जुर्म की दुनिया में अपराधी हमेशा पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से एक कदम आगे रहने की कोशिश करते हैं. और यही काम आतंकी संगठन भी कर रहे हैं. साल 2015 के दौरान भारत में जहां साइबर अपराधी पुलिस को परेशान करते रहे वहीं आतंकी संगठन भी साइबर क्राइम में पीछे नहीं रहे. आइए जानते हैं इस साल के पांच बड़े साइबर अपराधों के बारे में.
आतंक का ऑनलाइन अभियान
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि आईएसआईएस भारत पर अपनी नापाक नजरें गड़ाए बैठा है. वह इंटरनेट और सोशल मीडिया के सहारे भारत के नौजवानों को बरगला रहा है. उनका ब्रेनवॉश कर उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है. इस साल यह बड़ा खुलासा भारत के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया. आईएसआईएस का यह ऑनलाइन अभियान भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है. पूरे साल सरकार इस परेशानी को दूर करने की कवायद में लगी रही. आईएसआईएस के अलावा अल-कायदा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकी संगठन भी भारत में ऑनलाइन घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं.
डिजीटल हुआ देह व्यापार
कहते हैं जिस्मफरोशी वक्त के साथ-साथ इस पेशे से जुड़े लोगों ने अपने काम का तरीका भी बदल दिया. पूरी दुनिया ने जहां डिजीटल तकनीक के सहारे तरक्की के नए रास्ते खोले वहीं देह व्यापार से जुड़े लोग भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल पर रहे हैं. इस धंधे से जुड़े लोगों के लिए व्हॉटस्एप और ट्वीटर भी बड़े काम के साबित हो रहे हैं. हाल ही में दिल्ली में एक बड़ा खुलासा हुआ, जिसमें पता चला कि एस्कॉर्ट उपलब्ध कराने वाली कई एजेंसियां अपनी वेबसाइट बनाकर या सोशल मीडिया के सहारे अपने ग्राहकों को भारतीय और विदेशी लड़कियां परोस रही हैं. लेकिन सारी प्रकिया ऑनलाइन हो जाने की वजह से इन लोगों को पकड़ने में पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है.
साइबर क्राइम का गढ़ जामताड़ा
साइबर क्राइम के मामले में झारखंड का आदिवासी बहुल इलाका जामताड़ा देश का नंबर एक जिला बन चुका है. देश के किसी भी कोने में जब भी साइबर ठगी होती है, तो 80 फीसदी मामलों में जामताड़ा के करमाटांड़ का नाम जरूर आता है. अपराधियों की मोबाइल लोकेशन वहीं की आती है. यहां बैठे साइबर अपराधी पूरे देश में ठगी करते हैं. पिछले ढाई महीने में 7 राज्यों की पुलिस यहां 21 बार छापेमारी कर चुकी है. यहां के मनी हैकर पूरे देश के लिए चुनौती बने हुए है. जानकारी के मुताबिक, आदिवासी बहुल जामताड़ा में भोले-भाले आदिवासियों के बीच अपनी पैठ बनाकर कुछ शातिर साइबर ठगों ने ऐसा जाल बुना, जिसने इसे साइबर क्राइम के मामले में देश का अव्वल जिला बना दिया है. इस मामले में कई किशोर अपराधी भी पुलिस के हाथ लगे हैं. 12वीं से भी कम पढ़े लिखे ये युवा अपराधी इतने सलीके से बात करते हैं कि ठगी के शिकार बनने वाला इनको पहचान ही नहीं पाता.
झगड़े का कारण बनी सोशल मीडिया
सोशल मीडिया पर की जाने वाली कई टिप्पणी आए दिन पुलिस प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बन जाती हैं. साल 2015 में भी ऐसे कई मामले सामने आए जब सोशल मीडिया बनकर सामने आया. कई असामाजिक तत्वों ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन एप्प का इस्तेमाल समाज में नफरत फैलाने के लिए किया. उदाहरण के तौर पर आगरा की घटना को ही लें, जहां फेसबुक पर की गई धार्मिक टिप्पणी के कारण शमशाबाद कस्बे में दो समुदायों के बीच हिंसा भड़क उठी थी. एक समुदाय ने उस टिप्पणी को पक्षपातपूर्ण और भड़काऊ मानकर विरोध किया और हिंसा भड़क उठी. सोशल मीडिया में आपत्तिजनक पोस्ट करने के कई मामले इस साल सामने आए. कई शहरों में इस तरह की घटनाएं सुर्खियां बनी जहां सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन गया.
साइबर अपराधी का शिकार बने महेश भट्ट
देश के जाने माने फिल्मकार महेश भट्ट भी साइबर अपराधियों का शिकार हो गए. किसी ने उनका एक फर्जी फेसबुक अकाउंट बना डाला. और उसके माध्यम से फिल्म में कास्टिंग करने जैसी बातें प्रचारित की. लेकिन जल्द इस बात की जानकारी महेश भट्टे को मिल गई और उन्होंने प्रशंसकों को अपने फर्जी फेसबुक अकाउंट से सचेत किया. उन्होंने उनका फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाने वालों को चेतवानी देते हुए कहा था कि वे इसकी शिकायत मुंबई पुलिस के साइबर सेल से करेंगे. उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था कि झूठे खाताधारक सावाधान! यह फर्जी खाता है. इसके बारे में मुंबई पुलिस की साइबर सेल को सूचित किया जाएगा. उन्होंने अपने फर्जी फेसबुक अकाउंट का स्क्रीन-शॉट शेयर करते हुए असली अकाउंट के बारे में भी बताया था. बाद में मामला पुलिस के साइबर सेल में दर्ज किया गया.
परवेज़ सागर