अफ्रीकी देश युगांडा में 60 के दशक में भारतीय कारोबारियों का रुतबा था. देश की इकनॉमी उनके भरोसे चलती थी. यही बात वहां के तानाशाह ईदी अमीन को पसंद नहीं आई. उसने न सिर्फ हिंदुस्तानियों को बाहर भेजा, बल्कि अपने ही लोगों को मरवाने लगा. अमीन का राज छिनने के बाद देश में जहां-तहां सामूहिक कब्रें मिलीं, जिसमें किसी के सिर तो किसी के हाथ-पैर गायब थे.