बायो मेडिकल कचरे के निष्पाद नहीं करने पर अस्पतालों पर होगी कार्रवाई: सुशील मोदी

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सभी अस्पताल बायो मेडिकल कचरे का समुचित निष्पादन करें, वरना सरकार कार्रवाई के लिए बाध्य होगी. प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने 24 हजार तीन सौ तीन अस्पतालों के सर्वेक्षण के बाद दो हजार 38 अस्पतालों को नोटिस जारी किया है.

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बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी

राम कृष्ण / सुजीत झा

  • पटना,
  • 28 मई 2018,
  • अपडेटेड 7:58 PM IST

बिहार में बायो मेडिकल कचरे का समुचित निष्पादन नहीं करने वाले अस्पतालों को राज्य सरकार ने कड़ी चेतावनी दी है. इस बाबत प्रदूषण नियंत्रण परिषद ने 24 हजार तीन सौ तीन अस्पतालों के सर्वेक्षण के बाद दो हजार 38 अस्पतालों को नोटिस भी जारी किया है.

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सभी अस्पताल बायो मेडिकल कचरे का समुचित निष्पादन करें, वरना सरकार कार्रवाई के लिए बाध्य होगी. प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने 24 हजार तीन सौ तीन अस्पतालों के सर्वेक्षण के बाद दो हजार 38 अस्पतालों को नोटिस जारी किया है.

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उन्होंने कहा कि 10 बेड से ज्यादा के सरकारी अस्पतालों में सरकार 75 हजार से पांच लाख रुपये तक की लागत से ईटीपी लगाएगी. राज्य सरकार सिर्फ नर्सिंग कॉलेज और आई बैंक की स्थापना ही नहीं, बल्कि बायो मेडिकल कचरे के निष्पादन को लेकर भी सचेत है.

वह पटना में स्वास्थ्य विभाग की ओर से योजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन के लिए आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे. सुशील मोदी बिहार के उप मुख्यमंत्री के साथ ही वन एवं पर्यावरण मंत्री भी हैं.

सुशील मोदी ने कहा कि बिहार की राजधानी पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर में बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट की सुविधाएं हैं. पीएमसीएच, कटिहार और किशनगंज में भी इंसुलेटर की व्यवस्था की गई है. फिलहाल इसकी क्षमता 16 टन कचरा निष्पादन की है. गया में जल्द ही एक ट्रीटमेंट प्लांट शुरू हो जाने से क्षमता बढ़कर 22 टन हो जाएगी.

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उन्होंने कहा कि अभी आठ टन बायो मेडिकल कचरे का प्रतिदिन निष्पादन होता है, जबकि 20 टन कचरे को चैराहे या नदियों में फेंक दिया जाता है. उन्होंने निजी क्षेत्र के अस्पतालों से अपील की कि जहां-तहां कचरा नहीं फेंके, वरना उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

सुशील मोदी  ने कहा कि इलैक्ट्रॉनिक कचरा भी गंभीर रूप से स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है. माइक्रोओवेन, मोबाइल और पुरानी टीवी में हैवी मेटल और लीड होता है, जो ग्राउंड वाटर तक को प्रभावित करता है. बिहार में नौ करोड़ मोबाइल सेट हैं. इलेक्ट्रॉनिक सामग्री बनाने वाली कंपनियों की यह जवाबदेही है कि वो अपना एक सेंटर खोलकर इलेक्ट्रॉनिक कचरे को इकट्ठा करें.

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