दो राज्यों के विधानसभा चुनाव ने दो नए नेताओं को जन्म दिया है. एक विरासत की सियासत को आगे बढ़ाने के लिए अपनी पारी का आगाज कर चुके हैं, तो दूसरे ने परिवार से बगावत कर अपना अलग राजनीतिक रास्ता तैयार कर लिया है. सियासत के ये दो शहजादे आदित्य ठाकरे और दुष्यंत चौटाला हैं. दुष्यंत चौटाला जहां हरियाणा में किंगमेकर की भूमिका में आ गए हैं, वहीं आदित्य ठाकरे को शिवसेना महाराष्ट्र का किंग बनाने की जुगत में है.
महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव के नतीजे गुरुवार को घोषित किए गए हैं. हरियाणा में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला है. सबसे बड़े दले के रूप में उभरी भारतीय जनता पार्टी को 40 सीटें मिली हैं और कांग्रेस 31 पर सिमट गई है. यानी इन दोनों प्रमुख दलों में से कोई भी सरकार बनाने के लिए अपने दम पर सीटें हासिल नहीं कर पाया है. ऐसी स्थिति में 10 सीटें जीतने वाली जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) की भूमिका सबसे अहम हो गई है और उसके नेता दुष्यंत चौटाला किंगमेकर बनने की भूमिका में आ गए हैं.
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परिवार से बगावत कर बनाया अपना रास्ता
चौधरी देवीलाल की सियासी विरासत को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के बेटों में जंग छिड़ गई तो इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) की कमान छोटे बेटे अभय चौटाला के हाथ में आ गई. दिसंबर 2018 में चौटाला परिवार में पनपे मनमुटाव के बाद दुष्यंत अलग हो गए और अपनी अलग पार्टी जननायक जनता पार्टी का गठन कर लिया. नई नवेली पार्टी के दम पर दुष्यंत पूरे हरियाणा में घूमे और राज्य की सभी 90 सीटों पर अपनी पार्टी के प्रत्याशी उतारे. दुष्यंत को जनता का समर्थन मिला और जेजेपी 10 सीटें जीत गईं. जबकि दूसरी तरफ INLD बस एक सीट ही जीत पाई. यानी परिवार की सियासी विरासत न मिलने के बाद बगावत कर दुष्यंत ने अपना अलग सियासी सफर तय कर लिया है.
किंग बनने की रेस में आदित्य ठाकरे?
एक तरफ दुष्यंत चौटाला हैं तो इस चुनाव में एक और सबसे चर्चित युवा चेहरा आदित्य ठाकरे हैं. दुष्यंत परिवार से बगावत कर अलग राह पर निकले हैं तो आदित्य ने चुनाव लड़कर ठाकरे परिवार की परंपरा को ही बदल दिया है. शिवसेना के 53 साल के इतिहास में न पार्टी के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे ने कभी चुनाव लड़ा और उनके वारिस उद्धव ठाकरे. लेकिन पारिवारिक राजनीति संभालने का मौका जब आदित्य के पास आया तो उन्होंने अतीत को भुला दिया और चुनाव मैदान में उतर गए. आदित्य वर्ली सीट से चुनाव जीत भी गए हैं और अब चर्चा उनके मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री बनने को लेकर है.
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शिवसेना ने तरेरी आखें
महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के लिए जिस तरह के नतीजे आए हैं, उसके बाद से ही उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी के तेवर अलग नजर आ रहे हैं. शिवसेना पूरी शिद्दत से इस बात को आगे रख रही है कि सरकार बनने की स्थिति में पूर्वनिर्धारित 50-50 फॉर्मूले पर अमल करना जरूरी होगा, जिसके तहत सरकार में बराबर की भागीदारी पर सहमति बनी थी. इस आधार पर शिवसेना की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भी बताई जा रही है. खुद उद्धव ठाकरे ने चुनाव नतीजों के बाद कहा कि यह एक अहम मसला पर जिस पर चर्चा होगी. साथ ही वो नतीजों से पहले कहते रहे हैं कि एक दिन शिवसेना का सीएम जरूर होगा, ये वादा उन्होंने बाला साहेब ठाकरे से किया था. ऐसे में शिवसेना इस मौके जरूर भुनाना चाहेगी और अगर ऐसे समीकरण बनते हैं तो निश्चित ही आदित्य ठाकरे किसी बड़ी भूमिका में नजर आ सकते हैं.
इस तरह महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव ने इन दोनों राज्यों में दो नए और युवा नेता दे दिए हैं, जिनका भविष्य मौजूदा परिस्थितयों में उज्ज्वल नजर आ रहा है.
जावेद अख़्तर