भारतीय टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमायर यादव अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कप्तानी में उनका अंदाज बिल्कुल अलग है- शांत, मुस्कुराता हुआ और दबाव से दूर. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने टीम इंडिया की शानदार जीत प्रतिशत, कप्तानी के अपने तरीके और एक दिलचस्प किस्से के जरिए मशहूर गायिका श्रेया घोषाल से जुड़े पुराने कनेक्शन का भी जिक्र किया.
52 में 42 जीत… टी20 में भारत का दम
भारत की टी20 टीम की कमान संभालने वाले सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है. उनकी कप्तानी में भारत ने अब तक 52 मुकाबले खेले हैं, जिनमें से 42 में जीत हासिल की है. सिर्फ 8 मैचों में हार मिली, जबकि 2 मुकाबलों का कोई नतीजा नहीं निकला. इस तरह भारत का जीत प्रतिशत 80 फीसदी से ज्यादा बैठता है, जो टी20 जैसे अनिश्चित फॉर्मेट में बेहद प्रभावशाली माना जाता है.
पढ़ाई से की मजेदार तुलना
इस शानदार रिकॉर्ड पर प्रतिक्रिया देते हुए सूर्यकुमार ने मजाकिया अंदाज में अपनी पढ़ाई को याद किया.
उन्होंने पीटीआई से इंटरव्यू में कहा, 'स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई के जरिए मैं जिस प्रतिशत को हासिल करने की कोशिश करता था, वह अब जाकर क्रिकेट में मिल रहा है. वहां मैं 50–60 प्रतिशत से आगे नहीं जा पाया, लेकिन यहां यह सुनकर अच्छा लगता है.'
हालांकि सूर्या ने यह भी साफ किया कि वह आंकड़ों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, लेकिन जीतना उन्हें हमेशा पसंद है. उनके मुताबिक, 'मुझे किसी भी खेल में हारना पसंद नहीं है. अगर पूरी टीम एक ही सोच के साथ ड्रेसिंग रूम में बैठती है और एक ही दिशा में आगे बढ़ती है, तभी ऐसा जीत प्रतिशत हासिल किया जा सकता है.'
श्रेया घोषाल से जुड़ा पुराना कनेक्शन
इंटरव्यू के दौरान बातचीत में एक दिलचस्प किस्सा भी सामने आया. मशहूर गायिका श्रेया घोषाल कभी सूर्यकुमार के पड़ोस में ही रहती थीं.
सूर्या ने बताया कि श्रेया घोषाल के छोटे भाई सौम्यदीप घोषाल उनके साथ स्कूल में पढ़ते थे. दोनों स्कूलमेट थे और उन्होंने साथ में काफी समय बिताया. यह किस्सा सुनकर इंटरव्यू के दौरान माहौल भी हल्का हो गया.
रोहित से सीखा शांत कप्तानी का मंत्र
मैदान पर अक्सर देखा जाता है कि कैच छूट जाए या मौका हाथ से निकल जाए, तब भी सूर्यकुमार के चेहरे पर मुस्कान बनी रहती है. इस पर उन्होंने बताया कि यह तरीका उन्होंने भारत के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा से सीखा है.
सूर्या के मुताबिक,'मैं रोहित भाई की कप्तानी में खेल चुका हूं. मैंने देखा कि उनका रिएक्शन हमेशा लगभग एक जैसा रहता था, वह गुस्सा नहीं करते थे. उन्होंने भी अपने करियर में वह दौर देखा था.'
डर से नहीं निकलता सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
SKY का मानना है कि कप्तान का काम खिलाड़ियों में डर पैदा करना नहीं, बल्कि भरोसा जगाना होता है.
उन्होंने कहा, 'कोई खिलाड़ी जानबूझकर कैच नहीं छोड़ता या खराब गेंद नहीं डालता. हर कोई टीम के लिए अच्छा करना चाहता है. अगर गलती हो जाती है तो हमें उसे सुधारने का मौका मिलता है.'
उनके मुताबिक अगर टीम के अंदर डर का माहौल होगा तो खिलाड़ियों से उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं निकल पाएगा. इसलिए वह हमेशा कोशिश करते हैं कि ड्रेसिंग रूम का माहौल सकारात्मक और सहज बना रहे.
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