एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) टिम कुक भारत के दौरे पर हैं. कुक की शनिवार को दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात होगी. भारत में निवेश के साथ-साथ तमाम पहलुओं पर दोनों के बीच चर्चाएं होने की संभावना है. दरअसल कुक सार्वजनकि तौर पर स्वीकार चुके हैं कि वे समलैंगिक हैं और इस बात को लेकर उन्हें गर्व है. इसके साथ ही वे समलैंगिकों के हक को लेकर पिछले कई सालों से अपनी आवाज बुलंद करते आए हैं.
अमेरिका में समलैंगिकता को समान अधिकार
दरअसल अमेरिका में को समान अधिकार मिला हुआ है. लेकिन दूसरे कई देशों में इसको लेकर संघर्ष जारी है. भारत में भी समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाने की मांग सालों से जारी है. फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में है और कोर्ट धारा-377 के खिलाफ दाखिल क्युरिटिव पिटिशंस पर सुनवाई को तैयार हो गया है. जिससे समलैंगिक समुदायों में फिर से इंसाफ की आस जग गई है.
समलैंगिकता के हक में टिम कुक
पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान एप्पल के सीईओ टिम कुक समलैंगिकता को लेकर भारतीय कानून में बदलाव की मांग कर सकते हैं. क्योंकि अमेरिका में समलैंगिकता को आजादी मिली हुई है. कुक पीएम मोदी से समलैंगिकों को लेकर भारत के नजरिये पर भी सवाल उठा सकते हैं और उनसे दिलाने की अपील कर सकते हैं. इसके अलावा कुक कार्यस्थलों पर समलैंगिकों और किन्नर कर्मचारियों के साथ किए जाने वाले भेदभाव का भी मामला भी उठा सकते हैं.
समलैंगिकता पर भारत सरकार का नजरिया
दरअसल भारत में पिछले करीब 155 सालों से समलैंगिकता को अपराध माना जा रहा है. खुद का इतिहास कहता है कि वो धारा-377 के पक्ष में हैं. क्योंकि साल 2013 में बीजेपी के तत्कालिन अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा था कि धारा-377 का वो समर्थन करते हैं. क्योंकि समलैंगिकता भारत में एक अपराध है और भारतीय समाज इसको कतई स्वीकार नहीं करेगा. इसलिए बीजेपी सरकार के नजरिये में धारा-377 को लेकर बदलाव लाना आसान नहीं है. इसके पहले अमेरिका दौरे के दौरान सिलिकन वैली पीएम मोदी की टिम कुक से मुलाकात हुई थी. वहीं दूसरी कुक भारत को एक बेमिसाल देश बताया और कहा कि वह यहां के लोगों के जीने के अंदाज से बेहद प्रभावित हैं.
मामले में क्या हुआ था
इस मामले में 2009 में दिल्ली हाईकोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाने का फैसला दिया था, जिसे केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसने दिसंबर, 2013 में हाईकोर्ट के आदेश को पलटते हुए समलैंगिकता को IPC की धारा 377 के तहत अपराध बरकरार रखा. दो जजों की बेंच ने इस फैसले पर दाखिल पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी थी.
अमित कुमार दुबे