में एक गरीब आदिवासी की लाश घंटों तक पड़ी रही और अस्पताल प्रशासन उसे घर तक ले जाने के लिए एंबुलेंस देने से इनकार करता रहा. मृतक के घरवालों से यही कहा जाता रहा कि प्राइवेट एंबुलेस लाकर लाश को जल्दी ले जाओ.

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मंत्री साहिबा के लिए पहुंचे डॉक्टर से लेकर एंबुलेंस
एक तरफ ये सब हो रहा था कि अस्पताल से कुछ ही दूरी पर स्थित मानस भवन में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए मध्य प्रदेश की खेल और युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया पहुंचीं. कार से उतरते ही यशोधरा को चक्कर आया और वो कुछ लम्हों के लिए कार से टेक लगाकर खड़ी हो गईं. मंत्री के कार्यक्रम की वजह से सीएमओएच समेत शिवपुरी के तमाम अधिकारी वहां मौजूद थे. सीएमओएच डॉक्टर विष्णुकांत खरे ने तत्काल जिला अस्पताल को निर्देश दिया तो वहां से डॉक्टर समेत पूरे अमले ने एंबुलेंस पर वहां पहुंचने में पलक झपकने की भी देर नहीं लगाई.

ढाई घंटे तक पड़ी रही लाश
ये वही अस्पताल प्रशासन था जो विजयपुरा गांव के निवासी रामलाल की लाश को घर तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस देने में लगातार मना कर रहा था. लाश अस्पताल की गैलरी में स्ट्रेचर पर पड़ी थी और मृतक का परिवार ढाई घंटे तक अस्पताल के स्टाफ से गुहार लगाता रहा लेकिन कोई उनकी सुनवाई नहीं कर रहा था. मृतक के बेटे ने ये भी कहा कि वो बहुत गरीब हैं, प्राइवेट एंबुलेंस का इंतजाम करने के लिए उनके पास पैसे नहीं है. लेकिन फिर भी अस्पताल के कर्ताधर्ता नहीं पसीजे. रामलाल को तेज बुखार की वजह से बुधवार को शिवपुरी के जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया था. गुरुवार सुबह 10 बजे रामलाल ने दम तोड़ दिया.

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सरकारी आदेश के बावजूद अनदेखी
मध्य प्रदेश सरकार का आदेश है कि अस्पताल में किसी गरीब की मौत होती है तो लाश को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था अस्पताल करेगा. लेकिन इस आदेश के बावजूद अस्पताल प्रशासन का ये रवैया हैरान करने वाला था. सीएमओएच डॉक्टर विष्णु खरे का ध्यान जब इस घटना की ओर दिलाया गया तो उनका कहना था कि लाश को गांव तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की है जिसे सिविल सर्जन देखते हैं. सीएओएच ने ये भी कहा कि वो पूरे जिले को देखते हैं, ब्लॉकों में क्या हो रहा है, ये उन्हें पता नहीं चल पाता. कुल मिलाकर सीएमएचओ का रवैया पल्ला झाड़ने जैसा ही था.

मंत्री को सिर्फ थकान की वजह आया था चक्कर
मंत्री की तीमारदारी के लिए अस्पताल से पहुंचे डॉक्टर डी के बंसल ने कहा कि मंत्री जी को थकान की वजह से चक्कर आ गया था, जिसके लिए उन्हें तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स लेने के लिए कहा गया. मंत्री महिलाओं को रसोई गैस किट बांटने के लिए आयोजित कार्यक्रम में आई थीं.

मामले ने तूल पकड़ा तो हरकत में आए अधिकारी
हालांकि मामले के तूल पकड़ने और आला अधिकारियों की जानकारी में आने का इतना असर हुआ कि जिला अस्पताल ने मृतक आदिवासी की लाश को भी एंबुलेंस से घर पहुंचाने की व्यवस्था आखिरकार करा दी. लेकिन घंटों तक मृतक के घरवालों को जो भुगतना पड़ा, उसका हिसाब कौन देगा?

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