पश्चिम बंगाल में निरंजन चंद्र साह और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की गई क्योंकि जांच में पता चला कि आरोपियों ने सरकारी गेहूं की हेराफेरी की थी. उन्होंने गरीबों के लिए निर्धारित राशन को कम कीमत पर खरीदा और फिर अवैध तरीके से खुले बाजार में बेच दिया.