अब तीसरे चरण के रण पर फोकस, अखिलेश की सीधे मोदी-योगी से भिड़ंत

लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में यूपी की 10 लोकसभा सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होने है. इस चरण में समाजवादी पार्टी के साथ-साथ मुलायम सिंह यादव और उनके कुनबे को सियासी इम्तिहान से गुजरना है.

Advertisement
अखिलेश यादव, नरेंद्र मोदी और मुलायम सिंह (फोटो-फाइल) अखिलेश यादव, नरेंद्र मोदी और मुलायम सिंह (फोटो-फाइल)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 19 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 11:08 AM IST

लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में यूपी की 10 लोकसभा सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है. इस चरण में समाजवादी पार्टी के साथ-साथ मुलायम सिंह यादव और उनके कुनबे को सियासी इम्तिहान से गुजरना है. सूबे की जिन 10 लोकसभा सीटों पर चुनाव होने हैं, वहां गठबंधन के तहत 9 सीटों पर सपा मैदान में है और महज एक सीट पर बसपा चुनाव लड़ रही है. इस चरण में पूरी तरह से अखिलेश यादव बनाम नरेंद्र मोदी के बीच राजनीतिक लड़ाई लड़ी जा रही है.

Advertisement

दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद, रामपुर, संभल, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, आंवला, बरेली और पीलीभीत सीट पर वोट डाले जाएंगे. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी इन 10 सीटों में से 7 सीटें जीतने में  सफल रही थी और 3 सीटें सपा को मिली थी. इस बार के सियासी संग्राम में सपा-बसपा-आरएलडी मिलकर चुनावी मैदान में उतरे हैं. इस दौर में सपा अगुवाई कर रही है और बीजेपी से उसका सीधा मुकाबला है.

मुरादाबाद:

मुरादाबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी से मौजूदा सांसद कुंवर सर्वेश सिंह, कांग्रेस से इमरान प्रतापगढ़ी और सपा से डॉ. एसटी हसन सहित 13 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. मोदी लहर में बीजेपी मुरादाबाद जैसे मुस्लिम बहुल सीट पर 2014 में पहली बार कमल खिलाने में कामयाब रही थी. हालांकि उस समय भी सपा और बसपा दोनों से मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में थे. इस बार दोनों पार्टियां गठबंधन करके चुनावी रण में उतरी है, जिनके सहारे एसटी हसन बीजेपी से पिछले हार का हिसाब बराबर करना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस से इमरान प्रतापगढ़ी ने उतर चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है.

Advertisement

मुरादाबाद के जातीय समीकरण को देखें साढ़े 6 लाख मुस्लिम, एक लाख राजपूत, ढाई लाख दलित, सवा लाख लाख सैनी/कश्यप, 8 हजार जाट और 50 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं. ऐसे में गठबंधन के पक्ष में जातीय समीकरण हैं, लेकिन कांग्रेस मुस्लिम वोट के बिखराव में बीजेपी उम्मीदवार जीत की आस एक बार लगाए हुए हैं.

रामपुर:

रामपुर संसदीय सीट से सपा के आजम खान पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरे हैं. आजम को टक्कर देने के लिए इस सीट से दो बार की सांसद रहीं फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं और कांग्रेस से पूर्व विधायक संजय कपूर सियासी संग्राम में हैं.1967 के बाद रामपुर में पहली बार है जब कांग्रेस ने रामपुर के 'नवाब परिवार' से बाहर के किसी शख्स को प्रत्याशी बनाया है. सूबे में सबसे ज्यादा 51 फीसदी मुस्लिम मतदाता रामपुर सीट पर है. बावजूद इसके बीजेपी 2014 के नेपाल सिंह जीतने में कामयाब रहे थे. हालांकि इस बार पार्टी ने उनका टिकट काटकर जया प्रदा पर दांव लगाया है. जया प्रदा और आजम खान के बीच सीधा मुकाबला होता नजर आ रहा है.

