महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जनता ने बहुमत देकर भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना को एक बार फिर सरकार बनाने का मौका जरूर दिया है, लेकिन यह चुनाव राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और उसके प्रमुख शरद के लिए सबसे खास रहा है. एनसीपी की सीटों में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है, जिसने उसे सियासी तौर पर तो मजबूत किया ही, साथ ही गठबंधन में कांग्रेस के 'बड़े भाई' के रूप में भी स्थापित कर दिया है. एनसीपी के ग्राफ में यह वृद्धि ऐसे वक्त में हुई है जब कई मोर्चों पर उसे कमजोर करने की कोशिश हुई. बीजेपी ने सीधे तौर पर जहां शरद पवार को टारगेट पर लिया, वहां उसके दो दर्ज से ज्यादा नेताओं व विधायकों को अपने पाले में लाकर कमर तोड़ने का काम किया.
गुरुवार को चुनाव नतीजे आने के बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बयान में इसके संकेत भी मिले. पवार ने कहा कि यह नतीजे दिखाते हैं जनता ने सत्ता के गुरूर को पसंद नहीं किया है. इससे पहले भी एनसीपी की तरफ से ऐसे बयान दिये जाते रहे हैं. जब को-ऑपरेटिव बैंक मामले में शरद पवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई तो ईडी के इस कदम को बीजेपी की बदले की राजनीति से जोड़कर देखा गया. एनसीपी नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाए बीजेपी पर सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगाए और चुनावी रैलियों में इसे मुद्दा भी बनाया.
शरद पवार ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को मजबूती के तौर पर इस्तेमाल किया. महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे बड़े नेता के रूप में पहचान रखने वाले शरद पवार ने पूरे राज्य में ताबड़तोड़ रैलियां कीं. पवार ने 60 से ज्यादा सभाएं कीं. यहां तक कि सतारा में तो शरद पवार मूसलाधार बारिश में भी नहीं रुके और भीगते-भीगते भाषण दिया.
बीजेपी ने जमकर बनाया परिवार को निशाना
एक तरफ जहां पवार जनता के बीच जाकर स्थानीय मुद्दों पर बात करते रहे और महाराष्ट्र के किसानों और सूखे की समस्या को उठाते रहे. वहीं, बीजेपी का नेतृत्व धारा 370 जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए पवार के परिवार को निशाना बनाता रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी रैलियों में कांग्रेस के बहाने एनसीपी और शरद पवार को सबसे ज्यादा निशाने पर लिया. मोदी अपने भाषणों में लगातार पवार पर परिवार की सियासत करने और कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्ट्र को बर्बाद करने के आरोप लगाते रहे. लेकिन शरद पवार नहीं रुके और बीजेपी पर हर मुद्दे का जवाब 370 से देने का आरोप लगाते हुए फडणवीस सरकार की विफलताओं को जनता के सामने रखते रहे.
एनसीपी को हुआ सबसे ज्यादा फायदा
पवार का यह तरीका जनता ने पसंद भी किया और इसका सबूत नतीजों में दिखाई दिया. एनसीपी ने 2014 में 41 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिससे बढ़कर अब पार्टी के 54 प्रत्याशी जीतकर आए हैं. जबकि कांग्रेस को महज 2 (42 से बढ़कर 44 हुईं) सीटों का फायदा हुआ है. वहीं, सत्ताधारी बीजेपी और शिवसेना की बात की जाए तो दोनों को ही 2014 के चुनाव के मुकाबले नुकसान उठाना पड़ा है. बीजेपी 122 से घटकर 105 और शिवसेना 63 से घटकर 56 पर आ गई है. यानी महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में अगर किसी पार्टी को सबसे ज्यादा लाभ मिला है, तो वह एनसीपी है और इसकी इकलौता वजह शरद पवार हैं.
एनसीपी प्रवक्ता संजय टटकरे ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी की इस जीत से साबित होता है कि शरद पवार का करिश्मा कायम है और यह चुनाव शरद पवार द्वारा लड़ी गई लड़ाई के लिए याद किया जाएगा.
लिहाजा, यह माना जा सकता है कि बीजेपी ने जितना ज्यादा पवार को निशाना बनाया, वो उतने ही मजबूत होकर उभरे और चुनाव में अपना करिश्मा कायम करने में कामयाब रहे.
जावेद अख़्तर