eAgenda: गहलोत बोले- रोजाना 25 हजार टेस्ट का लक्ष्य, पानी की समस्या के लिए की तैयारी

राजस्थान में गर्मी के सीजन में आने वाली पानी की समस्या को लेकर अशोक गहलोत का कहना है कि इस बार खास तैयारी की गई है और हर तरह के संकट से निपटने की तैयारी है.

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 मई 2020,
  • अपडेटेड 2:47 PM IST

  • E-Agenda में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
  • गर्मी में पानी की समस्या को लेकर खास तैयारी
  • राजस्थान में 25 हजार टेस्ट रोज करने का लक्ष्य

कोरोना वायरस महामारी का संकट इस वक्त देश के अधिकतर हिस्से में है. राजस्थान में भी इसका असर देखने को मिल रहा है, लेकिन गर्मी के सीजन की वजह से यहां कई अन्य तरह की समस्याएं भी आती हैं जिसमें पानी की मुश्किल भी शामिल है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि हमने पानी की समस्या को लेकर एक महीने पहले से ही काम शुरू कर दिया.

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अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान में गर्मी, सूखा काफी रहता है. हमने एक महीने पहले से ही हैंडपंपों को ठीक करवाना शुरू किया, अलग-अलग इलाकों में टैंकर भेजना शुरू कर दिया गया. स्थानीय प्रशासन को इसके लिए पूरी ताकत दी गई है.

राजस्थान में बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग को लेकर अशोक गहलोत ने कहा कि हमने धर्मगुरुओं को बुलाया और उनसे कोरोना वायरस को लेकर बात की. सभी को बताया गया कि अपने अनुयायी को समझाना जरूरी है, ऐसे में सैंपल लेने के वक्त धर्मगुरुओं को साथ में भी भेजा गया.

मुख्यमंत्री बोले कि हम पहले सिर्फ पुणे और दिल्ली में टेस्टिंग करते थे, अब हम 10 हजार टेस्ट रोज कर रहे हैं. हमारा लक्ष्य 25 हजार टेस्ट रोजाना करने का है. अशोक गहलोत ने बताया कि अमेरिका में टेस्टिंग की नई तकनीक आई है, जिसको हम जोधपुर और जयपुर के लिए ला रहे हैं.

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बहुचर्चित भीलवाड़ा मॉडल को लेकर उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा में हमने हर घर में स्क्रीनिंग करने का काम किया, 14 हजार लोग ऐसे थे जिनमें इस तरह के लक्षण थे, बाद में उन्हें क्वारनटीन किया गया. इसी के साथ ही हमने हर डॉक्टर को कहा है कि अगर किसी में खांसी-बुखार का लक्षण दिखता है, तो उनका नाम नोट कर लें, ताकि उनकी मदद की जा सके.

अशोक गहलोत बोले कि हमारी ओर से कई मेडिकल वैन गांव-गांव में घूम रहे हैं, अगर कोई लक्षण मिलता है तो स्थानीय मेडिकल प्रशासन को सूचित किया जाता है. मामलों की संख्या जरूर बढ़ रही है, लेकिन वो हर जगह ही ऐसा हो रहा है.

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