अन्य धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य मानने से रोकने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण निर्णय आया है. यह फैसला अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग के अधिकारों को और मजबूत करेगा. इस मुकदमे में यह पाया गया कि कोई व्यक्ति जो धर्म परिवर्तन कर चुका होता है, वह इस एक्ट का लाभ नहीं उठा सकता है. यह मामला 1989 के एक्ट के अंतर्गत दर्ज हुआ था जहाँ धर्म परिवर्तन कर लेने वाले व्यक्ति को सदस्यता नहीं दी जाएगी.