संभल:

संभल लोकसभा सीट से गठबंधन की ओर से सपा के शफीकुर्रहमान बर्क चुनावी मैदान में है. बर्क के खिलाफ बीजेपी से परमेश्वर लाल सैनी और कांग्रेस से मेजर जगत पाल सिंह सहित 12 उम्मीदवार चुनावी रण में हैं. संभल सीट भी मुस्लिम बहुल सीटों में आती है, इसके बावजूद बीजेपी 2014 में यहां से जीतने में सफल रही थी. हालांकि उत्तर प्रदेश में सबसे कम करीब 5 हजार वोटों से शफीकुर्रहमान बर्क चुनाव हारे थे. इस बार बसपा आरएलडी गठबंधन के सहारे पिछली हार का हिसाब बराबर करना चाहती है. सूबे की ये एक ऐसी सीट है, जहां से पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण से लेकर मुलायम सिंह यादव तक जीत दर्ज कर चुके हैं.

Advertisement

फिरोजाबाद:

फिरोजाबाद लोकसभा सीट की सियासी लड़ाई चाचा बनाम भतीजे के बीच बीच लड़ी जा रही है. इस सीट पर सपा से रामगोपाल यादव के बेटे और मौजूदा सांसद अक्षय यादव का मुकाबला प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल यादव से है. बीजेपी से डॉक्टर चंद्रसेन जादौन सहित 6 उम्मीदवार मैदान में हैं. कांग्रेस ने इस सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा है. मोदी लहर में भी बीजेपी इस सीट पर 2014 में जीत नहीं सकी थी.

फिरोजाबाद सीट पर जाट, मुस्लिम, दलित और यादवों वोटरों का वर्चस्व है, लेकिन सपा, बसपा गठबंधन और शिवपाल यादव के सियासी संग्राम में उतरने से मुकाबला दिलचस्प बन गया है. हालांकि चाचा-भतीजे के बीच लड़ाई में बीजेपी कमल खिलाने की जुगत में है.

मैनपुरी:

मैनपुरी लोकसभा सीट को सपा का मजबूत गढ़ माना जाता है. सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव एक बार फिर मैनपुरी सीट से उतरे हैं. मुलायम के खिलाफ बीजेपी के प्रेम सिंह शाक्य सहित कुल 12 उम्मीदवार मैदान में हैं. सपा के समर्थन में कांग्रेस ने इस सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है. पिछले आठ लोकसभा चुनाव से सपा लगातार जीत दर्ज कर रही है. बीजेपी का इस सीट पर अभी तक खाता नहीं खुला है. मोदी लहर में भी मुलायम का दुर्ग सुरक्षित रहा.

Advertisement

2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव मैनपुरी और आजमगढ़ दोनों सीट से जीत दर्ज की थी. बाद में उन्होंने मैनपुरी सीट छोड़ दी, उन्होंने आजमगढ़ को अपना संसदीय क्षेत्र चुना. बाद में हुए उपचुनाव में उनके पोते तेजप्रताप सिंह यादव बड़े अंतर से जीत हासिल कर संसद पहुंचे. मुलायम सिंह एक बार फिर मैनपुरी से उतरे हैं और बसपा-आरएलडी-कांग्रेस का उन्हें समर्थन है. ऐसे में बीजेपी के लिए मुलायम के किले को भेदना आसान नहीं है.

एटा:

कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत संभाल रहे राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया एटा लोकसभा सीट से एक बार फिर बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतरे हैं. सपा ने उनके खिलाफ पूर्व सांसद देवेंद्र यादव पर दांव लगाया है. जबकि बाबू सिंह कुशवाहा की जन अधिकार पार्टी से सूरज सिंह मैदान में हैं, जिन्हें कांग्रेस समर्थन कर रही है.

कल्याण सिंह के सियासी प्रभाव वाले एटा में सपा-बसपा और आरएलडी मिलकर बीजेपी के दुर्ग को भेदने की कवायद में है. सपा के देवेंद्र सिंह दलित, मुस्लिम और यादव मतों को एकजुट करने में सफल रहते हैं तो राजवीर के लिए अपनी सीट बचाना बड़ी चुनौती होगी. हालांकि इस सीट पर लोध और शाक्य मतदाताओं की तादाद अच्छी खासी है, जिसके सहारे बीजेपी एक बार फिर से कमल खिलना चाहती है.

Advertisement

बदायूं:

बदायूं लोकसभा सीट पर गठबंधन से सपा के दो बार से सांसद धर्मेंद्र यादव हैट्रिक लगाने उतरे हैं. बीजेपी से योगी सरकार के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य किस्मत आजमा रही हैं और कांग्रेस के पूर्व मंत्री सलीम शेरवानी रण में हैं. 2014 में मोदी लहर के बावजूद सपा के धर्मेंद्र यादव जीतने में सफल रहे थे. हालांकि इस बार का मुकाबला त्रिकोणीय होता नजर आ रहा है.

