मुश्किलों से गुजरीं मीराबाई, बोलीं- ट्रक से ट्रेनिंग करने इम्फाल जाना पड़ता था

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाडियों का प्रदर्शन काफी शानदार रहा. वेटलिफ्टर मीराबाई अद्भुत प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीतने में कामयाब रहीं. वह ओलंपिक खेलों में वेटलिफ्टिंग में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय खिलाड़ी हैं.

Advertisement
Mirabai Chanu (Getty) Mirabai Chanu (Getty)

अंजना ओम कश्यप

  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 2:13 PM IST
  • आजतक के खास कार्यक्रम 'जय हो' में शामिल हुईं मीराबाई
  • ओलंपिक और अपने करियर के बारे में विस्तार से चर्चा की

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाडियों का प्रदर्शन काफी शानदार रहा. वेटलिफ्टर मीराबाई चनू अद्भुत प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीतने में कामयाब रहीं. मीराबाई ओलंपिक खेलों में वेटलिफ्टिंग में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय खिलाड़ी हैं. इससे पहले कर्णम मल्लेश्वरी ने सिडनी ओलंपिक में भारोत्तोलन में कांस्य पदक दिलाया था. आजतक के खास कार्यक्रम 'जय हो' में मीराबाई ने टोक्यो ओलंपिक और अपने करियर के बारे में विस्तार से चर्चा की. 

Advertisement

रियो के बाद दो साल घर से दूर रही: मीराबाई

मीराबाई का यहां तक का सफर चुनौतीपूर्ण रहा है. मीराबाई ने कहा, 'शुरुआत में मुझे काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. रियो के बाद टोक्यो ओलंपिक के लिए मैंने पांच साल मेहनत की थी. रियो ओलंपिक में फेल हो गई थी, जिसके बाद मैंने टोक्यो ओलंपिक में मेडल जीतने का संकल्प लिया था. मैंने अपने ट्रेनिंग में बदलाव किए और दो साल तक घर नहीं गई. एशियन चैम्पियनशिप के बाद मेरा आत्मविश्वास बढ़ा हुआ था और मेरा पूरा फोकस अपने टारगेट को पूरा करने पर था.'

प्रैक्टिस के लिए काफी दूर जाना पड़ता था

मीराबाई को प्रैक्टिस के लिए अपने घर से काफी दूर जाना पड़ता था, जिसके चलते उन्हें ट्रक पर भी चढ़ना पड़ा. मीराबाई ने इस अनुभव के बारे में कहा, 'मेरा गांव इम्फाल से 23 किलोमीटर दूर है और मुझे ट्रेनिंग के लिए सुबह पांच बजे पहुंचना होता था. सुबह टैक्सी या बस नहीं मिलती थी. उस लाइन में ट्रक काफी चलते रहते हैं. मैं सोचती थी कि ट्रक से चली जाऊं, ताकि जल्दी रिपोर्ट कर सकूं. मैं ट्रक को रोककर लिफ्ट के लिए कहती थी. कभी-कभार मैं साइकिल से भी ट्रेनिंग के लिए चली जाती थी. शुरुआत में मेरी मां ने अपना ख्याल रखने को कहा था. बाद में मां ने भी ट्रक ड्राइवर से मुझे ट्रेनिंग सेंटर पर छोड़ने का आग्रह किया. मेरे एक भाई आर्मी में हैं, जिन्होंने मुझे काफी सपोर्ट किया.' 

Advertisement

क्या है मीराबाई का पसंदीदा डिश?

मीराबाई ने आगे कहा, 'मेरे गांव में लोग खाना बनाने के लिए सालभर के लिए लकड़ी इकट्ठा करके रख लेते हैं. मैं दूसरों से ज्यादा लकड़ियां उठाया करती थी, पता नहीं ये मेरे अंदर पहले से ही था. इसी चलते सबको लगा होगा कि मेरे अंदर करने की कुछ ललक है. मैं ट्रेनिंग में काफी फोकस करती हूं. मेरा पसंदीदा खाना इरोम्बा है, जोकि काफी स्पाइसी डिश है. ट्रेनिंग के चलते मुझे इस डिश से भी दूर रहना पड़ता था. आप सब जानते हो, मुझे पिज्जा खाना भी काफी पसंद है.'

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement