जानिए, वो 5 कारण जिसके चलते महेंद्र पांडेय को मिली UP में बीजेपी की कमान

महेन्द्र नाथ पांडेय को बीजेपी अध्यक्ष बना कर पार्टी ने सूबे के सवर्ण मतदातओं को साधने की कोशिश की है. प्रदेश में करीब 22 फीसदी सवर्ण वोटर हैं. इनमें करीब 12 फीसदी ब्राह्मण मतदाता है, जो बीजेपी का कोर वोट माना जाता है.

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यूपी बीजेपी अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय यूपी बीजेपी अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय

कुबूल अहमद

  • लखनऊ,
  • 01 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 11:37 AM IST

मिशन 2019 के तहत बीजेपी अपने कील कांटे दुरुस्त करने में जुट गई है. इसी कड़ी में बीजेपी आलाकमान ने देश के सबसे बड़े सियासी सूबे उत्तर प्रदेश में पार्टी की कमान डॉ महेंद्र नाथ पांडेय को दी है. ऐसे पांच कारण हैं, जिनकी वजह से पार्टी प्रमुख अमित शाह ने केशव मौर्य की जगह डॉ महेंद्र नाथ पांडेय को पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का बड़ा कदम उठाया है. जबकि प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में कई बड़े चेहरे शामिल थे. इसके बावजूद बाजी महेंद्र पांडेय के हाथ लगी है.

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कोर वोट पर नजर

महेन्द्र नाथ पांडेय को कर पार्टी ने सूबे के सवर्ण मतदातओं को साधने की कोशिश की है. प्रदेश में करीब 22 फीसदी सवर्ण वोटर हैं. इनमें करीब 12 फीसदी ब्राह्मण मतदाता है, जो बीजेपी का कोर वोट माना जाता है. इन्ही कोर वोटर के मद्देनजर महेंद्र नाथ पांडेय को पार्टी की कमान सौंपी गई है. इतना ही नहीं मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले कलराज मिश्र जो यूपी के मजबूत ब्राह्मण चेहरा माने जाते थे, उनकी जगह भरने के मद्देनजर भी इसे देखा जा रहा है.

संघ की पृष्ठभूमि

नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पाण्डेय का जन्म यूपी के गाजीपुर के पखनपुर गांव में हुआ. वह संघ के आगंन में पले बढ़े हैं.  छात्र जीवन से ही आरएसएस से जुड़ गए थे और संघ की लगने वाली शाखा में बकायदा भाग लेते थे. इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के खिलाफ आंदोलन किया था और कई महीने उन्हें जेल में रहना पड़ा था. अयोध्या रामजन्म भूमि आंदोलन से भी महेंद्र नाथ जुड़े रहे हैं.

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सामंजस्य बैठाने की कोशिश

राजपूत समाज से ताल्लुक योगी आदित्यनाथ को यूपी के सीएम बनाए जाने के बाद से सूबे का ब्राह्मण समाज बेचैन महसूस कर रहा था. सूबे में DGP सहित काफी जिलों में राजपूज समाज के जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक बनाए जाने के बात बहस शुरु हो गई थी. इतना ही नहीं गोरखपुर में ब्राह्मण नेता हरिशंकर तिवारी के घर पर पुलिस के छापेमारी और रायबरेली में 5 ब्राह्मणों की हत्या से ब्राह्मणों नें बीजेपी के प्रति नाराजगी बढ़ रही थी. इसके अलावा कई ब्राह्मण मंत्री योगी सरकार में है, लेकिन ब्राह्मण समाज में उनकी छवि नेता के तौर पर नहीं रही. ऐसे में राजपूत और ब्राह्मण समाज के बीच सामंजस्य बनाने में महेंद्र नाथ पांडेय कितना सफल हो पाएंगे

मोदी-शाह के भरोसेमंद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और करीबी माने जाते हैं. इसी मद्देनजर उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में चंदौली से उम्मीदवार बनाया गया था. जबकि टिकट मिलने के बाद भी पांडेय चुनाव लड़ने से हिचकिचा रहे थे, लेकिन अमित शाह के समझाने के बाद उन्होंने पर्चा भरा और जीतकर लोकसभा पहुंचे. इसके बाद उन्हें मोदी ने अपनी कैबिनेट में जगह दी और मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री का जिम्मा सौंपा गया था.

संघर्षशील और जमीनी नेता

महेंद्र नाथ पांडेय की छवि संघर्षशील और जमीनी नेता की रही है. वह छात्र जीवन से ही सियासत में कदम रख दिया था. वह सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज में 1973 में अध्यक्ष चुने गए और 1978 में बीएचयू के छात्रसंघ का चुनाव जीतकर महामंत्री बने. 1991 में वह पहली बार बीजेपी के टिकट से विधानसभा चुनाव लड़े थे. कल्याण सिंह सरकार में यूपी में वह मंत्री भी रह चुके हैं.

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