हनीप्रीत को खोजने वाले रिपोर्टर से जानिए पूरी कहानी, ऐसे कैमरे तक पहुंची एंजेल

हनीप्रीत को एक तरफ देश की कई एजेंसियां तलाश कर रही थीं, तो वहीं हरियाणा पुलिस के साथ ही लगभग आधे देश की पुलिस भी इसी काम में जुटी थी. पूरे देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में कई लोगों की नजर सिर्फ हनीप्रीत के पकड़े जाने पर लगी थी. पुलिस से पहले हनीप्रीत को अगर किसी ने खोजा तो वह था सिर्फ आज तक.

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हनीप्रीत का इंटरव्यू करने के दौरान सतेंदर से मोबाइल फोन भी ले लिए गए थे हनीप्रीत का इंटरव्यू करने के दौरान सतेंदर से मोबाइल फोन भी ले लिए गए थे

परवेज़ सागर / सतेंदर चौहान

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  • 05 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 2:38 PM IST

हनीप्रीत को एक तरफ देश की कई एजेंसियां तलाश कर रही थीं, तो वहीं हरियाणा पुलिस के साथ ही लगभग आधे देश की पुलिस भी इसी काम में जुटी थी. पूरे देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में कई लोगों की नजर सिर्फ हनीप्रीत के पकड़े जाने पर लगी थी. पुलिस से पहले हनीप्रीत को अगर किसी ने खोजा तो वह था सिर्फ आज तक.

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हनीप्रीत से मिला समय

आजतक के संवाददाता सतेंदर चौहान लगभग पिछले 15 दिनों से को खोजने में लगे हुए थे. कई ऐसे मौके आए जहां वह हनीप्रीत तक पहुंच तो गए थे लेकिन हनीप्रीत से मिल नहीं पाए. आखिरकार मेहनत रंग लाई और एक सूत्र के माध्यम से हनीप्रीत से मिलना तय हुआ.

सुनसान इलाके में बुलाया

हनीप्रीत के करीबी एक शख्स ने हनीप्रीत से मुलाकात करवाने के लिए कई शर्ते रखी, जिसे हमारे रिपोर्टर ने मान लिया. रात के अंधेरे में चंडीगढ़ के एक सुनजान इलाके में आज तक के संवाददाता सतेंदर चौहान और कैमरामैन मनोज सांगवान को पहुंचने के लिए कहा गया.

मोबाइल फोन ले लिए गए

दोनों लोग वहां पहुंच गए. तभी एक गाड़ी में दो शख्स आए. उन्होंने पूछा क्या आप आजतक से हैं. सतेंदर ने हां कहा तो उन्होंने दोनों लोगों को उनकी गाड़ी में आने के लिए कहा. गाड़ी में बैठते ही हमारे मोबाइल फोन ले लिए गए और उन्हें स्विचऑफ कर दिया गया. इसके बाद हमारे रिपोर्टर और कैमरामैन के चेहरे गर्दन तक एक कपड़े से ढक दिए गए.

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45 मिनट बाद हाइवे पर रुकी कार

उनसे कहा गया कि आप इधर-उधर न देखें और गर्दन झुका कर बैठे रहें. उन दोनों ने ऐसा ही किया. तकरीबन 45 मिनट तक सफर करने के बाद हाईवे पर गाड़ी रुकी. उन दोनों के चेहरे से कपड़े हटा दिए गए. वहां पर दो गाड़ियां पहले से खड़ी हुई थीं. उन गाड़ियों के आसपास तकरीबन 6 से 7 लोग खड़े हुए थे.

हनीप्रीत से गाड़ी में मुलाकात

वहां उन लोगों ने हमारे रिपोर्टर सतेंदर और कैमरामैन मनोज को एक गाड़ी में बैठी हनीप्रीत से मिलवाया. हमारी टीम ने हनीप्रीत से गाड़ी से बाहर आने का आग्रह किया. मगर हनीप्रीत ने साफ मना कर दिया. इसके बाद रिपोर्टर और कैमरामैन को गाड़ी में बैठने के लिए कहा गया. वे गाड़ी में बैठ गए.

हनीप्रीत ने पूछा- क्या ये लाइव है

सबसे पहले हनीप्रीत ने रिपोर्टर सतेंदर और कैमरामैन से किया कि वे उनसे क्या पूछना चाहते हैं. सतेंद्र चौहान ने कहा जो इस समय चल रहा है, वे उन्ही मुद्दों पर बात करेंगे. हनी ने पूछा कि क्या यह लाइव होगा. हमार टीम ने कहा नहीं. अभी हम सिर्फ रिकॉर्ड करेंगे.

इंटरव्यू के बाद बोली हनीप्रीत- कब छूटेगा पीछा

इसके बाद इंटरव्यू का सिलसिला शुरू हुआ. हनीप्रीत ने बेहद सधे हुए एक एक्सपर्ट की तरह सतेंद्र के सवालों के जवाब दिए. कई सवालों के जवाब उसने बड़ी चालाकी के साथ टाल भी दिए. बीच-बीच में हनीप्रीत जवाब देते हुए रोती भी रही और जब इंटरव्यू खत्म हुआ तो हनीप्रीत ने उनसे पूछा कि इस मुसीबत से कब तक पीछा छूट जाएगा.

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वापस लाकर चंडीगढ़ छोड़ा

इंटरव्यू खत्म होने के बाद ठीक पहले की तरह हमारे रिपोर्टर और कैमरामैन का चेहरा कपड़े से ढक दिया गया. और जैसे उन्हें वहां ले जाया गया था, वैसे ही उन्हें वापस चंडीगढ़ में उसी जगह पर छोड़ दिया गया, जहां से उन्हें गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया था. वहीं पर सतेंदर चौहान और मनोज के मोबाइल फोन भी वापस कर दिए गए.

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