'एहसान ना भूले पाकिस्तान...', T20 वर्ल्ड कप विवाद में UAE की एंट्री, PCB को लताड़ा

संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान को याद दिलाया है कि उसने हमेशा क्रिकेट से जुड़े मुद्दों पर उसका सपोर्ट किया है. एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड का मानना है कि अगर भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबला नही होता है तो इसके चलते एसोसिएट देशों को भी आर्थिक नुकसान पहुंचेगा.

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 पाकिस्तानी टीम ने भारत के खिलाफ ग्रुप मैच नहीं खेलने का फैसला लिया था. (Photo: AFP/Getty Images) पाकिस्तानी टीम ने भारत के खिलाफ ग्रुप मैच नहीं खेलने का फैसला लिया था. (Photo: AFP/Getty Images)

aajtak.in

  • दुबई,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:14 PM IST

आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले हाईवोल्टेज मुकाबले पर अनिश्चितता लगातार बढ़ती जा रही है. श्रीलंका क्रिकेट (SLC) के बाद अब एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने भी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को पत्र लिखकर 15 फरवरी को प्रस्तावित भारत-PAK मैच से दूरी बनाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है. इस बीच आईसीसी भी लगातार बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकालने की कोशिश में जुटी है, ताकि टूर्नामेंट का सबसे बड़ा मुकाबला संकट में ना पड़े.

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RevSportz की रिपोर्ट के अनुसार एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड ने अपने पत्र में पाकिस्तान को 'क्रिकेट परिवार का अहम सदस्य' बताते हुए कहा कि उसने मुश्किल समय में पाकिस्तान को अपने मैदान उपलब्ध कराए और कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबले आयोजित करने में मदद की. बोर्ड ने याद दिलाया कि पाकिस्तान क्रिकेट को वैश्विक मंच पर बनाए रखने में यूएई की भूमिका अहम रही है. ऐसे में भारत के खिलाफ मैच का बायकॉट ना केवल क्रिकेट के लिए नुकसानदेह होगा, बल्कि एसोसिएट देशों की वित्तीय स्थिति पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है.

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एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड ने अपने संदेश में कहा कि टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में किसी भी बड़े मुकाबले का रद्द होना प्रसारण अधिकार, स्पॉन्सरशिप और वैश्विक दर्शकों पर सीधा असर डालता है, जिससे पूरे क्रिकेट इकोसिस्टम को नुकसान हो सकता है. इसलिए सभी पक्षों को मिलकर व्यावहारिक और स्वीकार्य समाधान निकालना चाहिए.

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श्रीलंका ने भी दी थी कड़ी चेतावनी
इससे पहले श्रीलंका क्रिकेट ने भी पीसीबी से अपना रुख बदलने की अपील की थी और संभावित आर्थिक नुकसान का हवाला दिया था. अब यूएई के सामने आने से यह साफ है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समुदाय पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है कि वह टूर्नामेंट की गरिमा बनाए रखे और विवाद का समाधान बातचीत से निकाले.

आईसीसी इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है. आईसीसी के अधिकारियों ने PCB साथ कई दौर की बातचीत की है, ताकि किसी भी तरह से टूर्नामेंट के शेड्यूल और व्यावसायिक संरचना पर असर न पड़े. आईसीसी के लिए भारत-पाकिस्तान मैच बेहद अहम है, क्योंकि यह मुकाबला प्रसारण राजस्व, विज्ञापन और वैश्विक दर्शकों के लिहाज से सबसे बड़ा आकर्षण माना जाता है.

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उधर क्रिकबज की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच खेलने के लिए आईसीसी के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी है. पहली मांग यह है कि आईसीसी से मिलने वाली वार्षिक फंडिंग में बढ़ोतरी. वहीं भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज की बहाली के लिए आईसीसी प्रयास करे. साथ ही मैच के बाद हैंडशेक जैसी खेल भावना से जुड़ी परंपराओं का पालन किया जाए.

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रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सरकार से परामर्श के बाद ही पीसीबी कोई अंतिम निर्णय लेगा. यही कारण है कि अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पाकिस्तान अपने रुख में नरमी दिखाएगा या फिर वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा मुकाबला विवादों में ही घिरा रहेगा. भारत-पाकिस्तान मैच को दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट मुकाबला माना जाता है. 

ऐसे में अगर यह मैच नहीं होता है तो इसका असर सिर्फ टूर्नामेंट ही नहीं, बल्कि पूरे क्रिकेट कैलेंडर और वैश्विक क्रिकेट अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्रिकेट की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता मैदान पर दिखेगी या इतिहास में एक बड़ी अनुपस्थिति के रूप में दर्ज होगी.

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