खाना खाओ, प्लेट खुद सिंक में रखो... पत्नी की सख्ती ने SKY को बनाया वर्ल्ड चैम्पियन कप्तान

2018 में पत्नी के एक सीधे और ईमानदार सवाल- 'भारत के लिए खेलना है तो कैसे?'...ने Suryakumar Yadav की सोच और करियर की दिशा बदल दी. इसके बाद उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल, ट्रेनिंग और अनुशासन में बड़े बदलाव किए.

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टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी और सूर्या-देविशा... (Instagram/Devisha Suryakumar Yadav (@devishashetty_) टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी और सूर्या-देविशा... (Instagram/Devisha Suryakumar Yadav (@devishashetty_)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:35 PM IST

क्रिकेट की दुनिया में कई कहानियां मेहनत और टैलेंट की होती हैं, लेकिन सूर्यकुमार यादव की कहानी एक सवाल से शुरू होती है- ऐसा सवाल जिसने उनकी पूरी जिंदगी और करियर का रास्ता बदल दिया.

यह 2018 की बात है. सब कुछ ठीक चल रहा था. IPL में खेल रहे थे, जिंदगी आराम से आगे बढ़ रही थी... लेकिन तभी उनकी पत्नी देविशा शेट्टी ने एक ऐसा सवाल पूछा, जो सीधे दिल में उतर गया- 'अगर तुम्हें भारत के लिए खेलना है, तो तुम वहां तक पहुंचने का प्लान क्या है?'

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यह सवाल साधारण था, लेकिन असर असाधारण.

आराम से आग तक: बदलाव की शुरुआत

2016 में शादी के बाद तक सूर्या का करियर ठीक-ठाक चल रहा था.कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के लिए खेलते हुए वो अच्छा कर रहे थे, लेकिन 'भारत के लिए खेलना' अभी भी एक सपना था, लक्ष्य नहीं.

2018 में मुंबई इंडियंस (MI) में आने के बाद सब कुछ बदलने लगा... और उसी दौरान देविशा का वो सवाल आया, जिसने सूर्या को खुद से जवाब मांगने पर मजबूर कर दिया.

यह कोई झगड़ा नहीं था, बल्कि एक ईमानदार बातचीत थी- 'अगर इंडिया खेलना है, तो एक कदम आगे कैसे बढ़ोगे?'

यही वो मोड़ था जहां से 'सिर्फ अच्छा खिलाड़ी' बनने का सफर खत्म हुआ और 'भारत के लिए खेलने वाला खिलाड़ी' बनने की शुरुआत.

कठिन फैसले, बड़ा सपना

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सवाल के बाद सिर्फ सोच नहीं बदली, जिंदगी भी बदली. दोनों ने मिलकर फैसले लिए- 

- डाइट कंट्रोल

- दोस्तों और सोशल लाइफ में कटौती

- वीकेंड मस्ती की जगह रेस्ट और रिकवरी

- सख्त ट्रेनिंग रूटीन

यानी जिंदगी पूरी तरह 'क्रिकेट-फोकस्ड' हो गई.

और नतीजा?
2018 में 500+ रन, फिर लगातार बेहतर प्रदर्शन… और आखिरकार 2021 में टीम इंडिया में एंट्री.

‘ब्रूटली ऑनेस्ट’ पार्टनर: पर्दे के पीछे की ताकत

सूर्यकुमार आज जिस मुकाम पर हैं- एक वर्ल्ड कप जीतने वाले कप्तान उसमें देविशा का बड़ा रोल है.

उन्होंने कभी क्रिकेट टेक्निक नहीं सिखाई, लेकिन जिंदगी के फैसले सिखाए.

- मुश्किल हालात में कैसे सोचें

- खुद को कैसे पेश करें

- सफलता के बाद जमीन पर कैसे रहें

उनकी ईमानदारी कई बार 'कड़वी' भी लगी, लेकिन वही सबसे ज्यादा असरदार साबित हुई.

टी20 वर्ल्ड कप के साथ देविशा शेट्टी और सूर्यकुमार यादव. (Photo, PTI)

घर के अंदर ‘सुपरस्टार’ नहीं, सिर्फ ‘सूर्या’

देविशा ने एक और बड़ा नियम बनाया- 'क्रिकेट को घर के बाहर छोड़कर आओ.'

घर में कोई स्टारडम नहीं, कोई शोहरत नहीं- वहां सिर्फ एक आम इंसान, एक पति.

'खाना खाओ, प्लेट खुद सिंक में रखो'- ये छोटी-छोटी बातें ही सूर्या को जमीन से जोड़े रखती हैं.,

आखिरी बात: एक सवाल, जिसने इतिहास लिखा

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आज जब सूर्यकुमार यादव वर्ल्ड कप जीतने वाले कप्तान हैं, तो वह खुलकर कहते हैं- 
अगर वो एक सवाल नहीं होता, तो शायद यह सफर भी नहीं होता. कभी-कभी जिंदगी बदलने के लिए बड़ी सलाह नहीं,
बस एक सच्चा सवाल ही काफी होता है.

(PTI को दिए पॉडकास्ट इंटरव्यू पर आधारित)
 

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