महेंद्र सिंह धोनीः विकेट के बीच का बेस्ट रनर जो हो गया रन आउट

अपने 350वें वनडे मैच में फिफ्टी लगाने वाले महेंद्र सिंह धोनी इस बार रन आउट हो गए. वह करियर के पहले मैच में भी रन आउट हुए. इसके बाद वह वर्ल्ड कप के अंतिम मैच में भी रन आउट हो गए.

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अपने 350वें वनडे मैच में भी रन आउट हो गए धोनी (फोटो-IANS) अपने 350वें वनडे मैच में भी रन आउट हो गए धोनी (फोटो-IANS)

aajtak.in / सुरेंद्र कुमार वर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 11:23 PM IST

कभी 'कैप्टन कूल' के नाम से मशहूर रहे महेंद्र सिंह धोनी की बल्लेबाजी की खासियत यह भी है वह जब क्रीज पर होते हैं तो बड़े से बड़ा क्षेत्ररक्षक भी उन्हें तेजी से रन लेने से रोक नहीं पाता. कई मौकों पर वह 1 रन को 2 रन में बदल देते हैं. बल्लेबाजी के दौरान जब धोनी बड़े शॉट लगाने में नाकाम रहते हैं तो तेजी से दौड़कर रन बनाते रहते हैं.

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वर्ल्ड कप के पहले सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ धोनी जब बल्लेबाजी करने उतरे तो उन पर खासा दबाव था क्योंकि टीम का शीर्ष क्रम बुरी तरह लड़खड़ा गया और जीत का दारोमदार उन पर था. धोनी की बल्लेबाजी की खासियत यह भी है कि वह शुरुआत धीमे अंदाज से करते हैं और फिर अपनी बल्लेबाजी का गियर बदलते हुए बड़े शॉट खेलकर रन बनाते हैं. उन्होंने कई मौकों अंतिम ओवर और अंतिम गेंद पर छ्क्का मारने का कारनामा किया है.

सेमीफाइनल मुकाबले में धोनी से भी यही आस थी कि अंतिम ओवरों में मुकाबला जाने पर बड़े शॉट खेलकर जीत दिलाएंगे, लेकिन इस बार उन्हें नाकामी हाथ लगी. बल्लेबाजी में बड़े शॉट लगाने का मौका नहीं मिलने पर वह 1 या 2 रन लेकर विपक्षी टीम पर दबाव बनाते हैं और साथी खिलाड़ी में जोश भरते हैं. इस मैच में भी वह कुछ ऐसा ही कर रहे थे.

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सीधे थ्रो से हुए रन आउट

भारत को अंतिम 2 ओवर में जीत के लिए 31 रन चाहिए थे. 49वें ओवर में लॉकी फर्गुसन की पहली गेंद पर बैकवर्ड प्वाइंट पर जोरदार छक्का जड़ दिया. इस छक्के से टीम में जान आ गई, लेकिन अगली गेंद पर बड़ा शॉट खेलने से चूक जाने के बाद तीसरी गेंद पर उन्होंने 2 रन लेने की कोशिश की, लेकिन दूसरे रन लेने के दौरान मार्टिन गप्टिल के सीधे थ्रो के कारण वह रन आउट हो गए. सीधे थ्रो के कारण वह 50 रन बनाकर आउट हो गए.

अपने 350वें वनडे मैच में फिफ्टी लगाने वाले महेंद्र सिंह धोनी (50) इस बार रन आउट हो गए. वह करियर के पहले मैच में भी रन आउट हुए. इसके बाद वह अपने अंतिम 350वें वनडे मैच में भी रन आउट हो गए. उनके रन आउट होने के समय भारत को जीत के लिए 24 रन चाहिए थे. स्लॉग ओवरों में वह जिस तरह से बड़े शॉट खेलते हैं उससे लग रहा था कि भारत मैच में जीत हासिल कर सकता है, लेकिन इस निर्णायक मुकाबले में निर्णायक मोड़ पर उनका रन आउट होना टीम पर भारी पड़ गया.

सीधे थ्रो से रन आउट हो गए धोनी

16वीं बार हुए रन आउट

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पिच पर धोनी जितनी तेजी से रन लेते हैं, उन्हें रन आउट करना आसान नहीं होता. उनका रिकॉर्ड बताता है कि अपने करियर की 297वीं पारी में वह महज 16वीं बार ही रन आउट हुए हैं. जबकि 18 बार पगबाधा (एलबीडब्ल्यू) भी हुए. धोनी अपने करियर में 138 बार कैच आउट हुए हैं. महज 2 बार ही वह स्टंपिंग हुए हैं. 297 पारियों में से वह 84 पारियों में नाबाद लौटने में कामयाब रहे.

माना जा रहा है कि 38 साल के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपना अंतिम वर्ल्ड कप मैच खेल लिया है. कयास यह भी लगाया जा रहा है कि यह उनके वनडे करियर का अंतिम मैच भी हो सकता है क्योंकि धोनी कभी भी संन्यास लेने का ऐलान कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो क्रिकेट की रिकॉर्डबुक में यह दर्ज होगा कि विकेट के बीच का बेस्ट रनर पहले और अंतिम मैच में रन आउट हुआ.

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