'उसे छोड़कर जाना मुश्किल...', सानिया मिर्जा को सताती है बेटे की चिंता, बोलीं- सिंगल पैरेंट होना आसान नहीं

सानिया मिर्जा ने साल 2023 में प्रोफेशनल टेनिस से संन्यास ले लिया था. सानिया की निजी जिंदगी भी उतार-चढ़ाव भरी रही है. सानिया का शोएब मलिक से तलाक हो गया था, जिसके बाद वो अपने बेटे इजहान का अकेले परवरिश कर रही हैं.

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सानिया मिर्जा का मानना है कि सिंगर पैरेंट होना आसान नहीं है. (Photo: instagram/@mirzasania) सानिया मिर्जा का मानना है कि सिंगर पैरेंट होना आसान नहीं है. (Photo: instagram/@mirzasania)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 12:14 PM IST

भारत की दिग्गज टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा की शादी पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से साल 2010 में हुई थी. फिर 23 अप्रैल 2018 को दोनों ने अपने बेटे इजहान का इस दुनिया में स्वागत किया. हालांकि सानिया और शोएब का रिश्ता ज्यादा वक्त तक नहीं चला. साल 2024 में मिर्जा फैमिली की ओर से स्टेंटमेंट जारी कर बताया गया था कि सानिया और शोएब का तलाक हो चुका है. तलाक के बाद शोएब ने पाकिस्तानी अभिनेत्री सना जावेद से शादी कर ली थी.

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शोएब मलिक से तलाक के बाद सानिया मिर्जा अपने बेटे इजहान की अकेले परवरिश कर रही हैं. अब सानिया मिर्जाा ने करन जौहर से बातचीत के दौरान सिंगल मदर होने के अनुभव पर खुलकर बात की. सानिया ने बताया कि अपने बेटे इजहान की परवरिश अकेले करना काफी मुश्किल है, खासकर तब जब वह लगातार काम और यात्राओं में व्यस्त रहती हैं.

सानिया मिर्जा ने कहा, 'मेरे लिए सिंगल पैरेंटिंग बहुत कठिन है, क्योंकि हम काम करते हैं और कई अलग-अलग चीजें संभालनी पड़ती हैं.' करण जौहर ने कहा कि सिंगल जिंदगी कभी-कभी आजाद महसूस कराती है क्योंकि किसी के साथ टकराव नहीं होता. लेकिन करण ने यह भी माना कि सानिया की स्थिति ज्यादा कठिन है क्योंकि उनका मामला क्रॉस-बॉर्डर (भारत-पाकिस्तान) का भी है.

उससे हफ्ते तक दूर रहना मुश्किल: सानिया
सानिया मिर्जा ने बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा चुनौती तब महसूस होती है, जब उन्हें अपने बेटे को दुबई में छोड़कर काम के लिए भारत आना पड़ता है. उन्होंने कहा, 'मुझे उसे छोड़ना चुनौतीपूर्ण लगता है. मैं दुबई में रहती हूं और भारत भी आना-जाना होता है. मेरे लिए एक हफ्ते तक उससे दूर रहना सबसे मुश्किल है. बाकी सब चीजें मैं संभाल लेती हूं.'

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सानिया ने यह भी बताया कि सिंगल पैरेंट के तौर पर उन्हें कई बार अकेले खाने का मन भी नहीं करता. सानिया कहती हैं, 'कई बार मैंने सिर्फ इसलिए डिनर छोड़ दिया क्योंकि मैं अकेले खाना नहीं चाहती. शायद इसी से मेरा वजन भी कम हुआ. मुझे रात में खाना खाने का मन नहीं करता. मैं कुछ देखती हूं और सो जाती हूं.'

सानिया का कैसा रहा करियर?
सानिया मिर्जा ने अपने टेनिस करियर में कभी भी सिंगल्स ग्रैंड स्लैम खिताब नहीं जीता, लेकिन डबल्स में उनका प्रदर्शन बेहद चमकदार रहा. सानिया ने डबल्स में छह ग्रैंड स्लैम खिताब जीते और डबल्स रैंकिंग में नंबर-1 पर भी पहुंचीं. सानिया ने डबल्स में जो छह ग्रैंड स्लैम खिताब जीते, उसमें तीन विमेंस डबल्स और तीन ही मिक्स्ड डबल्स टाइटल शामिल रहे. उन्होंने अपना आखिरी ग्रैंड स्लैम खिताब 2016 ऑस्ट्रेलियन ओपन महिला डबल्स में जीता था. तब सानिया-मार्टिना हिंगिस की टॉप सीड जोड़ी ने फाइनल में एंड्रिया लावाकोवा और लूसी हराडेका को हराया था.

सानिया मिर्जा ने 2023 दुबई टेनिस चैम्पियनशिप के साथ प्रोफेशनल टेनिस को अलविदा कहा. वह डबल्स रैंकिंग में वर्ल्ड नंबर-1 बनने वाली भारत की पहली महिला टेनिस खिलाड़ी रही हैं. अपने शानदार करियर के दौरान सानिया को कई बड़े सम्मान भी मिले, जिनमें अर्जुन अवॉर्ड (2004), पद्म श्री (2006), खेल रत्न (2015) और पद्म भूषण (2016) शामिल हैं.

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