कनाडा क्रिकेट इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है, जहां खेल से इतर गंभीर आरोपों ने उसकी साख को झकझोर दिया है. हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि टीम चयन, कप्तानी और प्रशासनिक फैसलों पर बाहरी दबाव और धमकियों का असर हो सकता है. इस पूरे विवाद के केंद्र में कनाडा की राष्ट्रीय टीम के भारतीय मूल के कप्तान दिलप्रीत सिंह बाजवा हैं, जिनकी नियुक्ति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, दिलप्रीत बाजवा की कप्तानी के पीछे कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग का प्रभाव हो सकता है. यह आरोप लगाया गया है कि इस गैंग ने टीम के कुछ खिलाड़ियों पर दबाव बनाया, ताकि वे दिलप्रीत का समर्थन करें. हालांकि इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे जुड़ी घटनाओं ने क्रिकेट जगत को चिंतित कर दिया है.
बताया गया है कि कुछ खिलाड़ियों को सीधे तौर पर धमकियां दी गईं. उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि उन्होंने टीम में कुछ खास खिलाड़ियों का समर्थन नहीं किया, तो उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. एक घटना में दो लोगों ने खुद को गैंग का सदस्य बताते हुए कनाडा टीम के एक खिलाड़ी को रेस्तरां में अलग ले जाकर धमकी दी. उस खिलाड़ी की पहचान सुरक्षा कारणों से गुप्त रखी गई है.
सूत्रों के अनुसार, उस खिलाड़ी से कहा गया कि वह दिलप्रीत बाजवा और एक अन्य खिलाड़ी को टीम में बनाए रखने में मदद करे. यदि ऐसा नहीं हुआ, तो उसे 'मुश्किल में पड़ने' की चेतावनी दी गई. इस घटना के बाद से टीम के भीतर भय का माहौल बनने की बात कही जा रही है. एक अन्य व्यक्ति, जिसे भी धमकी मिली, ने बताया कि उसे संदेश भेजकर कहा गया कि हम जानते हैं तुम कहां रहते हो.
दिलप्रीत बाजवा की कप्तानी पहले से ही विवादों में रही है. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ल्ड कप से ठीक पहले तक अनुभवी ऑलराउंडर निकोलस किर्टन (Nicholas Kirton) को कप्तान बनाए जाने की संभावना थी. ऐसे में अचानक नेतृत्व परिवर्तन ने कई सवाल खड़े कर दिए थे. अब इन नए आरोपों के सामने आने के बाद उस फैसले पर और भी संदेह गहराने लगा है.
मामला सिर्फ कप्तानी तक सीमित नहीं है. क्रिकेट कनाडा (Cricket Canada) की कार्यप्रणाली भी जांच के घेरे में आ गई है. रिपोर्ट में मैच फिक्सिंग और खराब प्रशासन जैसे गंभीर आरोपों का जिक्र किया गया है. हालांकि इन आरोपों के समर्थन में अभी तक कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, लेकिन लगातार उठ रहे सवालों ने संगठन की पारदर्शिता पर चिंता बढ़ा दी है.
इन घटनाओं का असर प्रशासनिक स्तर पर भी दिखने लगा है. एक प्रांतीय अधिकारी को अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस की मदद लेनी पड़ी, जबकि एक पूर्व बोर्ड सदस्य ने लगातार मिल रही धमकियों के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इतना ही नहीं, उनके घर पर फायरिंग की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिसने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.
कनाडा में क्रिकेट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और इसे दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते खेलों में गिना जा रहा है. बड़े शहरों में लीग क्रिकेट का विस्तार हो रहा है और नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं. ऐसे में इस तरह के विवाद खेल के भविष्य के लिए चिंता का विषय बन गए हैं.
फिलहाल, यह मामला जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और खिलाड़ियों का भरोसा बहाल किया जा सके. जब तक आरोप साबित नहीं होते, तब तक इन्हें सावधानी से देखने की जरूरत है, लेकिन इतना साफ है कि इस विवाद ने कनाडा क्रिकेट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क