कलबुर्गी हत्या की जांच में देरी का विरोध करते हुए छह लेखकों ने लौटाए पुरस्कार

कन्नड़ चिंतक एमएम कलबुर्गी के हत्यारों की गिरफ्तारी में देर होने से दुखी छह कन्नड़ लेखकों ने अपने पुरस्कार कन्नड़ साहित्य परिषद को लौटा दिए. कलबुर्गी की 30 अगस्त को उनके आवास पर अज्ञात लोगों ने नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी थी.

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एमएम कलबुर्गी एमएम कलबुर्गी

aajtak.in

  • बेंगलुरु,
  • 03 अक्टूबर 2015,
  • अपडेटेड 12:10 AM IST

कन्नड़ चिंतक एमएम कलबुर्गी के हत्यारों की गिरफ्तारी में देर होने से दुखी छह कन्नड़ लेखकों ने अपने पुरस्कार कन्नड़ साहित्य परिषद को लौटा दिए. कलबुर्गी की 30 अगस्त को उनके आवास पर अज्ञात लोगों ने नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी थी.

हत्यारों की गिरफ्तारी में देर होने से दुखी
कन्नड़ साहित्य परिषद् के अध्यक्ष पुंडलिक हलाम्बी ने बताया, ‘ सभी छह बेंगलुरू मेट्रोपोलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन अरालू साहित्य पुरस्कार विजेताओं ने अपने पुरस्कार लौटा दिए हैं. कलबुर्गी के हत्यारों की गिरफ्तारी में देर होने से दुखी होकर उन्होंने अपने पुरस्कार लौटाए.’

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सीबीआई को सौंपी जाएगी जांच
उनकी हत्या से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर तूफान खड़ा हो गया. पुलिस को अब भी हत्यारों और उनकी मंशा के बारे में पता नहीं चल पाया है, जबकि वे दक्षिणपंथी कट्टर तत्वों की संदिग्ध भूमिका की जांच कर रहे हैं. सीआईडी मामले की जांच कर रही है और सरकार ने घोषणा की है कि जांच सीबीआई को सौंपी जाएगी.

वीरन्ना मादीवलार, टी. सतीश जावड़े गौड़ा, संगमेश मीनासिनाकाई, हनुमंत हालिगेरी, श्रीदेवी वी. अलूर और चिदानंद साली को 22 नवम्बर 2011 को एक समारोह में पुरस्कार सौंपा गया था, जहां कलबुर्गी को प्रतिष्ठित नृपतुंगा प्रशस्ति से नवाजा गया था.

राज्य सरकार पर दबाव बनाने का तरीका
पुरस्कार लौटाने के निर्णय से पहले जावड़े गौड़ा ने कहा था, ‘ अपराधियों को पकड़ने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाने का यह एक तरीका है.’ हलाम्बी ने कहा कि युवा लेखकों ने विरोधस्वरूप अपने पुरस्कार लौटा दिए और प्रगतिशील लेखक के हत्यारों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की.

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परिषद को पुरस्कार लौटाना निराशाजनक
उन्होंने कहा, ‘ पहले मैंने पुरस्कार वापस लेने से इंकार कर दिया और कहा कि परिषद को पुरस्कार लौटाना निराशाजनक है, जिसने युवा लेखकों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार दिए थे.’ हलाम्बी ने कहा कि उन्होंने लेखकों से कहा कि पुरस्कार लौटाने के बजाए उचित होगा कि पहले वे सरकार से बात करें और उनसे जांच में तेजी लाने और हत्यारों की गिरफ्तारी का आग्रह करें, लेकिन वे नहीं माने.

हलाम्बी ने कहा, ‘ अंतत: मुझे उनके आग्रह को स्वीकार करना पड़ा.’ जिन लेखकों ने पुरस्कार लौटाए उनके साथ वरिष्ठ कन्नड़ लेखक चंद्रशेखर पाटिल (चम्पा) भी थे, जिन्होंने अपने निकट सहयोगी कलबुर्गी की हत्या के खिलाफ पम्पा पुरस्कार लौटा दिया था.

एक अन्य कन्नड़ लेखक को धमकी
हाल में एक अन्य कन्नड़ लेखक केएस भगवान और कुछ अन्य दक्षिणपंथी कट्टर तत्वों के निशाने पर आए थे, जिन्होंने उन पर जानबूझकर हिंदुत्व और उनके भगवानों के खिलाफ ‘आक्रामक टिप्पणी’ करने के आरोप लगाए. लेखकों को धमकी के बाद उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई गई है.

कलबुर्गी मामले में जांच जारी है और पुलिस महाराष्ट्र में नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे जैसे कार्यकर्ताओं की हत्या से भी इसे जोड़कर देख रही है.

इनपुट- भाषा

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