कौन हैं मनोज बडाले? जिन्होंने 'सस्ती टीम' राजस्थान रॉयल्स को बना दिया सुपर ब्रांड, ₹15,000 करोड़ तक पहुंचाई वैल्यू

राजस्थान रॉयल्स की ऐतिहासिक बिक्री के बाद मनोज बडाले का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. 2008 में जब इस टीम को सबसे कम कीमत पर खरीदा गया था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही फ्रेंचाइजी एक दिन अरबों की वैल्यू वाली ग्लोबल ब्रांड बन जाएगी. कम बजट, बड़ी सोच के दम पर बडाले ने राजस्थान रॉयल्स को 'अंडरडॉग' से 'पावरहाउस' में बदल दिया.

Advertisement
राजस्थान रॉयल्स की सफलता में मनोज बडाले का अहम रोल रहा है. (Photo: ITG) राजस्थान रॉयल्स की सफलता में मनोज बडाले का अहम रोल रहा है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:20 PM IST

राजस्थान रॉयल्स (RR) ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) इतिहास की सबसे चौंकाने वाली डील्स में से एक को अंजाम देते हुए खुद को 1.63 बिलियन डॉलर (करीब 15,335 करोड़ रुपये) में बेच दिया. काल सोमानी के नेतृत्व वाले अमेरिकी कंसोर्टियम ने फ्रेंचाइजी को खरीदा है, जिसमें वॉलमार्ट फैमिली के Rob Walton और फोर्ड मोटर कंपनी से जुड़े हैम्प परिवार के सदस्य भी शामिल हैं. यह डील सिर्फ एक ट्रांजैक्शन नहीं, बल्कि आईपीएल के ग्लोबल बिजनेस मॉडल की ताकत का बड़ा सबूत है.

Advertisement

2008 में जब आईपीएल की शुरुआत हुई, तब राजस्थान रॉयल्स को सिर्फ 67 मिलियन डॉलर में खरीदा गया था. उस समय एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया ₹40 के करीब था. यानी भारतीय रुपये में इसकी वैल्यू ₹2680 करोड़ थी. तब यह लीग की सबसे सस्ती फ्रेंचाइजी थी. लेकिन, महज 18 साल में, यही टीम ₹15,000 करोड़ के पार पहुंच गई. यह उछाल दिखाता है कि आईपीएल अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती स्पोर्ट्स लीग्स में से एक बन चुका है.

राजस्थान रॉयल्स की इस सफलता की कहानी के असली आर्किटेक्ट हैं- मनोज बडाले. महाराष्ट्र के धुले में जन्मे बडाले ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की और बाद में ब्रिटेन में ही टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़ा नाम बनाया. वह ब्लेंहेम चालकोट (Blenheim Chalcot) के को-फाउंडर हैं, जो ब्रिटेन की प्रमुख डिजिटल वेंचर बिल्डिंग कंपनियों में से एक है.

Advertisement

पहले ही सीजन में बनी चैम्पियन
2008 में इमर्जिंग मीडिया के जरिए मनोज बडाले ने राजस्थान रॉयल्स को खरीदा और एक नई सोच के साथ टीम को आगे बढ़ाया. बडाले की सबसे बड़ी खासियत रही- कम बजट में बड़ी सोच. उन्होंने डेटा एनालिटिक्स, युवा खिलाड़ियों और स्मार्ट रणनीति के दम पर टीम को खड़ा किया. यही वजह रही कि राजस्थान रॉयल्स ने पहले ही सीजन (2008) में खिताब जीतकर सबको चौंका दिया. यह आईपीएल इतिहास की सबसे बड़ी ‘अंडरडॉग’ स्टोरी मानी जाती है.

2016-17 में टीम को सस्पेंशन झेलना पड़ा, लेकिन वापसी के बाद राजस्थान रॉयल्स ने फिर से खुद को स्थापित किया. बडाले की लीडरशिप में फ्रेंचाइजी ने मुश्किल दौर को भी ग्रोथ में बदला और अपनी ब्रांड वैल्यू लगातार बढ़ाई. आईपीएल अब सिर्फ क्रिकेट नहीं, एक मल्टी-बिलियन डॉलर इंडस्ट्री है. इंटरनेशनल निवेशकों का भरोसा भारतीय स्पोर्ट्स मार्केट पर तेजी से बढ़ रहा है.

फ्रेंचाइजी मॉडल भविष्य में और भी बड़े निवेश आकर्षित करेगा. 67 मिलिन डॉलर की ‘अंडरडॉग’ टीम से ₹15,000 करोड़ की ग्लोबल ब्रांड बनने तक का राजस्थान रॉयल्स का सफर भारतीय क्रिकेट की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक है. और इस कहानी के केंद्र में हैं मनोज बडाले, जिन्होंने यह साबित किया कि सही सोच, डेटा और धैर्य से बिजनेस की दुनिया बदली जा सकती है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement