कलमाडी, चौटाला को IOA अध्यक्ष बनाने का बीजेपी सांसद ने किया समर्थन, तो माकन ने की कुछ मांगे

आईओए का आजीवन संरक्षक और अभय सिंह चौटाला को अध्‍यक्ष बनाए जाने पर खेलमंत्री एवं बीजेपी नेता विजय गोयल की आपत्ति पर बीजेपी के ही सांसद बृज भूषण सिंह ने फैसले का समर्थन करते हुए खेल मंत्री पर ही सवाल उठा दिए. वहीं कांग्रेस नेता अजय माकन ने गोयल का समर्थन करते हुए इस फैसले को खिलाड़ियों के भविष्य पर खतरा करार दिया.

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सुरेश कलमाडी को भारतीय ओलंपिक संघ का आजीवन संरक्षक बनाए जाने पर विवाद सुरेश कलमाडी को भारतीय ओलंपिक संघ का आजीवन संरक्षक बनाए जाने पर विवाद

हिमांशु मिश्रा / मौसमी सिंह / साद बिन उमर

  • नई दिल्ली,
  • 28 दिसंबर 2016,
  • अपडेटेड 4:13 PM IST

सुरेश कलमाडी ने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) का आजीवन संरक्षक का पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. कलमाडी ने आईओए चेयरमैन को चिट्ठी लिखकर कहा है कि वो अपने ऊपर लगे आरोपों से जबतक बेदाग नहीं निकलते, वो यह पद स्वीकार नहीं कर सकते हैं. कलमाडी और अभय सिंह चौटाला को अध्‍यक्ष बनाए जाने पर खेलमंत्री एवं बीजेपी नेता विजय गोयल की आपत्ति पर बीजेपी के ही सांसद बृज भूषण सिंह ने फैसले का समर्थन करते हुए खेल मंत्री पर ही सवाल उठा दिए थे. वहीं कांग्रेस नेता अजय माकन ने गोयल का समर्थन करते हुए इस फैसले को खिलाड़ियों के भविष्य पर खतरा करार दिया.

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यूपी के गोंडा से सांसद एवं भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष बृज भूषण का कहना है कि आईओए ने सुरेश कलमाड़ी और अभय चौटाला की नियक्ति का फैसला लिया है. संघ के इस फैसले में खेल मंत्रालय हस्तक्षेप नहीं कर सकती है. वह कहते हैं, 'खेल मंत्री ने पता नहीं क्यों यह बयान दिया कि आईओए से इस पर रिपोर्ट मांगेंगे और कार्रवाई करेंगे. आईओए सिर्फ आईओसी (अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ) के अधीन काम करती है, ना कि खेल मंत्रालय के... यह बात को (खेल) मंत्री को पता होनी चाहिए.'

वह कहते हैं कि इससे पहले भी खेल संघों में इस तरह के फैसले हुए हैं. वह कहते हैं, 'आईओए काउंसिल ने जो फैसला लिया है, उसको चैलेंज नहीं किया जा सकता है. मैं आईओए के फैसले के साथ हूं.' इसके साथ ही वह सुरेश कलमाड़ी का बचाव करते हुए कहते हैं, 'कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए 1600 करोड़ रुपये जारी किए गए थे. इसमें (खेल आयोजन में) कुल 800 करोड़ रुपये खर्च हुए और बचे हुए 800 करोड़ रुपये वापस कर दिए गए थे.'

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वहीं पुणे से कांग्रेस के पूर्व सांसद सुरेश कलमाड़ी को आईओए का संरक्षक बनाए जाने की पूर्व खेलमंत्री एवं दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन ने आलोचना करते हुए केंद्र सरकार से कलमाड़ी और चौटाला को हटाने के लिए ओलंपिक संघ पर दबाव बनाने की मांग की है.

माकन ने कहा कि भारतीय ओलंपिक संघ का फैसला गलत और खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. उन्होंने कहा कि पिछली बार 2012 में आइओए की मान्यता रद्द हुई थी, अब दुबारा ऐसा नहीं होना चाहिए. अजय माकन ने कहा, 'खेल की दुर्गति के लिए सभी सियासी दल ज़िम्मेदार हैं. सियासत को खेल से दूर रखना चाहिए. मैं अपने दौर में ऐसा नहीं कर पाया, मगर इस सरकार से अपील करता हूं कि वह इस संबंध में बिल लाए.'

पूर्व खेल मंत्री अजय माकन ने इसके साथ ही इस संबंध में अपनी कुछ मांगें रखी
1) आईओए को आत्म मंथन कर खु यह फैसला वापस लेना चाहिए.
2) सरकार को इसका संज्ञान लेते हुए आईओए पर दबाव डालना चाहिए.
4) ऐसे चार्जशीटेड लोगों का खेल संघों में आना, भारत की छवि के लिए ठीक नहीं. मै खेल मंत्री से अनुरोध करता हूं कि वो इस पर तुरंत कार्रवाई.
5) आईओसी से संपर्क करके आईओए पर नैतिक आधार पर दबाव बनाना चाहिए.
6) अगर कोर्ट में इस संबंध में जनहित याचिका आती है, तो सरकार को इसका समर्थन करना चाहिए.

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इससे पहले खेलमंत्री विजय गोयल ने कलमाड़ी और चौटाला को आईओए का आजीवन अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले पर हैरानी जताई थी. उन्होंने कहा कि सरकार से बड़ा कोई नहीं है, हमने डिटेल मांगी है और हमारी सरकार जो भी कदम ठीक समझेगी वो उठाएगी. दोनों के ऊपर आपराधिक मामले हैं, गंभीर अपराधिक पृष्ठभूमि होने की वजह से दोनों को मैनेजमेंट की कमेटी से हटाया गया था.

बता दें कि कलमाड़ी 1996 से 2011 तक आईओए अध्यक्ष रहे और उन्हें 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में घोटाले में संलिप्तता के कारण दस महीने जेल की सजा काटनी पड़ी थी. बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था. पुणे में जन्मे 72 वर्षीय कलमाड़ी कांग्रेस के पूर्व सांसद भी हैं. वह 2000 से 2013 तक एशियाई एथलेटिक्स संघ के भी अध्यक्ष रहे थे. उन्हें पिछले साल ही एशियाई एथलेटिक्स संघ का आजीवन अध्यक्ष बनाया गया था. वह अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ (आईएएएफ) के भी 2001 से 2013 तक सदस्य रहे.

वहीं अभय चौटाला दिसंबर 2012 से फरवरी 2014 तक आईओए अध्यक्ष रहे. उस समय अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने चुनावों में आईओए को निलंबित कर रखा था क्योंकि उसने चुनावों में ऐसे उम्मीद्वार उतारे थे जिनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल थे. आईओए अध्यक्ष के रूप में उनके चुनाव को आईओसी ने रद्द कर दिया था. आईओए संविधान में संशोधन करके सुनिश्चित किया गया कि आरोपी उम्मीद्वारों को चुनावों में उतरने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इसके बाद ही आईओसी ने फरवरी 2014 में आईओए का निलंबन हटाया था.

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