बदायूं सीट से धर्मेंद्र यादव की राह में सबसे बड़ा सिरदर्द सलीम शेरवानी बन गए हैं. शेरवानी इस सीट से चार बार सांसद रहे हैं. जातीय समीकरण के लिहाज से देखें तो साढ़े चार लाख मुस्लिम, ढाई लाख यादव, तीन लाख दलित, एक लाख जाट, सवा लाख ब्राह्मण, एक लाख मौर्य, एक लाख राजपूत मतदाता हैं. शेरवानी अगर दलित, मुस्लिम और ब्राह्मणों को साधने में सफल रहते हैं तो धर्मेंद्र के लिए हैट्रिक लगाना मुश्किल हो जाएगा. वहीं, संघमित्रा मौर्य अपने समाज के साथ-साथ हिंदू मतों को एकजुट करने में लगी हैं.

आंवला:

आंवला लोकसभा सीट पर बीजेपी से मौजूदा सांसद धर्मेंद्र कश्यप, गठबंधन की ओर से बसपा के रुचिविरा और कांग्रेस से कुंवर सर्वराज सिंह सहित 14 उम्मीदवार मैदान में है. रुचिविरा बिजनौर की रहने वाली हैं उनके लिए ये क्षेत्र पूरी तरह से नया है. ऐसे में उनकी राह में बाहरी होना सबसे बड़ी बाधा बन रही है.

Advertisement

वहीं सर्वराज सिंह इस सीट से सांसद रह चुके हैं और सपा छोड़कर कांग्रेस से चुनावी मैदान में उतरे हैं. इसके अलावा धर्मेंद्र कश्यप इस इलाके से आते हैं और हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय में काफी अच्छी पकड़ है. इस तरह आंवला का सियासी संग्राम त्रिकोणीय मुकाबला होता नजर आ रहा है. आंवला के जातीय समीकरण को देखें तो सबसे ज्यादा साढ़े तीन लाख दलित, डेढ़ लाख राजपूत, एक लाख ब्राह्मण, डेढ़ लाख यादव, एक लाख जाट, एक लाख लोध और ढाई लाख मुस्लिम मतदाता हैं.

बरेली:

बरेली लोकसभा सीट से बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद संतोष गंगवार को चुनावी मैदान में उतारा है. जबकि कांग्रेस से प्रवीण सिंह ऐरन और सपा से भगवत शरण गंगवार चुनाव मैदान में उतरे हैं. पिछले तीन दशक से इस सीट पर बीजेपी का एकछत्र राज रहा है. संतोष कुमार गंगवार सात बार इस सीट से चुनावी जंग फतह कर चुके हैं, इसीलिए सपा ने भगवत शरण गंगवार पर दांव खेला है, लेकिन इस सीट पर सपा कभी जीत नहीं सकी है.

बरेली के जातीय समीकरण को देखें सबसे ज्यादा पांच लाख मुस्लिम, साढ़े तीन लाख कुर्मी, तीन लाख कुर्मी, सवा लाख राजपूत, सवा लाख ब्राह्मण और दो लाख वैश्य मतदाता हैं. कांग्रेस के प्रवीण ऐरन 2009 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल कर चुके हैं. ऐसे में एक बार फिर मुस्लिम और वैश्य समीकरण के जरिए एक बार फिर गंगवार को मात देना चाहते हैं.

Advertisement

पीलीभीत:

पीलीभीत लोकसभा सीट बीजेपी के 'गांधी' की परंपरागत सीट मानी जाती है. इस सीट पर पिछले तीन दशक से इंदिरा गांधी के दूसरे बेटे संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी और बेटे वरुण गांधी का ही राज रहा है. बीजेपी ने पीलीभीत सीट से वरुण गांधी को एक बार फिर उतारा है. सपा ने इस सीट पर हेमराज वर्मा को उतारा है. कांग्रेस ने इस सीट को कृष्णा पटेल की अपना दल को दे रखा है. पीलीभीत सीट पर बीजेपी बनाम सपा की सीधी लड़ाई होती नजर आ रही है.

चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए सब्सक्राइब करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़लेटर

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement