नोटबंदीः BJP के लिए वोटबंदी या वोट का ATM?

पीएम मोदी ने 8 नवंबर को नोटबंदी के फैसले का ऐलान किया था. विपक्ष ने इसे जनता के खिलाफ फैसला बताते हुए संसद से लेकर सड़क पर खूब हंगामा किया. विपक्ष को इससे चुनावों में फायदा मिलने की बात लगातार कही गई लेकिन हाल में हुए चुनावों के नतीजे ठीक इसके उलट दिखते हैं. नोटबंदी के बाद जितने भी निकाय चुनाव या उपचुनाव हुए हैं उसमें बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है. देखते हैं नोटबंदी बीजेपी के लिए हानिकारक रही या फिर वोट का एटीएम साबित हुई.

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नरेंद्र मोदी नरेंद्र मोदी

संदीप कुमार सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 24 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 9:13 AM IST

पीएम मोदी ने 8 नवंबर को नोटबंदी के फैसले का ऐलान किया था. विपक्ष ने इसे जनता के खिलाफ फैसला बताते हुए संसद से लेकर सड़क पर खूब हंगामा किया. विपक्ष को इससे चुनावों में फायदा मिलने की बात लगातार कही गई लेकिन हाल में हुए चुनावों के नतीजे ठीक इसके उलट दिखते हैं. नोटबंदी के बाद जितने भी निकाय चुनाव या उपचुनाव हुए हैं उसमें बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है. देखते हैं नोटबंदी बीजेपी के लिए हानिकारक रही या फिर वोट का एटीएम साबित हुई. हालांकि, अभी पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव जारी हैं और नतीजों के बाद इसका असली असर सामने आएगा.

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बीएमसी में रिकॉर्ड प्रदर्शन
महाराष्ट्र में हुए निकाय चुनावों में विपक्षी दलों को उम्मीद थी कि नोटबंदी की मार बीजेपी पर पड़ेगी और उनकी सियासी किस्मत खुलेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. यहां तक कि बीजेपी से अलग चुनावी मैदान में उतरी शिवसेना ने नोटबंदी को लेकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. लेकिन नतीजा बीजेपी के लिए उत्साहित कर देने वाला आया. भले ही 84 सीटों के साथ शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन बीजेपी ने पिछली बार के 31 सीटों से बढ़ाकर अपनी सीटें 82 कर ली. इसके साथ ही पार्टी ने महाराष्‍ट्र के निगम चुनावों में नौ में से आठ प्रमुख नगरपालिकाओं में भी जीत दर्ज की है. बीजेपी का दावा है कि नोटबंदी से उसे नुकसान नहीं फायदा ही हुआ.

गुजरात लोकल बॉडी चुनाव में परचम
नोटबंदी के बाद हुए गुजरात निकाय चुनाव में भी बीजेपी जीत का परचम लहराने में कामयाब रही. बीजेपी ने करप्शन के मुद्दे के उछाला और 123 में से 107 सीटें जीतकर विपक्ष को करारा जवाब दिया.

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चंडीगढ़ में 20 साल बाद बहुमत
नोटबंदी को लेकर संसद और सड़क पर चल रहे घमासान के बीच चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में भी बीजेपी की जीत का सिलसिला जारी रहा. BJP को 20 साल बाद बहुमत मिला और 26 में से 20 सीटें जीतकर नोटबंदी के विरोध को बीजेपी ने धत्ता बता दिया.

ओडिशा में भी अलग ही दिखा परिणाम
14 फरवरी को ओडिशा में स्थानीय निकायों के चुनाव नतीजों में बीजेपी के प्रदर्शन ने सबको चौंका दिया. पहले चरण के चुनाव में बीजेपी सत्तारूढ़ बीजू जनता दल के बाद दूसरे नंबर पर आई और उसने कांग्रेस को तीसरे नंबर पर धकेल कर प्रमुख विपक्षी दल का स्थान ले लिया.

राजस्थान में मिला फायदा
नवंबर में राजस्थान में भी 24 पंचायत समिति सीटों के लिए उपचुनाव हुए और बीजेपी ने 12 सीटें जीतकर जलवा कायम रखा.

उपचुनाव में भी नहीं दिखा असर
नवंबर में नोटंबदी के बाद 7 राज्यों की 14 सीटों पर उपचुनाव हुए थे. इनमें से मध्य प्रदेश, असम और अरुणाचल प्रदेश की सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया. मध्य प्रदेश में शहडोल लोकसभा सीट और नेपानगर विधानसभा सीट, अरुणाचल में ह्यूलांग विधानसभा सीट और असम में लखीमपुर लोकसभा सीट और बैठलांसो विधानसभा सीट पर बीजेपी ने जीत दर्ज की.

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जीत के जश्न की तैयारी में बीजेपी
महाराष्‍ट्र निकाय चुनावों में शानदार प्रदर्शन और पिछले दिनों ओडिशा निकाय चुनावों में अपनी दमदार उपस्थिति दिखाने के बाद बीजेपी इस कामयाबी का जश्‍न मनाने जा रही है. इस कामयाबी को यूपी में भी भुनाने की तैयारी है. इस कड़ी में बीजेपी ने ऐलान किया है कि वह 25 फरवरी को विजय दिवस के रूप में पूरे देश में इस जीत का जश्‍न मनाएगी. इसके तहत 25 फरवरी देश भर के जिला मुख्‍यालयों में बीजेपी विजय दिवस मनाएगी.

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